महेश नवमी पर शिवसागर में भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का विराट उत्सव : भगवान महेश के प्राकट्य दिवस पर निकली भव्य शोभायात्रा : शिव पूजन, जलाभिषेक और भजन संध्या में उमड़ा जनसैलाब : माहेश्वरी समाज की तीनों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय महोत्सव संपन्न : एकता, संस्कार और सामाजिक समरसता का दिया संदेश

शिवसागर, 24 जून : भगवान महेश अर्थात भगवान शिव के प्राकट्य दिवस तथा माहेश्वरी समाज के वंशोत्पत्ति दिवस “महेश नवमी” के पावन अवसर पर शिवसागर में भक्ति, श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। माहेश्वरी सभा, माहेश्वरी महिला संगठन एवं माहेश्वरी युवा संगठन, शिवसागर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय महेश नवमी महोत्सव 2026 धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का भव्य प्रतीक बनकर उभरा। 21 जून एवं 23 जून को दो चरणों में आयोजित इस महोत्सव में समाज के वरिष्ठजन, महिलाएं, युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर समाज की संगठनात्मक शक्ति और सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली परिचय दिया।

पूरे शहर में “जय महेश”, “हर-हर महादेव” के जयघोष, शिव भजनों की मधुर स्वर लहरियों और धार्मिक आयोजनों के कारण भक्तिमय वातावरण बना रहा। महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि समाज के भीतर एकता, सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों को भी नई ऊर्जा प्रदान की।

स्वास्थ्य शिविर और प्रतियोगिताओं के साथ हुआ महोत्सव का शुभारंभ
महेश नवमी महोत्सव के प्रथम चरण का शुभारंभ 21 जून को माहेश्वरी युवा संगठन द्वारा स्थानीय बोरपुखरी पार में आयोजित स्वास्थ्य शिविर से हुआ। समाज के लोगों ने स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श का लाभ उठाया। इसके पश्चात मिलन मंदिर में महिलाओं, युवाओं और बच्चों के लिए चित्रकला, रंगोली, मेकअप, व्यंजन निर्माण सहित विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

इन प्रतियोगिताओं ने समाज की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ नई पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया। बच्चों और युवाओं में उत्साह देखते ही बन रहा था, जबकि महिलाओं ने भी अपनी कला एवं कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
दीप प्रज्ज्वलन और महेश वंदना से सजा सांस्कृतिक समारोह
सायंकाल आयोजित मुख्य समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सामूहिक महेश वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम में भगवान गणेश की वंदना पर आधारित आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर समाज के मेधावी विद्यार्थियों एवं वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह ने जहां युवा पीढ़ी को उत्कृष्टता की ओर प्रेरित किया, वहीं वरिष्ठजनों के अनुभव, योगदान और सामाजिक मार्गदर्शन को सम्मानित करने की गौरवशाली परंपरा को भी मजबूत किया।

सांस्कृतिक संध्या और सामुदायिक सहभोज ने बढ़ाया अपनापन
रात्रि में आयोजित सांस्कृतिक संध्या एवं सामुदायिक सहभोज महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहे। संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच समाजबंधुओं ने पारिवारिक वातावरण में एक-दूसरे के साथ समय बिताया।

सामुदायिक सहभोज ने समाज के विभिन्न वर्गों को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया और आपसी सौहार्द, भाईचारे एवं सामाजिक समरसता की भावना को और अधिक मजबूत बनाया।
भगवान शिव और माता पार्वती की जीवंत झांकी के साथ निकली भव्य शोभायात्रा
महोत्सव के दूसरे चरण में मंगलवार प्रातः 8 बजे थाना रोड स्थित श्री मारवाड़ी ठाकुरबाड़ी परिसर से भगवान शिव एवं माता पार्वती की मनमोहक जीवंत झांकी के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई।

पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित समाज के महिला-पुरुष, युवा, बच्चे एवं वरिष्ठजन हाथों में धर्मध्वजा और निशान लेकर शोभायात्रा में शामिल हुए। “जय महेश”, “हर हर महादेव” और शिव भजनों के गगनभेदी जयघोषों से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।

नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती इस शोभायात्रा ने आमजन का भी ध्यान आकर्षित किया। श्रद्धालु मार्ग में जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत करते दिखाई दिए। शोभायात्रा समाज की धार्मिक आस्था के साथ-साथ उसकी एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक बनी।

रूणिचाधाम में हुआ विशेष शिव पूजन एवं जलाभिषेक
शोभायात्रा हॉस्पिटल रोड स्थित जीएनजी पथ पर अवस्थित बाबा रामदेव मंदिर रूणिचाधाम पहुंची, जहां विद्वान पंडितों के सानिध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया।

समाज की ओर से यजमान के रूप में राजेश कुमार राठी एवं संतोष बागड़ी ने अपनी धर्मपत्नी सहित भगवान शिव का विधिवत पूजन एवं जलाभिषेक संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्रपाठ और धार्मिक विधानों के मध्य संपन्न हुए इस पूजन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण की प्रार्थना करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

महिलाओं ने किया शिव महिम्न स्तोत्र का सामूहिक पाठ
धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत समाज की महिलाओं द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से “शिव महिम्न स्तोत्र” का सामूहिक पाठ किया गया।

एक स्वर में गूंजते वैदिक स्तोत्रों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की तथा यह संदेश दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भजन संध्या बनी महोत्सव का विशेष आकर्षण
रात्रि के समय मंदिर परिसर में आयोजित भव्य भजन संध्या महोत्सव का विशेष आकर्षण रही। प्रसिद्ध देवकीनंदन भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत शिव भजनों, भक्तिगीतों और संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

भक्ति रस में सराबोर इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा एवं समाजबंधु उपस्थित रहे और देर रात तक शिव भक्ति का आनंद लेते रहे। भजन संध्या ने महेश नवमी महोत्सव को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया।

समाज की एकता और संगठनात्मक शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन
पूरे महोत्सव के दौरान समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठजनों एवं बच्चों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने माहेश्वरी समाज की संगठनात्मक शक्ति, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

कार्यक्रमों के सफल संचालन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, प्रायोजकों एवं कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी व्यवस्थाएं अत्यंत अनुशासित, व्यवस्थित एवं गरिमामय ढंग से संपन्न हुईं।

पदाधिकारियों ने व्यक्त किया आभार
महेश नवमी महोत्सव के सफल आयोजन पर माहेश्वरी सभा शिवसागर के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण चांडक एवं सचिव संदीप दम्माणी, माहेश्वरी महिला संगठन की अध्यक्ष राखी साबू लाहोटी एवं सचिव निर्मला गट्टाणी, तथा माहेश्वरी युवा संगठन के अध्यक्ष अमित करनानी एवं सचिव राधेश्याम राठी ने समाज के सभी सदस्यों, मातृशक्ति, युवाओं, वरिष्ठजनों, प्रायोजकों एवं कार्यकर्ताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम संयोजक राजेश कुमार गट्टाणी तथा सह-संयोजक अनिल कुमार मालपानी एवं शशिकला गट्टाणी ने कहा कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग, समर्पण और सहभागिता के कारण यह आयोजन अत्यंत सफल एवं अविस्मरणीय बन सका।

जनसंपर्क अधिकारी संतोष मालपाणी ने सभी सहयोगकर्ताओं और सहभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समाज की यही सामूहिक भावना भविष्य में भी सेवा, संस्कृति और सामाजिक उत्थान के नए आयाम स्थापित करेगी।

धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश
माहेश्वरी समाज के वंशोत्पत्ति दिवस के रूप में मनाया गया यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज में एकता, सेवा, त्याग, संस्कार, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम बना।

महेश नवमी महोत्सव का यह भव्य आयोजन शिवसागर के माहेश्वरी समाज के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जिसने भगवान महेश की आराधना के साथ-साथ समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक प्रतिबद्धता का भी सशक्त संदेश दिया।




