जनजातिकरण के मुद्दे पर सरकार को टाइपा की दोटूक चेतावनी : ‘अब और इंतजार नहीं’ :15 अगस्त से काला झंडा आंदोलन का ऐलान : ‘चुनाव पूर्व किए गए वादे पूरे करे सरकार’ : छह समुदायों के जनजातिकरण पर मंत्री समूह की रिपोर्ट तुरंत केंद्र को भेजने की मांग
शिवसागर में टाइपा की प्रेस वार्ता: 15–16 जुलाई को मनाया जाएगा 31वां स्थापना दिवस, पहली बार दिए जाएंगे 'आहोम प्राण' और 'आहोम रत्न' सम्मान

शिवसागर, 1 जुलाई : असम में लंबे समय से लंबित छह समुदायों के जनजातिकरण (एसटी दर्जा) के मुद्दे पर टाई आहोम युवा परिषद (टाइपा) ने राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया है। बुधवार को शिवसागर प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष दिगंत तामुली ने कहा कि यदि राज्य सरकार शीघ्र ही जनजातिकरण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाती, तो संगठन आगामी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस से पूरे राज्य में काला झंडा प्रदर्शन कर लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा।

शिवसागर में दो दिवसीय स्थापना दिवस समारोह
टाइपा ने जानकारी दी कि संगठन का 31वां केंद्रीय स्थापना दिवस आगामी 15 और 16 जुलाई को शिवसागर में दो दिवसीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर राज्यभर से संगठन के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आहोम समाज के लोग शामिल होंगे। समारोह में संगठनात्मक बैठकें, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श भी होगा।
पहली बार दिए जाएंगे ‘आहोम प्राण’ और ‘आहोम रत्न’ सम्मान
इस वर्ष स्थापना दिवस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि पहली बार संगठन की ओर से दो प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए जाएंगे।
‘आहोम प्राण’ सम्मान मरणोपरांत टाइपा के संस्थापक महासचिव स्वर्गीय डामचाओ पंकज बरगोहाईं को उनके संगठन निर्माण एवं समाज के प्रति योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम का नाम रोशन करने वाले धावक अम्लान बरगोहाईं को ‘आहोम रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
संगठन का कहना है कि इन सम्मानों का उद्देश्य समाज के प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उन्हें सम्मानित करना है।
विधानसभा सत्र में जनजातिकरण पर निर्णय लेने की मांग
प्रेस वार्ता में टाइपा ने राज्य सरकार से मांग की कि आगामी असम विधानसभा के मानसून सत्र में छह समुदायों के जनजातिकरण से संबंधित मंत्री समूह (Group of Ministers) की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा कर उसे तत्काल केंद्र सरकार को भेजा जाए। संगठन का कहना है कि वर्षों से यह मामला केवल आश्वासनों तक सीमित रहा है और अब इसे और लंबित रखना स्वीकार्य नहीं होगा।
चुनाव से पहले किए गए वादे की दिलाई याद
दिगंत तामुली ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री और आहोम समाज के विभिन्न संगठनों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। उस बैठक में चुनाव समाप्त होने के बाद छह समुदायों के जनजातिकरण के मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह प्रतिबद्धता भाजपा के चुनावी घोषणा-पत्र में भी शामिल थी।
उन्होंने कहा कि हालिया चुनाव में आहोम समुदाय ने पूरी निष्ठा के साथ सत्तारूढ़ भाजपा का समर्थन किया था और स्वयं मुख्यमंत्री ने भी सार्वजनिक रूप से इस समर्थन को स्वीकार किया था। ऐसे में अब सरकार को अपने वादे पर अमल करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री के बयान पर जताई नाराजगी
टाइपा ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम के उस हालिया बयान पर भी नाराजगी जताई, जिसमें कथित रूप से कहा गया कि आगामी संसद के मानसून सत्र में छह समुदायों के जनजातिकरण का विषय शामिल नहीं होगा। संगठन का कहना है कि यदि राज्य सरकार मंत्री समूह की रिपोर्ट केंद्र को नहीं भेजती, तो जनजातिकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा।
15 अगस्त से काला झंडा आंदोलन की चेतावनी
टाइपा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र ही मंत्री समूह की रिपोर्ट पर निर्णय लेकर उसे केंद्र सरकार को नहीं भेजती, तो 15 अगस्त से पूरे असम में काला झंडा प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन तब तक जारी रहेगा जब तक छह समुदायों के जनजातिकरण की दिशा में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती।
सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील
प्रेस वार्ता के अंत में संगठन ने कहा कि छह समुदायों के जनजातिकरण का मुद्दा केवल राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की पहचान, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। इसलिए राज्य सरकार को अब विलंब किए बिना मंत्री समूह की रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर केंद्र सरकार के पास भेजना चाहिए, ताकि जनजातिकरण की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो सके।




