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शिवसागर में मूर्तिकार अरुण बोरा का आमरण अनशन, बाढ़ सहायता और काजीरंगा से जुड़े फैसले पर सरकार के सामने रखीं मांगें : जिला आयुक्त कार्यालय के सामने गुरुवार सुबह 11 बजे से अनशन पर बैठे कला साधक अरुण बोरा; मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान : जुबिन गर्ग और ‘सिंहपुरुष’ रोमु चलिहा के छायाचित्र साथ रखकर शुरू किया विरोध : वीर लाचित सेना के नेता श्रृंखल चलिहा ने अनशन स्थल पहुंचकर दिया समर्थन

बाढ़ प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा घोषित 15 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता शीघ्र देने की मांग : “ये व्यक्तिगत नहीं, व्यापक जनहित से जुड़े मुद्दे; मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आमरण अनशन”—अरुण बोरा

शिवसागर, 11 सितंबर : बाढ़ प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने और काजीरंगा से जुड़े एक सरकारी फैसले के विरोध में शिवसागर के मूर्तिकार एवं कला साधक अरुण बोरा ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे से वह शिवसागर जिला आयुक्त कार्यालय के सामने अनशन पर बैठे हैं। अरुण बोरा ने घोषणा की है कि उनकी ओर से उठाई गई मांगों पर सरकार द्वारा समाधान किए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

उनके इस विरोध का केंद्र एक ओर हाल की विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित परिवारों को घोषित आर्थिक सहायता दिलाना है, तो दूसरी ओर काजीरंगा के संवेदनशील क्षेत्र के दायरे और वहां पांच सितारा होटल निर्माण से जुड़े फैसले का विरोध करना है। उन्होंने इन दोनों विषयों को व्यापक जनहित से जुड़ा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जुबिन गर्ग और ‘सिंहपुरुष’ रोमु चलिहा के छायाचित्र के साथ शुरू किया अनशन

अरुण बोरा ने अपने अनशन को एक अलग प्रतीकात्मक स्वरूप भी दिया है। विरोध स्थल पर उन्होंने लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग और ‘सिंहपुरुष’ रोमु चलिहा के छायाचित्र अपने पास रखकर आमरण अनशन की शुरुआत की। इसके जरिए उन्होंने कला और जनसरोकार से जुड़े अपने विरोध को प्रतीकात्मक रूप से सामने रखने का प्रयास किया।

मूर्तिकार के रूप में अपनी पहचान रखने वाले अरुण बोरा ने अब जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। जिला आयुक्त कार्यालय के सामने शुरू हुए इस आमरण अनशन के माध्यम से उन्होंने सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की है।

वीर लाचित सेना के श्रृंखल चलिहा ने दिया समर्थन

अरुण बोरा के आमरण अनशन को वीर लाचित सेना, असम के केंद्रीय प्रशासनिक सचिव श्रृंखल चलिहा का भी समर्थन मिला है। श्रृंखल चलिहा अनशन स्थल पर पहुंचे और अरुण बोरा के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

उनके समर्थन के बाद अनशन और इससे जुड़ी मांगों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अरुण बोरा का कहना है कि उनकी मांगों का संबंध केवल किसी एक व्यक्ति या क्षेत्र से नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के हित और काजीरंगा जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्र से है।

बाढ़ प्रभावितों को 15 हजार रुपये की सहायता जल्द देने की मांग

अरुण बोरा की प्रमुख मांगों में हाल की बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए सरकार द्वारा घोषित 15,000 रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता का शीघ्र भुगतान शामिल है।

उनका कहना है कि बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक नुकसान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सरकार की ओर से घोषित राहत राशि पात्र प्रभावित परिवारों तक पहुंचाने में और देरी नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता संबंधी प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर घोषित 15 हजार रुपये की राशि शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।

काजीरंगा से जुड़े फैसले का विरोध, वापस लेने की मांग

आमरण अनशन के दौरान अरुण बोरा ने काजीरंगा से जुड़े मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। उनका दावा है कि काजीरंगा के संवेदनशील क्षेत्र के दायरे को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करने से जुड़े फैसले पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने संबंधित क्षेत्र में पांच सितारा होटल के निर्माण से जुड़े सरकारी निर्णय का भी विरोध किया है। अरुण बोरा ने मांग की कि काजीरंगा से जुड़े इन फैसलों को वापस लिया जाए और क्षेत्र के पर्यावरणीय तथा प्राकृतिक महत्व को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने अपनी मांग के माध्यम से सरकार से इस पूरे विषय पर गंभीरता से विचार करने और ऐसा निर्णय लेने की अपील की है, जिससे काजीरंगा तथा उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्र के हित प्रभावित न हों।

‘व्यक्तिगत नहीं, जनहित से जुड़ी हैं मांगें’

अरुण बोरा ने अपने आंदोलन को व्यक्तिगत मांगों से अलग बताते हुए कहा कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे व्यापक जनहित से जुड़े हुए हैं। एक तरफ बाढ़ प्रभावित परिवार अपनी घोषित सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ काजीरंगा से जुड़े फैसलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

इन्हीं मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखने के उद्देश्य से उन्होंने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया है। उन्होंने सरकार से मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक कदम उठाने की अपील की है।

“मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आमरण अनशन”—अरुण बोरा

अरुण बोरा ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल अपना आंदोलन वापस लेने वाले नहीं हैं। उन्होंने घोषणा की कि जब तक उनकी ओर से उठाई गई मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा।

जिला आयुक्त कार्यालय के सामने शुरू हुआ यह आंदोलन अब बाढ़ राहत और काजीरंगा से जुड़े मुद्दों को एक साथ सामने लेकर आया है। एक ओर बाढ़ प्रभावितों के लिए घोषित 15 हजार रुपये की सहायता शीघ्र जारी करने की मांग है, वहीं दूसरी ओर काजीरंगा के संवेदनशील क्षेत्र के दायरे और पांच सितारा होटल निर्माण से जुड़े फैसले को वापस लेने की मांग की जा रही है। इन मांगों पर सरकार और प्रशासन की आगामी प्रतिक्रिया पर अब नजर रहेगी।

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