सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर शिवसागर प्रशासन का बड़ा कदम—रात्रिकालीन निगरानी के लिए 16 विशेष टीमें गठित : थाना और पुलिस चौकी स्तर पर समितियां—कार्यकारी मजिस्ट्रेट, पुलिस, परिवहन विभाग और सड़क स्वामित्व एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल : हाईवे, ट्रैफिक जंक्शन और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में नियमित रात्रि निरीक्षण—हर सात दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट
अवैध पार्किंग, ट्रैफिक जाम, गड्ढों, खतरनाक ड्राइविंग और शराब के प्रभाव में वाहन चलाने पर रहेगी विशेष नजर : क्षतिग्रस्त और अस्पष्ट रोड साइन की पहचान कर होगी मरम्मत—IRC मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश

शिवसागर, 24 सितंबर : जिले में यातायात के सुचारु संचालन और सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से शिवसागर जिला प्रशासन ने व्यापक पहल की है। जिला प्रशासन ने प्रमुख सड़कों, राजमार्गों, ट्रैफिक जंक्शनों, दुर्घटना संभावित हिस्सों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर नियमित रात्रिकालीन निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। इन टीमों को यातायात व्यवस्था की निगरानी के साथ सड़क संकेतकों और सड़क सुरक्षा से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
जिला आयुक्त एवं जिला सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष मृदुल यादव ने 24 सितंबर को जारी आदेश के माध्यम से पुलिस थाना और पुलिस चौकी स्तर पर समितियां गठित की हैं। इनमें कार्यकारी मजिस्ट्रेट, पुलिसकर्मी, परिवहन विभाग के अधिकारी और संबंधित सड़क स्वामित्व एजेंसियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

जिले में थाना-पुलिस चौकी स्तर पर 16 विशेष टीमें
आदेश के तहत शिवसागर जिले के अलग-अलग हिस्सों को कवर करने के लिए कुल 16 विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें पुलिस थाना और पुलिस चौकी के आधार पर अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में निगरानी करेंगी।
इनमें शिवसागर पुलिस थाना, चेरेकापार पुलिस चौकी, गौरीसागर पुलिस थाना, जयसागर पुलिस चौकी, आमगुड़ी पुलिस थाना, हालुवाटिंग पुलिस थाना, डिमौ पुलिस थाना, निताईपुखुरी पुलिस चौकी, लकवा पुलिस थाना, बोकाटा-नेमुगुड़ी पुलिस थाना, दिसांगमुख पुलिस चौकी, नाजिरा पुलिस थाना, गेलेकी पुलिस थाना, नामती पुलिस थाना, बिहुबर पुलिस थाना और सिमालुगुड़ी पुलिस थाना क्षेत्र शामिल हैं।
प्रत्येक टीम में प्रशासन, प्रवर्तन, परिवहन और सड़क अवसंरचना से संबंधित अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है, ताकि सड़क सुरक्षा और यातायात संबंधी समस्याओं पर विभागीय समन्वय के साथ जमीनी स्तर पर कार्रवाई की जा सके।
हर सात दिन में देनी होगी निरीक्षण रिपोर्ट
विशेष टीमों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में नियमित निरीक्षण करने के साथ वहां सामने आने वाली समस्याओं और उल्लंघनों की रिपोर्ट निर्धारित अंतराल पर प्रस्तुत करनी होगी।
आदेश के मुताबिक रिपोर्टिंग की अवधि सात दिन तय की गई है। इससे जिला प्रशासन क्षेत्रीय निरीक्षण में सामने आने वाली कमियों, यातायात नियमों के उल्लंघन और अन्य सड़क सुरक्षा संबंधी चिंताओं की लगातार समीक्षा कर सकेगा।
हालांकि, गंभीर या तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले मामलों में सात दिन की रिपोर्टिंग अवधि का इंतजार नहीं किया जाएगा।

रात में नियमित निरीक्षण—यातायात व्यवस्था पर रहेगी पैनी नजर
समितियों के सदस्यों को रात के समय नियमित रूप से क्षेत्रीय निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यातायात की प्रभावी निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
टीमें विशेष रूप से अनधिकृत पार्किंग, ट्रैफिक जाम, वाहनों की आवाजाही में अवरोध, सड़क पर गड्ढों, खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग की आवश्यकता, खतरनाक तरीके से वाहन चलाने, शराब के प्रभाव में वाहन चलाने तथा ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा नियमों के अन्य उल्लंघनों पर नजर रखेंगी।
रात्रिकालीन निगरानी के जरिए उन परिस्थितियों और स्थानों की भी पहचान की जाएगी, जहां कम दृश्यता अथवा सड़क संबंधी कमियों के कारण दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
राष्ट्रीय-राज्य राजमार्ग और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी
यातायात नियमों के प्रवर्तन के साथ समितियों को जिले के प्रमुख मार्गों पर लगे सड़क संकेतकों का समय-समय पर निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है।
इसके दायरे में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, एक्सप्रेस हाईवे, महत्वपूर्ण चौराहे और जंक्शन, दुर्घटना संभावित स्थान तथा अन्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल होंगे।
टीमों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी रोड साइन साफ, आसानी से पढ़े जाने योग्य, सही तरीके से स्थापित और सड़क उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले हों।

IRC मानकों के अनुरूप रोड साइन की होगी जांच
विशेष टीमों को यह भी जांचना होगा कि रोड साइन इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) के लागू Code of Practice के अनुरूप लगाए गए हैं या नहीं।
निरीक्षण के दौरान क्षतिग्रस्त, गायब, फीके पड़ चुके, ढके हुए अथवा किसी अन्य कारण से खराब या अप्रभावी हो चुके रोड साइन की पहचान की जाएगी।
ऐसी कमियां सामने आने पर संबंधित सड़क स्वामित्व या परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी के माध्यम से रोड साइन की मरम्मत, बदलाव, सफाई अथवा दोबारा रंगाई कराने की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नियामक, चेतावनी और सूचनात्मक संकेतकों की भी समीक्षा
निरीक्षण में अलग-अलग श्रेणी के रोड साइन की पर्याप्तता और दृश्यता की भी जांच की जाएगी। इनमें नियामक (Regulatory), चेतावनी (Warning) और सूचनात्मक (Informatory) संकेतक शामिल हैं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन चालकों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को यातायात नियमों, संभावित खतरों, दिशाओं और सड़क की अन्य आवश्यक परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट तथा समय पर जानकारी मिल सके।
जहां रोड साइन की संख्या अपर्याप्त या उनकी दृश्यता कमजोर पाई जाएगी, वहां संबंधित विभाग और सड़क स्वामित्व एजेंसियों के माध्यम से सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
रोड साइन को नुकसान पहुंचाने वालों पर कानूनी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने रोड साइन को विकृत करने, नुकसान पहुंचाने अथवा उनकी दृश्यता में बाधा उत्पन्न करने जैसी गतिविधियों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
ऐसे मामलों के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों की जानकारी पुलिस विभाग को दी जाएगी, ताकि प्रचलित कानून के तहत उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके।
समिति के सभी सदस्यों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
गंभीर घटना या लगातार उल्लंघन की तत्काल सूचना
विशेष टीमों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी गंभीर घटना, लगातार हो रहे नियम उल्लंघन, यातायात संबंधी आपात स्थिति या तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले अन्य मामले की जानकारी मिलने पर जिला आयुक्त को बिना देरी के सूचित किया जाए।
ऐसे मामलों में नियमित सात दिवसीय रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य गंभीर सड़क सुरक्षा संबंधी खतरे सामने आने पर त्वरित प्रशासनिक और प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
निरीक्षण में पुलिस देगी आवश्यक सहयोग
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, शिवसागर से संबंधित पुलिस अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
पुलिस को रोड साइन को विकृत या क्षतिग्रस्त करने की घटनाओं पर भी कड़ी निगरानी रखने और दोषियों के खिलाफ संबंधित कानून के प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई करने को कहा गया है।
इस व्यवस्था में पुलिस की सक्रिय भागीदारी से रात्रिकालीन निगरानी के साथ-साथ यातायात नियमों के प्रवर्तन को भी प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है।
परिवहन विभाग करेगा नियमित निगरानी और समन्वय
जिला परिवहन अधिकारी को भी सड़क सुरक्षा और परिवहन कानूनों के प्रवर्तन के दृष्टिकोण से नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को समय रहते दूर करने के लिए परिवहन विभाग संबंधित सड़क स्वामित्व एजेंसियों और विभागों के साथ समन्वय करेगा।
इस व्यवस्था के जरिए सड़क संबंधी बुनियादी कमियों और यातायात नियमों के उल्लंघन—दोनों स्तरों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए समन्वित व्यवस्था
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को अलग-अलग विभागों के स्तर पर देखने के बजाय नागरिक प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और सड़क स्वामित्व एजेंसियों के बीच एक समन्वित व्यवस्था विकसित करना है।
नियमित रात्रिकालीन निगरानी, रोड साइन का समयबद्ध निरीक्षण, दुर्घटना संभावित और संवेदनशील स्थानों की पहचान, खतरनाक ड्राइविंग एवं यातायात उल्लंघनों पर कार्रवाई तथा सड़क अवसंरचना की कमियों को समय रहते दूर करने के माध्यम से प्रशासन ने सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने, यातायात को सुचारु बनाने और पूरे शिवसागर जिले में सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया है।




