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एमए की परीक्षा देने जा रही मेधावी छात्रा की दर्दनाक मौत : गुवाहाटी के मालीगांव में पेड़ गिरने से हादसा, सोनारी की होनहार बेटी परिश्मिता हजारिका का अधूरा रह गया सपना : चराईदेव जिले में शोक की लहर : अंतिम परीक्षा देने जाते समय काल के गाल में समाई छात्रा

मृतका परिश्मिता मूल रूप से चराईदेव जिले के सोनारी के शांतिपुर क्षेत्र की निवासी थी : स्कूटी चला रहे ज्योतिर्मय मोहन का घर भी सोनारी क्षेत्र के सोनापुर इलाके में

सोनारी, 12 जून : उच्च शिक्षा प्राप्त कर जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने का सपना देख रही चराईदेव जिले के सोनारी की एक प्रतिभाशाली छात्रा की जिंदगी शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में थम गई। गुवाहाटी के मालीगांव क्षेत्र में अचानक पेड़ गिरने से हुए हादसे में एमए अंतिम वर्ष की छात्रा परिश्मिता हजारिका की मौत हो गई, जबकि उनके साथ स्कूटी पर सवार युवक ज्योतिर्मय मोहन घायल हो गए। इस दुखद घटना ने न केवल मृतका के परिवार बल्कि पूरे सोनारी क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है।

अंतिम परीक्षा देने जा रही थीं परिश्मिता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिश्मिता हजारिका शुक्रवार सुबह अपनी एमए अंतिम वर्ष की परीक्षा देने के लिए निकली थीं। उनके साथ स्कूटी पर ज्योतिर्मय मोहन सवार थे, जो वाहन चला रहे थे। दोनों गुवाहाटी के मालीगांव स्थित भूतनाथ कालीपुर क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी अचानक सड़क किनारे का एक विशाल पेड़ गिर पड़ा और स्कूटी उसकी चपेट में आ गई।

हादसा इतना भीषण था कि परिश्मिता गंभीर रूप से घायल हो गईं। स्थानीय लोगों एवं राहतकर्मियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने परिश्मिता को मृत घोषित कर दिया। वहीं घायल ज्योतिर्मय मोहन का उपचार जारी है।

दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतका परिश्मिता हजारिका मूल रूप से चराईदेव जिले के सोनारी के शांतिपुर क्षेत्र की निवासी थीं। वहीं स्कूटी चला रहे ज्योतिर्मय मोहन का घर भी सोनारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सोनापुर इलाके में है।

हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। परिश्मिता के शांतिपुर स्थित आवास पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। रिश्तेदार, पड़ोसी, मित्र और शुभचिंतक लगातार परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।

शिक्षा के प्रति समर्पित थी परिश्मिता

परिश्मिता हजारिका एक मेधावी और अनुशासित छात्रा के रूप में जानी जाती थीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सोनारी के प्रतिष्ठित हाजी असीमुद्दीन विद्यालय से प्राप्त की और वहीं से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की।

इसके बाद उन्होंने जोरहाट के डीसीबी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के प्रति उनकी लगन उन्हें गुवाहाटी विश्वविद्यालय तक ले गई, जहां वे स्नातकोत्तर अध्ययन कर रही थीं। एमए अंतिम वर्ष की परीक्षा उनके शैक्षणिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

जुलाई 2023 से गुवाहाटी में रह रही थीं

परिवार के अनुसार परिश्मिता जुलाई 2023 से गुवाहाटी में रह रही थीं। वे जी.एस. रोड क्षेत्र स्थित एक मेस में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थीं।

उनका सपना उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में अपनी अलग पहचान बनाना था। शिक्षकों और सहपाठियों के अनुसार वह हमेशा पढ़ाई को लेकर गंभीर रहती थीं और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित थीं।

पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी थीं सक्रिय

परिश्मिता केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाती थीं। बचपन से ही उन्हें नाटक, अभिनय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विशेष रुचि थी।

स्कूल और कॉलेज जीवन के दौरान उन्होंने अनेक नाटकों और सांस्कृतिक आयोजनों में हिस्सा लिया। मंच पर उनका आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और प्रतिभा लोगों का ध्यान आकर्षित करती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह शिक्षा और कला दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपार क्षमता रखती थीं।

परिवार और समाज की उम्मीदों का केंद्र थीं परिश्मिता

परिश्मिता के पिता माखन हजारिका ग्रामीण विकास बैंक में कार्यरत थे और जुलाई 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी माता रेखा साउद हजारिका एक शिक्षिका हैं। परिवार में उनके बड़े भाई हेमंत हजारिका हैं।

परिजनों और परिचितों के अनुसार परिश्मिता अत्यंत विनम्र, शांत स्वभाव की और सभी की प्रिय थीं। उनकी मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच ने उन्हें परिवार और समाज की उम्मीदों का केंद्र बना दिया था।

पूरे क्षेत्र में शोक की लहर

घटना की सूचना मिलते ही सोनारी सहित पूरे चराईदेव जिले में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों ने इस असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

कई लोगों ने कहा कि समाज ने एक ऐसी प्रतिभाशाली बेटी को खो दिया है, जो भविष्य में शिक्षा और समाज दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे सकती थी।

अधूरा रह गया एक सुनहरा सपना

परिश्मिता हजारिका की असामयिक मृत्यु ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि जीवन कितना अनिश्चित है। वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद वह उच्च शिक्षा के अंतिम चरण तक पहुंची थीं, लेकिन अपनी अंतिम परीक्षा देने जाते समय ही उनकी जीवन यात्रा समाप्त हो गई।

उनके सपने, संघर्ष, उपलब्धियां और मुस्कान अब केवल यादों में शेष रह गई हैं। सोनारी की यह होनहार बेटी भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी स्मृतियां, उसकी प्रतिभा और उसकी प्रेरणादायक यात्रा लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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