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शिवसागर में शोक की लहर : विधायक अखिल गोगोई की माता प्रियदा गोगोई का निधन : बुधवार सुबह 6.20 बजे गुवाहाटी के बामुनीमैदान स्थित निजी निवास पर संघर्ष, त्याग और मातृत्व की मिसाल रही प्रियदा गोगोई ने ली अंतिम विदाई : जेल में बंद बेटे के लिए घर-घर प्रचार कर बनी थीं जनआंदोलन की प्रतीक : राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक

जोरहाट जिले के सेलेंगघाट अंचल के उनके पैतृक गांव लुखुराखन में होगा अंतिम संस्कार

शिवसागर, 3 जून : शिवसागर विधानसभा क्षेत्र के विधायक, रायजोर दल के प्रमुख तथा असम के चर्चित जननेता अखिल गोगोई की माता प्रियदा गोगोई का बुधवार सुबह गुवाहाटी में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही शिवसागर सहित पूरे असम में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा किसान संगठनों से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

परिवारिक सूत्रों के अनुसार 96 वर्षीय प्रियदा गोगोई पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। बुधवार सुबह लगभग 6.20 बजे गुवाहाटी के बामुनीमैदान स्थित निजी निवास स्थान पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही रायजोर दल के कार्यकर्ता, समर्थक तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने पहुंचे।

केवल मां नहीं, संघर्ष की शक्ति थीं प्रियदा गोगोई

प्रियदा गोगोई को केवल विधायक अखिल गोगोई की माता के रूप में नहीं, बल्कि एक संघर्षशील और साहसी महिला के रूप में भी जाना जाता था। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान जब अखिल गोगोई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामले में जेल में बंद थे, तब प्रियदा गोगोई ने अपने बेटे के पक्ष में स्वयं मैदान संभाला था।

उम्र के अंतिम पड़ाव में होने के बावजूद उन्होंने शिवसागर की गलियों और गांवों में जाकर लोगों से संपर्क किया और अपने बेटे के लिए जनसमर्थन जुटाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उस चुनाव में प्रियदा गोगोई की भावनात्मक अपील और अथक मेहनत ने अखिल गोगोई की ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जेल में बंद बेटे के लिए बनी थीं चुनावी अभियान का चेहरा

असम की राजनीति में प्रियदा गोगोई का नाम उस समय विशेष रूप से चर्चा में आया था जब उन्होंने जेल में बंद अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया। उस समय उनकी दृढ़ता और साहस ने पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित किया था। सामाजिक कार्यकर्ता और लोकतांत्रिक आंदोलनों से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व भी उनके साथ प्रचार अभियान में शामिल हुए थे।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार प्रियदा गोगोई ने उस दौर में केवल एक मां की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनआंदोलन की भावना का भी प्रतिनिधित्व किया। उनकी छवि एक ऐसी महिला की बनी जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने परिवार और विचारों के साथ मजबूती से खड़ी रही।

अखिल गोगोई के राजनीतिक जीवन में रहा विशेष योगदान

अखिल गोगोई असम के प्रमुख किसान नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और रायजोर दल के संस्थापक हैं। किसानों, भूमिहीनों, भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों तथा नागरिक अधिकारों के मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे जननेता के निर्माण में उनकी माता प्रियदा गोगोई की भूमिका को भी लोग महत्वपूर्ण मानते हैं।

करीबी लोगों का कहना है कि प्रियदा गोगोई हमेशा अपने बेटे को समाज और आम लोगों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती थीं। यही कारण था कि अखिल गोगोई के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में उनका विशेष प्रभाव रहा।

राजनीतिक दलों और संगठनों ने जताया शोक

प्रियदा गोगोई के निधन पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त किया है। कई नेताओं ने उन्हें संघर्षशील मां, प्रेरणादायी महिला और जनआंदोलन की मौन शक्ति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

रायजोर दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रियदा गोगोई का जीवन संघर्ष, साहस, सादगी और जनसेवा के मूल्यों का प्रतीक था। उनका निधन केवल गोगोई परिवार ही नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए भी अपूरणीय क्षति है जो उन्हें सम्मान और स्नेह की दृष्टि से देखते थे।

शिवसागर में शोक का माहौल

प्रियदा गोगोई के निधन की खबर फैलते ही शिवसागर क्षेत्र में शोक का वातावरण बन गया। रायजोर दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपने बेटे को जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी और स्वयं भी कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस का परिचय दिया।

उनके निधन से एक ऐसे युग का अंत माना जा रहा है, जिसने एक जननेता के संघर्ष को करीब से देखा, उसे सहारा दिया और हर कठिन मोड़ पर उसके साथ खड़ी रही। प्रियदा गोगोई को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हजारों लोगों ने उनके आत्मिक शांति की कामना की है।

पैतृक गांव में होगा अंतिम संस्कार

स्वर्गीय प्रियदा गोगोई का पार्थिव शरीर आज गुवाहाटी से उनके पैतृक गांव लाया जा रहा है। उनका अंतिम संस्कार जोरहाट जिले के सेलेंगघाट अंचल के उनके पैतृक गांव लुखुराखन में किया जाएगा।

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