असम में हिमंत सरकार 2.0 का बड़ा प्रशासनिक ब्लूप्रिंट : मंत्रिमंडल विस्तार, गार्जियन डिस्ट्रिक्ट, राजनीतिक सचिवों की नियुक्ति और कैबिनेट रैंक वाली जिम्मेदारियों से मुख्यमंत्री ने दिए दूरगामी संकेत
35 जिलों की निगरानी अब मंत्रियों के हाथों में, संगठन और सरकार के बीच समन्वय के लिए नई टीम तैयार; विभागों के बंटवारे पर पूरे राज्य की नजर

न्यूज डेस्क, 7 जून : असम में लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटी मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा-नीत एनडीए सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही प्रशासनिक पुनर्गठन, राजनीतिक संतुलन और विकासोन्मुख शासन व्यवस्था को लेकर स्पष्ट संकेत देना शुरू कर दिया है। विधानसभा चुनाव 2026 में प्रचंड जनादेश हासिल करने के बाद नई सरकार अब अपने संगठनात्मक और प्रशासनिक ढांचे को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।
5 जून को हुए मंत्रिमंडल विस्तार, 35 जिलों के लिए गार्जियन मंत्रियों की नियुक्ति, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिवों की घोषणा, वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट रैंक वाली जिम्मेदारियों का आवंटन तथा विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में नई नियुक्तियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमंत सरकार 2.0 केवल मंत्रिमंडल विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन का एक व्यापक प्रयास है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा अपनी दूसरी पारी में जिला-केंद्रित प्रशासन, तेज विकास, जवाबदेह शासन और संगठन-सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंत विश्व शर्मा
असम विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा (BJP), असम गण परिषद (AGP), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और सहयोगी दलों के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को स्पष्ट जनादेश मिला। इसके बाद 12 मई 2026 को डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।
शुरुआती मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के साथ रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, अजंता नेओग और चरण बोड़ो शामिल थे। हालांकि चुनाव परिणामों के तुरंत बाद ही यह स्पष्ट हो गया था कि सरकार जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करेगी ताकि राज्य के सभी क्षेत्रों और समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जा सके।

5 जून को हुआ बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार
5 जून 2026 को असम मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार किया गया, जिसमें 12 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इन नियुक्तियों के साथ मुख्यमंत्री ने अनुभवी और युवा नेतृत्व का संतुलन स्थापित करने की कोशिश की।
मंत्रिमंडल में शामिल नए चेहरों में —
– बिमल बोरा
– अशोक सिंघल
– पीयूष हजारिका
– केशव महंत

– जयंत मल्लबरुआ
– डॉ. रणोज पेगू
– कौशिक राय
– कृष्णेंदु पॉल

– नीलिमा देवी
– बिश्वजीत दैमारी
– अश्विनी राय सरकार
– सुशांत बोरगोहांई

प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इस विस्तार के माध्यम से भाजपा ने ऊपरी असम, निचले असम, बराक घाटी, बोडोलैंड क्षेत्र, चाय जनजाति समुदाय, अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों तथा सीमावर्ती जिलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
गार्जियन डिस्ट्रिक्ट मॉडल: प्रशासनिक निगरानी का नया ढांचा
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों के लिए गार्जियन मंत्रियों की घोषणा कर दी।
इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक मंत्री अपने आवंटित जिलों में विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और कानून-व्यवस्था से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी करेगा।
इन मंत्रियों को जिला प्रशासन के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने, योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर नजर रखने तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रतिवेदन देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
गार्जियन मंत्रियों की पूरी सूची
रामेश्वर तेली – तिनसुकिया और जोरहाट
अतुल बोरा – कामरूप महानगर और धेमाजी
चरण बोड़ो – कोकराझार, बक्सा और चिरांग
अजंता नेओग – मोरीगांव और कामरूप
अश्विनी राय सरकार – बोंगाईगांव और बरपेटा
अशोक सिंघल – दरंग और धुबरी
बिमल बोरा – शिवसागर और चराईदेव
बिश्वजीत दैमारी – नलबाड़ी और सोनितपुर
जयंत मल्ल बरुआ – तमुलपुर और गोलपाड़ा
कौशिक राय – श्रीभूमि और हैलाकांडी
केशव महंत – दक्षिण सालमारा-मानकाचार और लखीमपुर
कृष्णेंदु पॉल – डिमा हसाओ और कछार
नीलिमा देवी – बजाली और उदालगुड़ी
पीयूष हजारिका – नगांव, होजाई, कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग
डॉ. रनोज पेगू – बिश्वनाथ और गोलाघाट
सुशांत बरगोहांई – माजुली और डिब्रूगढ़
पीयूष हजारिका को सबसे बड़ी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में सबसे अधिक चार जिलों की जिम्मेदारी पीयूष हजारिका को दी गई है। नगांव, होजाई, कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जैसे प्रशासनिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिलों की निगरानी अब उनके जिम्मे होगी।
वहीं चरण बोड़ो को बोडोलैंड क्षेत्र के तीन प्रमुख जिलों की जिम्मेदारी देकर सरकार ने बीटीआर क्षेत्र को विशेष महत्व दिया है।
मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव बने दो विधायक
सरकार ने संगठन और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से दो विधायकों तरंग गोगोई एवं कृष्णकमल तांती को मुख्यमंत्री का राजनीतिक सचिव नियुक्त किया है।
दोनों नेताओं को मुख्यमंत्री का राजनीतिक सचिव बनाए जाने को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तरंग गोगोई ऊपरी असम के उभरते हुए भाजपा नेताओं में गिने जाते हैं, जबकि कृष्णकमल तांती चाय जनजाति समुदाय के प्रभावशाली प्रतिनिधि माने जाते हैं। दोनों नेताओं की नियुक्ति से मुख्यमंत्री कार्यालय और विभिन्न क्षेत्रों के बीच राजनीतिक संवाद को और मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है।
प्रशांत फुकन को मिला कैबिनेट रैंक
डिब्रूगढ़ के वरिष्ठ भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रशांत फुकन को भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार ने उन्हें SCRDA-D (State Capital Region Development Authority-Dibrugarh) का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी प्रदान किया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत फुकन को यह जिम्मेदारी देकर सरकार ने उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक योगदान को सम्मान दिया है।

बोलिन चेतिया को ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी
सादिया के विधायक बोलिन चेतिया को भी सरकार ने महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है।
6 जून 2026 को उद्योग, वाणिज्य एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार उन्हें असम गैस कंपनी लिमिटेड (AGCL) का निदेशक नियुक्त करते हुए अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा उन्हें नॉर्थ ईस्ट गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NEGDCL) का भी निदेशक
के रूप में अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
दोनों पदों पर उन्हें कैबिनेट रैंक प्रदान की गई है और नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।
ऊर्जा क्षेत्र में यह नियुक्ति विशेष महत्व रखती है क्योंकि AGCL और NEGDCL पूर्वोत्तर भारत में गैस अवसंरचना, वितरण नेटवर्क और ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नई सरकार के अन्य बड़े फैसले
नई सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक निर्णय भी लिए हैं। जिनमें कर्मचारियों को राहत, राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में वृद्धि, डिब्रूगढ़ को दूसरी राजधानी के रूप में विकसित करने की पहल, लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी, जुलाई में बजट सत्र, नई सरकार की प्राथमिकताओं और विकास रोडमैप को प्रस्तुत किया जाएगा, कल्याणकारी योजनाओं में तेजी के साथ ही महिला कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बुनियादी ढांचा विकास योजनाओं को गति देने का निर्णय लिया गया है।
विभागों के बंटवारे पर टिकी निगाहें
हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार हो चुका है, लेकिन विभागों का अंतिम आवंटन अभी बाकी है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा 9 जून को नई दिल्ली जाकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा कर सकते हैं। इसके बाद 12 जून के आसपास विभागों की आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।
हिमंत सरकार 2.0 का राजनीतिक संदेश
नई सरकार के अब तक के निर्णयों से कुछ स्पष्ट संकेत उभरकर सामने आए हैं।
जिनमें जिला आधारित प्रशासनिक निगरानी। विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर सीधा नियंत्रण। क्षेत्रीय संतुलन और समावेशी प्रतिनिधित्व। अनुभवी और युवा नेतृत्व का समन्वय। संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल। कैबिनेट के बाहर भी वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां। प्रशासनिक जवाबदेही और परिणाम आधारित शासन पर जोर।
आगे क्या?
अब पूरे असम की नजर विभागों के बंटवारे, आगामी बजट सत्र और नई सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं पर टिकी हुई है।
गार्जियन डिस्ट्रिक्ट मॉडल, राजनीतिक सचिवों की नियुक्ति, कैबिनेट रैंक वाले अध्यक्षों की तैनाती और विभिन्न संस्थानों में वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से यह स्पष्ट हो गया है कि हिमंत सरकार 2.0 केवल एक मंत्रिमंडल नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना के रूप में काम करने जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो असम में विकास योजनाओं की निगरानी, प्रशासनिक समन्वय और जनता तक योजनाओं की पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और प्रभावी हो सकती है। आने वाले सप्ताहों में विभागों का आवंटन और नई नीतिगत घोषणाएं इस सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं की पूरी तस्वीर सामने रखेंगी।




