सोनारी में घर के आंगन से मिला घायल लेपर्ड कैट का शावक : नागालैंड से बहकर आने की आशंका, ग्रामीणों ने दिखाई मानवता : वन विभाग को दी सूचना, घायल वन्यजीव के तत्काल रेस्क्यू और उपचार की उठी मांग

शिवसागर, 19 जुलाई : चराईदेव जिले के सोनारी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत लुखुराखन गांव संख्या-2 में रविवार को एक दुर्लभ वन्यजीव के घायल शावक के मिलने से पूरे इलाके में कौतूहल और चिंता का माहौल बन गया। स्थानीय निवासी जेनो गोगोई के घर के आंगन से लेपर्ड कैट (लता मेकुरी बाघ) का एक घायल शावक बरामद हुआ। प्राथमिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश और तेज जलप्रवाह के कारण यह शावक बहकर असम सीमा से लगे इस गांव तक पहुंच गया।

सुबह आंगन में घायल अवस्था में मिला दुर्लभ वन्यजीव
परिवार के सदस्यों ने बताया कि रविवार सुबह जब वे घर से बाहर निकले तो आंगन में एक छोटा जंगली शावक घायल अवस्था में पड़ा दिखाई दिया। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह लेपर्ड कैट का शावक है। उसके शरीर पर चोट के स्पष्ट निशान थे और वह अत्यंत कमजोर एवं थका हुआ प्रतीत हो रहा था। शावक की हालत देखकर परिवार और आसपास के लोग चिंतित हो गए।
ग्रामीणों ने दिखाई संवेदनशीलता, सुरक्षित स्थान पर रखकर वन विभाग को दी सूचना
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सराहनीय मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। शावक को किसी प्रकार की अतिरिक्त चोट न पहुंचे, इसके लिए उसे सावधानीपूर्वक सुरक्षित स्थान पर रखा गया। इसके साथ ही ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और शीघ्र रेस्क्यू टीम भेजने का अनुरोध किया।
हालांकि समाचार लिखे जाने तक वन विभाग की टीम घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई थी।
तत्काल उपचार और विशेषज्ञ देखरेख की जरूरत
ग्रामीणों का कहना है कि घायल शावक की स्थिति गंभीर दिखाई दे रही है और उसे तत्काल चिकित्सकीय उपचार तथा वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी की आवश्यकता है। लोगों ने वन विभाग से अपील की है कि बिना देरी किए रेस्क्यू अभियान चलाकर शावक को सुरक्षित संरक्षण में लिया जाए और आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उसकी जान बचाई जा सके।

लगातार बारिश से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास हो रहा प्रभावित
स्थानीय लोगों का मानना है कि नागालैंड और सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलधार बारिश के कारण नदियों और जलधाराओं का प्रवाह काफी तेज हो गया है। इसी वजह से कई वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास से भटककर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में वन विभाग की त्वरित कार्रवाई न केवल घायल वन्यजीवों के संरक्षण के लिए आवश्यक होती है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ग्रामीणों ने की शीघ्र रेस्क्यू अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि शावक को जल्द से जल्द सुरक्षित रेस्क्यू कर वन्यजीव चिकित्सा केंद्र या उपयुक्त संरक्षण स्थल पर भेजा जाए। उनका कहना है कि समय पर उपचार और देखभाल मिलने से इस दुर्लभ वन्यजीव का जीवन बचाया जा सकता है। स्थानीय लोगों की मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है, वहीं सभी की निगाहें अब वन विभाग की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हैं।




