प्राप्य भुगतान से वंचित आशा कर्मियों का शिवसागर में धरना—2025 से बकाया राशि जारी करने की मांग : जिला संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय के सामने प्रदर्शन—पांच स्वास्थ्य खंडों की आशा कर्मियों का भुगतान लंबित होने का आरोप : टीबी नियंत्रण से जुड़े कार्यों की प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने का दावा—‘सरकार ने राशि जारी की, फिर भी भुगतान क्यों नहीं?’
केवल एक स्वास्थ्य खंड में भुगतान किए जाने का आरोप, ACF की बकाया राशि भी शीघ्र जारी करने की मांग : कई बार आवेदन के बाद भी समाधान नहीं होने का दावा—भुगतान नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन की चेतावनी

शिवसागर, 29 सितंबर : लंबे समय से अपने प्राप्य भुगतान का इंतजार कर रहीं शिवसागर जिले की आशा कर्मियों ने सोमवार को जिला संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय के सामने धरना देकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों का आरोप है कि वर्ष 2025 से जिले के पांच स्वास्थ्य खंडों में कार्यरत आशा कर्मियों को विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों, विशेष रूप से तपेदिक (टीबी) नियंत्रण और मरीजों की देखभाल से जुड़े कार्यों के लिए मिलने वाली निर्धारित प्रोत्साहन एवं अन्य देय राशि का भुगतान नहीं किया गया है।

2025 से भुगतान लंबित होने का आरोप
प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों के मुताबिक, वे लंबे समय से अपने निर्धारित भुगतान का इंतजार कर रही हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2025 से शिवसागर जिले के पांच स्वास्थ्य खंडों की आशा कर्मियों की विभिन्न मदों की राशि लंबित है। बार-बार संबंधित विभाग और अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
आशा कर्मियों ने जिला स्वास्थ्य विभाग से सभी लंबित भुगतानों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराने और पात्र कर्मियों के खाते में उनकी बकाया राशि शीघ्र जारी करने की मांग की।
टीबी नियंत्रण में जमीनी स्तर पर काम, लेकिन प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने का दावा
आशा कर्मियों का कहना है कि टीबी की रोकथाम और मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण जमीनी भूमिका रहती है। वे संदिग्ध टीबी मरीजों की पहचान करने, जांच के लिए थूक के नमूने एकत्र करने और उपचार के दौरान मरीजों की देखभाल एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने सहित विभिन्न जिम्मेदारियां निभाती हैं।
उनका आरोप है कि इन कार्यों के लिए सरकार की ओर से निर्धारित प्रोत्साहन राशि का प्रावधान होने के बावजूद उन्हें उनका पूरा प्राप्य भुगतान नहीं मिला है। लंबे समय तक काम करने के बाद भी निर्धारित राशि के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
‘सरकार ने राशि जारी की तो आशा कर्मियों तक क्यों नहीं पहुंची?’
धरने में शामिल आशा कर्मियों ने दावा किया कि संबंधित मद में सरकार की ओर से राशि जारी की जा चुकी है, लेकिन जिला स्तर पर पात्र आशा कर्मियों को उसका भुगतान नहीं किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि सरकार ने धनराशि उपलब्ध करा दी है तो वह संबंधित आशा कर्मियों तक क्यों नहीं पहुंची।
उनका आरोप है कि टीबी नियंत्रण और मरीजों की देखभाल से संबंधित कार्यों के लिए आवंटित धनराशि संबंधित लेखा अधिकारी के स्तर से जारी नहीं की गई। आशा कर्मियों ने विभाग से भुगतान की वर्तमान स्थिति और राशि लंबित रहने के कारणों को स्पष्ट करने की मांग की।

पांच में से केवल एक स्वास्थ्य खंड को भुगतान का आरोप
प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों ने दावा किया कि जिले के पांच स्वास्थ्य खंडों में से केवल एक स्वास्थ्य खंड की आशा कर्मियों को संबंधित राशि का भुगतान किया गया है, जबकि शेष स्वास्थ्य खंडों की आशा कर्मियां अब भी अपने प्राप्य की प्रतीक्षा कर रही हैं।
उन्होंने सभी पात्र आशा कर्मियों के साथ समान व्यवहार करते हुए बिना किसी और देरी के बकाया भुगतान जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि एक ही जिले में एक स्वास्थ्य खंड में भुगतान और अन्य खंडों में राशि लंबित रहने से स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं।
ACF की बकाया राशि भी नहीं मिलने का दावा
आशा कर्मियों ने टीबी से संबंधित प्रोत्साहन राशि के साथ ही ACF मद की बकाया राशि भी नहीं मिलने का दावा किया। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में लगातार जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें अपनी निर्धारित देय राशि हासिल करने के लिए बार-बार अधिकारियों के समक्ष आवेदन और निवेदन करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि वर्ष 2025 से लंबित सभी देय राशियों के साथ ACF की बकाया राशि का भी तत्काल आकलन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
कई बार आवेदन और निवेदन के बाद भी समाधान नहीं—आशा कर्मियों का आरोप
आशा कर्मियों के अनुसार, भुगतान की समस्या को लेकर वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन और निवेदन कर चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलने का उन्होंने आरोप लगाया।
उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी कड़ी के रूप में वे गांवों और स्थानीय समुदायों के बीच लगातार काम करती हैं। टीबी जैसी बीमारी की रोकथाम से लेकर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने तक अनेक जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद यदि निर्धारित प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिलती है तो इससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आवंटित राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर जताया संदेह
धरने में शामिल आशा कर्मियों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा राशि जारी किए जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने से उनके मन में आवंटित धनराशि के कथित दुरुपयोग को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने तथा यह स्पष्ट करने की मांग की कि सरकार से प्राप्त राशि का भुगतान कब, किस मद में और किन लाभार्थियों को किया गया।
हालांकि, आशा कर्मियों की ओर से लगाए गए राशि के कथित दुरुपयोग संबंधी आरोप की विभागीय स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
लंबित भुगतान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने जिला स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि आशा कर्मियों से संबंधित लंबित भुगतान का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि वर्ष 2025 से अब तक विभिन्न मदों में कितनी राशि प्राप्त हुई, कितनी राशि का भुगतान किया गया और कितनी राशि अभी लंबित है।
आशा कर्मियों का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होने से भ्रम और संदेह दूर होंगे तथा पात्र कर्मियों को समय पर उनका अधिकार प्राप्त हो सकेगा।
भुगतान नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन की चेतावनी
धरने पर बैठी आशा कर्मियों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिक मांग वर्ष 2025 से लंबित सभी निर्धारित प्रोत्साहन एवं अन्य देय राशि के साथ ACF की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान है। उन्होंने कहा कि कई बार आवेदन और निवेदन के बावजूद यदि अब भी उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप देने के लिए मजबूर होंगी।
प्रदर्शनकारी आशा कर्मियों ने जिला स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए भुगतान प्रक्रिया पूरी करने की मांग की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि बकाया राशि शीघ्र जारी नहीं होने की स्थिति में जिले में बड़े स्तर पर विरोध एवं आंदोलनात्मक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।




