नाजिरा में आंगनवाड़ी कर्मियों और सहायिकाओं का जोरदार विरोध : देशव्यापी मांग (काला) दिवस मनाकर अधिकारों के लिए बुलंद की आवाज : सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, FRS प्रमाणीकरण की अनिवार्यता खत्म करने और वर्षों से लंबित मांगों के समाधान की उठाई मांग
“सरकारी योजनाओं को घर-घर पहुंचाने के बावजूद अधिकारों और सुविधाओं से वंचित हैं आंगनवाड़ी कर्मी व सहायिकाएं” — संगठन ने जताई नाराजगी

शिवसागर, 10 जुलाई : देशभर के साथ-साथ असम राज्य के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार को आंगनवाड़ी कर्मियों और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर देशव्यापी मांग (काला) दिवस मनाया। इसी कड़ी में शिवसागर जिले के नाजिरा में भी असम राज्य आंगनवाड़ी कर्मी एवं सहायिका संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कर्मियों और सहायिकाओं ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की।

नाजिरा महकमा न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय के सामने आयोजित इस विरोध कार्यक्रम में शामिल कर्मियों और सहायिकाओं ने सरकार के समक्ष अपनी विभिन्न मांगें रखते हुए जल्द समाधान की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने काला दिवस मनाते हुए कहा कि वे वर्षों से पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ सरकारी नियमों के अनुसार कार्य कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक उनका उचित सम्मान, अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
आंगनवाड़ी कर्मियों को नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
संगठन ने सरकार से सबसे प्रमुख मांग रखते हुए कहा कि आंगनवाड़ी कर्मियों और सहायिकाओं को नियमित सरकारी कर्मचारी के रूप में मान्यता प्रदान की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, गर्भवती महिलाओं एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं सहित सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर तक सफलतापूर्वक पहुंचाने में आंगनवाड़ी कर्मियों की अहम भूमिका रहती है।
उनका कहना है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने के बावजूद आंगनवाड़ी कर्मियों और सहायिकाओं को स्थायी कर्मचारी जैसी सुविधाएं, आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक अधिकारों से वंचित रखा गया है, जो चिंता का विषय है।
FRS प्रमाणीकरण व्यवस्था को तत्काल बंद करने की उठाई मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान आंगनवाड़ी कर्मियों ने FRS (Face Recognition System) प्रमाणीकरण की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करने की मांग भी उठाई।
उनका कहना है कि ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और तकनीकी सुविधाओं की कमी के कारण इस व्यवस्था को लागू करने में कई परेशानियां सामने आ रही हैं। ऐसे में बिना पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं के FRS प्रणाली को अनिवार्य बनाना कर्मियों और सहायिकाओं के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।
रिक्त पदों पर अनुभवी सहायिकाओं को पदोन्नति देने की अपील
आंगनवाड़ी संघ ने लंबे समय से खाली पड़े आंगनवाड़ी कर्मियों के पदों को भरने के लिए योग्य एवं अनुभवी सहायिकाओं को प्राथमिकता देने की मांग की।
संगठन ने कहा कि कई सहायिकाएं वर्षों से ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं और उनके पास कार्य का पर्याप्त अनुभव है। इसलिए रिक्त पदों पर नियुक्ति के दौरान अनुभवी सहायिकाओं को पदोन्नति देकर अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।
प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में बेहतर भवन और आधुनिक सुविधाओं की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में बेहतर भवन, सुरक्षित वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग रखी।
उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित भवन, आवश्यक संसाधन और वैज्ञानिक पद्धति से विकसित आधारभूत ढांचा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
लंबे संघर्ष के बावजूद मांगें पूरी नहीं होने पर जताई नाराजगी
आंगनवाड़ी कर्मियों और सहायिकाओं ने कहा कि वे वर्षों से बच्चों, महिलाओं और समाज के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसके बावजूद उनकी वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिसके विरोध में पूरे देश में काला दिवस मनाया गया।
अंत में संगठन ने सरकार से आंगनवाड़ी कर्मियों और सहायिकाओं की सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक कदम उठाने की अपील की।




