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सोनारी में फिर जंगली हाथियों का तांडव : घर और बगीचा उजाड़ा, परिवार ने भागकर बचाई जान : खेरबाड़ी के समीप नंबर-4 ग्वालापथार में आधी रात को हाथियों के झुंड का हमला : जितेन मुंडा का मकान क्षतिग्रस्त, वन विभाग के समीप हुई घटना से इलाके में दहशत

सोनारी, 18 जुलाई : ऊपरी असम के चराईदेव जिले के सोनारी क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। गुरुवार देर रात खेरबाड़ी खंड वन अधिकारी कार्यालय के समीप स्थित नंबर-4 ग्वालापथार गांव में जंगली हाथियों के एक झुंड ने भारी उत्पात मचाया। हाथियों ने स्थानीय निवासी जितेन मुंडा के घर और बगीचे को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। हालांकि परिवार की सतर्कता और सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और सभी सदस्य सुरक्षित बच निकले।

बगीचे को रौंदने के बाद मकान पर बोला धावा

स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात अचानक जंगली हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच गया। सबसे पहले हाथियों ने जितेन मुंडा के घर के आसपास लगे पेड़-पौधों, फसलों और अन्य वनस्पतियों को रौंद डाला। इसके बाद हाथियों ने उनके मकान पर हमला कर घर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान घर के भीतर रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे परिवार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

समय रहते घर छोड़ने से टला बड़ा हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथियों की आहट मिलते ही जितेन मुंडा और उनके परिवार ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर शरण ली। यदि परिवार समय रहते घर से बाहर नहीं निकलता, तो घटना गंभीर रूप ले सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार की तत्परता और सतर्कता ने संभावित जनहानि को टाल दिया।

वन विभाग कार्यालय के समीप हुई घटना, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि हाथियों का यह उत्पात खेरबाड़ी खंड वन अधिकारी कार्यालय के समीप हुआ। घटना के बाद नंबर-4 ग्वालापथार सहित आसपास के गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों ने वन विभाग से रात के समय नियमित गश्त बढ़ाने, हाथियों की गतिविधियों की प्रभावी निगरानी करने तथा प्रभावित परिवार को शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।

असम में लगातार बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्ष

असम में पिछले कुछ समय से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। वन क्षेत्रों के सिकुड़ने, प्राकृतिक भोजन की कमी और हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों में बढ़ते अतिक्रमण के कारण जंगली हाथी आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके चलते राज्य के विभिन्न जिलों में लोगों की मौत, घरों के क्षतिग्रस्त होने और कृषि फसलों को भारी नुकसान पहुंचने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

स्थायी समाधान और प्रभावी प्रबंधन की बढ़ी आवश्यकता

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए हाथियों के पारंपरिक एलीफेंट कॉरिडोर (Elephant Corridors) की सुरक्षा, आधुनिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, स्थानीय समुदायों में जागरूकता, त्वरित राहत एवं मुआवजा व्यवस्था तथा वन विभाग की सक्रिय निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत करना आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने भी सरकार और वन विभाग से दीर्घकालिक एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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