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शिवसागर में टास्क फोर्स की बड़ी कार्रवाई : कार वॉश सेंटर से दो बाल श्रमिक मुक्त : 12 और 13 वर्षीय बच्चों को शिक्षा से वंचित कर कराया जा रहा था काम : श्रम विभाग ने मालिक पक्ष के खिलाफ दर्ज कराया मामला : बाल श्रम उन्मूलन अभियान जारी

शिवसागर, 11 जून : बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शिवसागर में जिला स्तरीय टास्क फोर्स ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दो नाबालिग बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। यह कार्रवाई शिवसागर नगर के ए.टी. रोड स्थित एक कार वॉश सेंटर में की गई, जहां 12 और 13 वर्ष आयु के दो बच्चों को काम पर लगाया गया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, असम सरकार के निर्देशानुसार बाल श्रम उन्मूलन के लिए गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स द्वारा जिले में लगातार निरीक्षण एवं विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने ए.टी. रोड क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान उक्त बच्चों को श्रमिक के रूप में कार्यरत पाया।

शिक्षा से वंचित कर कराया जा रहा था श्रम

जांच के दौरान यह सामने आया कि दोनों बच्चों को विद्यालयी शिक्षा से दूर रखकर वाहन धुलाई केंद्र में कार्य कराया जा रहा था। टास्क फोर्स ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों बच्चों को वहां से मुक्त कराया और उन्हें सुरक्षित संरक्षण में लिया।

अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का भी हनन है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित बचपन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है तथा किसी भी परिस्थिति में बच्चों से मजदूरी कराना स्वीकार्य नहीं है।

बाल श्रम कानून के तहत सख्त प्रावधान

गौरतलब है कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा उसके संशोधित प्रावधानों के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार के व्यवसाय, उद्योग, प्रतिष्ठान या श्रम कार्य में नियुक्त करना पूर्णतः प्रतिबंधित एवं दंडनीय अपराध है।

इसके बावजूद आज भी अनेक बच्चे विभिन्न क्षेत्रों जैसे ईंट-भट्टों, चाय बागानों, होटल-ढाबों, घरेलू कार्यों, कृषि फार्मों तथा अन्य असंगठित क्षेत्रों में कार्य करते पाए जाते हैं। सरकार और प्रशासन समय-समय पर ऐसे मामलों की पहचान कर कार्रवाई करता रहा है।

बाल कल्याण समिति के समक्ष दर्ज कराया गया बयान

बरामद किए गए दोनों बच्चों को नियमानुसार बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उनके बयान दर्ज किए गए। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को उनके माता-पिता की अभिरक्षा में सौंप दिया गया।

अधिकारियों ने बच्चों के परिवारों को भी शिक्षा के महत्व तथा बाल श्रम के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया।

मालिक पक्ष के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

बाल श्रमिकों की बरामदगी के बाद शिवसागर जिला श्रम विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रतिष्ठान के मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, जिला श्रम विभाग के श्रम निरीक्षक द्वारा स्थानीय थाने में मालिक पक्ष के विरुद्ध बाल श्रम कानून के तहत मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस एवं संबंधित विभाग द्वारा मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

प्रशासन ने दी कड़ी चेतावनी

जिला प्रशासन और श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कानून उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, दुकानदारों, होटल संचालकों एवं अन्य संस्थानों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में नाबालिग बच्चों को काम पर न रखें।

साथ ही आम नागरिकों से भी आग्रह किया गया है कि यदि कहीं बाल श्रम की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन या श्रम विभाग को सूचित करें, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण और शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।

बाल श्रम मुक्त समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि बाल श्रम के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई न केवल कानून के पालन को सुनिश्चित करती है, बल्कि बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शिवसागर में टास्क फोर्स की यह कार्रवाई बाल श्रम उन्मूलन अभियान के प्रति प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है और समाज को यह संदेश देती है कि बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं, बल्कि विद्यालय और सुरक्षित पारिवारिक वातावरण है।

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