भूमि सुरक्षा कानून की मांग को लेकर शिवसागर में वीर लाचित सेना का प्रदर्शन—22 सूत्री मांगों पर कार्रवाई की मांग : खिलंजिया समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा के लिए उठाई आवाज : Protected Belt/Block, Tribal Belt/Block और VGR/PGR समेत संरक्षित भूमि का जिला स्तरीय Land Audit कराने की मांग : बेनामी लेन-देन, फर्जी दस्तावेज और Power of Attorney के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान की मांग
भूमि विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए Land Protection Tribunal/Fast Track Mechanism बनाने का प्रस्ताव—भूमिहीन पात्र खिलंजिया परिवारों को भूमि पट्टा देने की भी मांग

शिवसागर, 29 सितंबर : असम के खिलंजिया समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा और इसके लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था की मांग को लेकर वीर लाचित सेना असम की शिवसागर जिला समिति ने दौलमुख चाराली में धरना एवं विरोध प्रदर्शन किया। संगठन की केंद्रीय समिति के आह्वान पर राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रदर्शन में संगठन के अनुसार 200 से अधिक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने भूमि अधिकारों से संबंधित 22 सूत्री मांगों पर राज्य सरकार से ठोस कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की। वीर लाचित सेना की अन्य जिला इकाइयों ने भी इसी अभियान के तहत भूमि अधिकारों की सुरक्षा को लेकर ज्ञापन दिए हैं।

‘खिलंजिया समुदायों के अस्तित्व से जुड़ा है भूमि अधिकार’
वीर लाचित सेना का कहना है कि असम के खिलंजिया समुदायों के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और ऐतिहासिक अस्तित्व के साथ भूमि अधिकार गहराई से जुड़े हुए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण, अतिक्रमण, जालसाजी, बेनामी लेन-देन और अन्य अनियमितताओं के कारण इन समुदायों के भूमि अधिकारों के सामने गंभीर चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
इन्हीं मुद्दों को सामने रखते हुए संगठन ने राज्य सरकार से भूमि संबंधी कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की मांग की। गौरतलब है कि असम समझौते के प्रावधानों में भी सरकारी भूमि तथा Tribal Belts and Blocks पर अतिक्रमण रोकने से संबंधित मौजूदा कानूनों के कड़ाई से क्रियान्वयन की बात कही गई है।
विशेष ‘असम खिलंजिया भूमि अधिकार एवं सुरक्षा कानून’ की मांग
संगठन ने कृषि भूमि, आवासीय भूमि और वंशानुगत भूमि अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से एक विशेष ‘असम खिलंजिया भूमि अधिकार एवं सुरक्षा कानून’ बनाने की मांग रखी है।
वीर लाचित सेना के अनुसार, प्रस्तावित कानूनी व्यवस्था के माध्यम से भूमि की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण को इस तरह नियंत्रित किया जाना चाहिए कि मौजूदा कानून के तहत भूमि प्राप्त करने के लिए अयोग्य व्यक्तियों के नाम अवैध हस्तांतरण न हो सके।
Protected Belt/Block और Tribal Belt/Block की सुरक्षा पर जोर
संगठन ने Protected Belt/Block और Tribal Belt/Block सहित संरक्षित क्षेत्रों में भूमि की खरीद-बिक्री एवं हस्तांतरण मौजूदा कानूनों के अनुरूप सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही इन क्षेत्रों में कथित अवैध कब्जे और गैरकानूनी भूमि हस्तांतरण को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी, भूमि अभिलेखों की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
संगठन की मोरीगांव इकाई की ओर से एक दिन पहले दिए गए ज्ञापन में भी Protected Belt and Block तथा Tribal Belt and Block की सुरक्षा, कथित अवैध भूमि हस्तांतरण रोकने और भूमिहीन स्थानीय परिवारों के लिए सरकारी भूमि की मांग प्रमुख रूप से शामिल थी।

बेनामी लेन-देन और Power of Attorney के दुरुपयोग पर रोक की मांग
वीर लाचित सेना ने भूमि से जुड़े बेनामी लेन-देन, Power of Attorney के कथित दुरुपयोग, फर्जी पहचान, जाली दस्तावेज और बिचौलियों के माध्यम से होने वाले कथित अवैध भूमि अधिग्रहण पर अंकुश लगाने के लिए विशेष जांच व्यवस्था और कड़े कानूनी प्रावधान की मांग की।
संगठन का कहना है कि भूमि संबंधी प्रत्येक महत्वपूर्ण लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संभावित अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र आवश्यक है।
संरक्षित भूमि का जिला स्तरीय Land Audit कराने की मांग
22 सूत्री मांगों में Protected Belt/Block, Tribal Belt/Block, VGR/PGR, सरकारी खास भूमि, वन भूमि, जलाशयों और अन्य संरक्षित भूमि का जिला स्तर पर विशेष सर्वेक्षण तथा Land Audit कराने की मांग भी शामिल है।
संगठन ने भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण को मजबूत करने और कथित रूप से अवैध तरीके से हस्तांतरित संरक्षित भूमि को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पुनः प्राप्त करने की व्यवस्था विकसित करने की मांग की।
भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और PGR, VGR जैसी आरक्षित सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकने के उपाय पहले से भी विभिन्न सरकारी प्रतिबद्धताओं का हिस्सा रहे हैं।
Land Protection Tribunal या Fast Track Mechanism की मांग
भूमि विवादों के शीघ्र और समयबद्ध निपटारे के लिए वीर लाचित सेना ने विशेष Land Protection Tribunal अथवा Fast Track Mechanism स्थापित करने की मांग रखी है।
संगठन ने यह भी मांग की कि किसी भूमि के हस्तांतरण से पहले संबंधित दस्तावेजों, वास्तविक स्वामित्व और हस्तांतरण के लिए संबंधित पक्षों की कानूनी पात्रता की अनिवार्य जांच की व्यवस्था की जाए। उसका कहना है कि ऐसी व्यवस्था से कथित फर्जीवाड़े और गैरकानूनी हस्तांतरण पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

भूमिहीन खिलंजिया परिवारों को भूमि पट्टा देने की मांग
वीर लाचित सेना ने पात्र भूमिहीन खिलंजिया परिवारों की पहचान कर उन्हें नियमानुसार उपयुक्त सरकारी भूमि का पट्टा प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई।
संगठन ने कहा कि भूमि से वंचित पात्र परिवारों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत भूमि अधिकार दिए जाने चाहिए। इसके साथ ही अवैध कब्जे और गैरकानूनी भूमि हस्तांतरण के मामलों में निष्पक्ष प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई।
दौलमुख चाराली में नारेबाजी के साथ प्रदर्शन
दौलमुख चाराली में आयोजित विरोध कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। संगठन के मुताबिक प्रदर्शन में 200 से अधिक कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने खिलंजिया लोगों के भूमि अधिकार सुनिश्चित करने, कानून के विपरीत भूमि हस्तांतरण रोकने और पात्र भूमिहीन परिवारों को भूमि पट्टा देने की मांग उठाई। संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में खिलंजिया लोगों की जमीन ऐसे लोगों के हाथों में जाने के मामले सामने आ रहे हैं जिन्हें संगठन “बाहरी” या “गैर-असमिया” बताता है। यह संगठन का दावा है; किसी विशेष भूमि हस्तांतरण की वैधता संबंधित रिकॉर्ड और कानून के आधार पर ही निर्धारित की जा सकती है।
माधुर्य राजखोवा के नेतृत्व में प्रदर्शन
शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष माधुर्य राजखोवा, उपाध्यक्ष विष्णु ज्योति सैकिया और सचिव अनुपान संदिकै के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने राज्य सरकार से अपनी 22 सूत्री मांगों पर शीघ्र विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना और इसके लिए स्पष्ट, पारदर्शी तथा समयबद्ध कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।

हर जिले में ‘खिलंजिया भूमि सुरक्षा समिति’ बनाने की घोषणा
वीर लाचित सेना ने राज्य के प्रत्येक जिले में ‘खिलंजिया भूमि सुरक्षा समिति’ गठित करने की घोषणा की है। संगठन के अनुसार इन समितियों में विभिन्न स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ किसान, युवा, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता, कानूनविद और संबंधित विषयों के विशेषज्ञों को शामिल करने की योजना है।
इन समितियों का प्रस्तावित उद्देश्य भूमि कानूनों को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाना, संदिग्ध भूमि लेन-देन की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना और प्रभावित लोगों को उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी देना होगा।
भूमि सुरक्षा जागरूकता अभियान और कानूनी शिविर की भी योजना
संगठन ने राज्यभर में भूमि सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने के साथ कानूनी जागरूकता शिविर, परिचर्चा और युवा सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है।
वीर लाचित सेना का कहना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम लोगों को भूमि संबंधी कानूनों, भूमि रिकॉर्ड, हस्तांतरण की वैधानिक प्रक्रिया और शिकायत के उपलब्ध माध्यमों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
लाचित दिवस पर विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी की योजना
संगठन ने आगामी लाचित दिवस के अवसर पर स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच राष्ट्रीय वीर लाचित बरफुकन पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित करने की भी घोषणा की।
इसके अलावा इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और विषय विशेषज्ञों की भागीदारी से विचार-विमर्श तथा शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बताई गई है। संगठन का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को असम के इतिहास और लाचित बरफुकन के योगदान से परिचित कराना है।
भूमि विवादों को सांप्रदायिक स्वरूप न देने की अपील
वीर लाचित सेना ने अपने वक्तव्य में कहा कि भूमि संबंधी विवादों को भाषा, धर्म अथवा सामाजिक पहचान के आधार पर सांप्रदायिक स्वरूप नहीं दिया जाना चाहिए। संगठन ने भूमि से संबंधित कानूनों के कठोर लेकिन निष्पक्ष क्रियान्वयन पर जोर देते हुए भूमि रिकॉर्ड की जांच, Land Audit और समयबद्ध कानूनी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
असम में भूमि कब्जे को रोकने के लिए पहले से Assam Land Grabbing Act, 2010 सहित कानूनी प्रावधान मौजूद हैं; वीर लाचित सेना की मौजूदा मांगें अतिरिक्त सुरक्षा और प्रवर्तन तंत्र की मांग के रूप में सामने आई हैं।
संगठन ने कहा कि खिलंजिया समुदायों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा को लेकर उसका अभियान कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से जारी रहेगा तथा सरकार से 22 सूत्री मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा है।




