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असम में युवा कामगारों का शोषण! बीर लाचित सेना के नेता बिकाश असम का सख्त चेतावनी भरा पोस्ट, बोले- “मालिकों को पहले फोन, फिर खुद प्रवेश करेंगे”

गुवाहाटी में 10-12 घंटे काम, बिना पैसे ओवरटाइम, समय पर वेतन नहीं – हजारों युवक-युवतियों की शिकायतें मिलने के बाद बिकाश असम का बड़ा बयान; कहा- "असमीया लोगों का शोषण अब बर्दाश्त नहीं"

गुवाहाटी / 7 मई : असम के विभिन्न जिलों से गुवाहाटी में नौकरी करने वाले युवा-युवतियों के साथ हो रहे लगातार शोषण पर बीर लाचित सेना असम के केंद्रीय संयुक्त सचिव बिकाश असम उर्फ बिकाश बरुआ ने तीखा हमला बोला है।

उन्होंने गुरुवार को अपने फेसबुक पोस्ट में मजदूरों की दयनीय स्थिति का विस्तृत वर्णन किया और मालिकों-मैनेजरों को साफ चेतावनी दी कि अब इस शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बिकाश बरुआ ने लिखा कि असम के कोने-कोने से आए असमीया युवक-युवतियां गुवाहाटी में काम कर रहे हैं। पूरे महीने वे 10 से 12 घंटे तक लगातार काम करते हैं, कठोर श्रम करते हैं, लेकिन मालिक उन्हें समय पर वेतन नहीं देते। लगातार “कल दूंगा, परसों दूंगा” कहकर कर्मचारियों को दौड़ाते रहते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के ये लड़के-लड़कियां इसी कमाई से अपना अपना घर परिवार चलाते हैं। ओवरटाइम काम करवाने के बावजूद समय पर वेतन नहीं मिलता और जो वेतन मिलता भी है, वह न्यूनतम मजदूरी से भी कम होता है।

“क्या यह अच्छी बात है?”

बिकाश बरुआ ने सवाल उठाते हुए कहा है कि “क्या ये सब अच्छी बातें हैं? कर्मचारी लोग कानूनी बातें करने में आगे नहीं आते क्योंकि उन्हें अदालत और कानून का डर होता है। पूंजीपतियों के खिलाफ आवाज उठाने का साहस नहीं जुटा पाते हैं।”

उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा है कि अब बीर लाचित सेना के पास इस तरह की हजारों शिकायतें आ चुकी हैं। संगठन ने फैसला किया है कि पहले फोन के जरिए मालिक पक्ष और मैनेजर को सूचित किया जाएगा। अगर वे मान नहीं जाते तो संगठन अपने तरीके से संबंधित संस्थान में प्रवेश करेगा।

  • साफ चेतावनी :

बिकाश बरुआ ने सख्त लहजे में लिखा कि “उस समय हम पर झूठा आरोप न लगाएं कि हम धन उगाही कर रहे हैं, मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं, हत्या का प्रयास कर रहे हैं या अपहरण करने जा रहे हैं। ऐसी बातें आसानी से हमारे साथ जोड़ दी जाती हैं।”

उन्होंने कहा कि अपने असमीया समाज के अपने भाई-बहनों के साथ कोई दादागिरी करे, उनका मानसिक उत्पीड़न करे तो कोई भी स्वाभिमानी असमीया इसे अपनी आंखों के सामने बर्दाश्त नहीं कर सकता। असम और असमिया लोगों को किसी को कुछ देना नहीं है, बल्कि लेना ही है।

  • पोस्ट का अंतिम संदेश:

“असम और असमीया लोगों को किसी को कुछ उधार बकाया चुकना नहीं है, बल्कि उल्टा हमें ही मिलना है…बहुत कुछ…” कहकर बिकाश बरुआ ने अपने पोस्ट को समाप्त किया, जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि संगठन अब असम के युवा कामगारों के हक के लिए सक्रिय रूप से आगे आएगा।

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और असम के श्रमिक वर्ग में चर्चा का विषय बन गया है। संगठन के इस रुख से यह संकेत मिलता है कि अब निजी कंपनियों और संस्थानों में काम करने वाले असमिया युवाओं के शोषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।

बीर लाचित सेना असम पहले भी स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाती रही है। इस पोस्ट के बाद गुवाहाटी के विभिन्न उद्योगों और कंपनियों में हलचल मची हुई है।

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