शिवसागर में कथित सामूहिक हमले में घायल देवजीत बोरा की मौत—डेढ़ महीने से अधिक समय तक जिंदगी की जंग के बाद तोड़ा दम : 28 जुलाई की रात घर के पास छह युवकों द्वारा हमला किए जाने का आरोप—22 सितंबर को जेएमसी में निधन : गंभीर चोट और मस्तिष्क में रक्तस्राव के बाद लंबे समय तक ICU में चला इलाज : पत्नी ने छह लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कराने का किया दावा—अब तक गिरफ्तारी नहीं होने के आरोपों को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश
दो बच्चों के पिता थे देवजीत बोरा, दिसांगपार हाईस्कूल में कई वर्षों तक विज्ञान शिक्षक के रूप में दे चुके थे सेवा

शिवसागर, 23 सितंबर : शिवसागर जिले के दिचांग धाईआली पंचायत अंतर्गत बाढोयटिंग गांव निवासी 40 वर्षीय देवजीत बोरा की मौत के बाद इलाके में शोक के साथ आक्रोश का माहौल है। परिवार के अनुसार, 28 जुलाई की रात घर के पास हुए एक कथित सामूहिक हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद देवजीत डेढ़ महीने से अधिक समय से जिंदगी की जंग लड़ रहे थे। जोरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लंबे उपचार के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और आखिरकार 22 सितंबर को उन्होंने अंतिम सांस ली।

देवजीत की मौत के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच तथा हमले में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ शीघ्र कानूनी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। परिवार का दावा है कि घटना के संबंध में छह लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दी गई थी, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
28 जुलाई की रात क्या हुआ था?
परिवार और स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना 28 जुलाई की रात करीब 9:30 बजे की है। उस समय शिवसागर जिले के कई इलाके विनाशकारी बाढ़ की चपेट में थे। आरोप है कि छह युवकों का एक समूह इलाके में कथित तौर पर हंगामा कर रहा था।
इसी दौरान अपने घर से ऐतिहासिक धाईआली की ओर निकले देवजीत बोरा ने कथित रूप से युवकों से रात में हंगामा नहीं करने का अनुरोध किया। परिवार का आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और युवकों ने देवजीत पर हमला कर दिया।
सिर पर बांस से गंभीर वार किए जाने का आरोप
परिवार का आरोप है कि हमले के दौरान देवजीत के सिर पर बांस से गंभीर वार किया गया। चोट इतनी गंभीर थी कि वह बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़े। परिजनों का दावा है कि हमलावर उन्हें घायल अवस्था में वहीं छोड़कर चले गए।
हमले में देवजीत के सिर में गंभीर चोट आई और बाद में मस्तिष्क में रक्तस्राव की स्थिति सामने आई। इसके बाद उन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता पड़ी।
ये विवरण परिवार और स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। हमले के सटीक घटनाक्रम और इसमें प्रत्येक नामजद व्यक्ति की कथित भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।
शिवसागर सिविल अस्पताल से जोरहाट मेडिकल कॉलेज रेफर
घटना के बाद परिजन देवजीत को तत्काल जयसागर स्थित शिवसागर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए जोरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया।
परिवार के अनुसार, जोरहाट मेडिकल कॉलेज में देवजीत की स्थिति गंभीर बनी रही। उन्हें ICU में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। सिर में लगी गंभीर चोट के कारण उनकी सर्जरी भी की गई।
लंबे इलाज के बावजूद नहीं बच सकी जान
देवजीत बोरा डेढ़ महीने से अधिक समय तक अस्पताल में उपचाराधीन रहे। परिवार को उनके स्वस्थ होकर लौटने की उम्मीद थी, लेकिन गंभीर चोट और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य जटिलताओं के बीच उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
आखिरकार 22 सितंबर को जोरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उपचार के दौरान देवजीत बोरा की मौत हो गई। उनकी मौत की खबर सामने आते ही परिवार, परिचितों और वृहत्तर आखौयफुटिया सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
पत्नी ने छह लोगों पर लगाया हमले का आरोप
देवजीत की पत्नी लखीमी बोरा ने आरोप लगाया है कि रंजन बरदलै, पार्थज्योति नौकाश्यप, अभिजीत बोरा, मनदीप गोगोई, पुतुकोन सैकिया और शंकुब सैकिया नामक छह युवकों ने उनके पति पर हमला किया था।
परिवार का दावा है कि हमले के बाद देवजीत को गंभीर रूप से घायल अवस्था में सड़क पर छोड़ दिया गया। हालांकि, ये सभी आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं और नामजद व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकता है।
शिवसागर सदर थाने में FIR देने का दावा
परिवार के अनुसार, घटना के बाद शिवसागर सदर पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। इसके अलावा मामले में कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर शिवसागर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष भी आवेदन दिया गया।
परिवार का कहना है कि 14 सितंबर को लखीमी बोरा ने शिवसागर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक और आवेदन देकर छह नामजद लोगों का उल्लेख किया और अपने पति पर हुए कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
गिरफ्तारी नहीं होने के आरोपों को लेकर बढ़ा आक्रोश
परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। देवजीत की मौत के बाद इसी मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी और बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के तत्काल बाद पुलिस को शिकायत दिए जाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने तथा साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
दो आरोपियों के जातीय संगठनों से जुड़े होने का स्थानीय दावा
स्थानीय स्तर पर यह दावा भी किया जा रहा है कि मामले में नामजद दो व्यक्ति दो अलग-अलग जातीय संगठनों से जुड़े नेता हैं और फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि मामले में नामजद कुछ लोग घटना के बाद खुलेआम घूमते रहे, लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। संबंधित संगठनों, नामजद व्यक्तियों अथवा पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
देवजीत की मौत के बाद कार्रवाई की मांग हुई तेज
डेढ़ महीने से अधिक समय तक उपचार के बाद देवजीत की मौत ने मामले को और गंभीर बना दिया है। वृहत्तर आखौयफुटिया और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने पुलिस प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच, नामजद लोगों की भूमिका की निष्पक्ष पड़ताल और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शीघ्र कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि 28 जुलाई की रात वास्तव में क्या हुआ था, हमले में कौन-कौन शामिल था और घटना के बाद पुलिस की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
दिसांगपार हाईस्कूल में विज्ञान शिक्षक रह चुके थे देवजीत
देवजीत बोरा दो बच्चों के पिता थे। उन्होंने शिवसागर के दिसांगपार हाईस्कूल में कई वर्षों तक विज्ञान शिक्षक के रूप में सेवा दी थी। उनकी मौत से परिवार के साथ-साथ परिचितों, पूर्व सहयोगियों और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है।
कथित हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद लंबे समय तक चले इलाज और अंततः उनकी मौत के बाद परिवार तथा स्थानीय लोगों की न्याय और कार्रवाई की मांग और तेज हो गई है।
फिलहाल मामले में पुलिस जांच की मौजूदा स्थिति, गिरफ्तारी अथवा नामजद आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक पुलिस पक्ष इस विवरण में उपलब्ध नहीं है। पुलिस तथा अन्य संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान सामने आने के बाद घटनाक्रम और आरोपों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।




