अल्फा (आई) के नाम पर कथित रंगदारी का नेटवर्क: मोरान पुलिस की कार्रवाई में दो और संदिग्ध लिंकमैन हिरासत में : पहले दो आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी—जांच आगे बढ़ी तो दो और कथित OGWs आए पुलिस की पकड़ में : कारोबारियों और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के मोबाइल नंबर व संपर्क विवरण अल्फा (आई) तक पहुंचाने का आरोप
रंगदारी की रकम हासिल करने और आगे पहुंचाने में लॉजिस्टिक मदद देने का संदेह—नेटवर्क की अन्य कड़ियों की तलाश जारी

शिवसागर, 17 सितंबर : प्रतिबंधित संगठन अल्फा (आई) के नाम पर कथित रूप से रंगदारी मांगने के मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चराईदेव जिले की मोरान पुलिस ने इस मामले में दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी के बाद अब दो और संदिग्ध लिंकमैन अथवा ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पर अल्फा (आई) के लिए कथित रूप से लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध कराने के साथ कारोबारियों एवं आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से जुड़ी संपर्क जानकारियां पहुंचाने का संदेह है।

तपोबन गोगोई और गौरव गोगोई हिरासत में
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान गोजपुरिया गांव, मोरान, डिब्रूगढ़ निवासी तपोबन गोगोई और पदुमोनी ना गांव, खोवांग, डिब्रूगढ़ निवासी गौरव गोगोई की कथित भूमिका सामने आने के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर कथित रंगदारी नेटवर्क से उनके संपर्क और भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
यह कार्रवाई मोरानहाट पुलिस स्टेशन केस नंबर 51/26 के सिलसिले में की गई है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(4), 308(5), 351(3), 61(2) और 3(5) के साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 10, 13, 16(1)(b), 17, 18A, 18B, 20, 39 और 40 के तहत दर्ज किया गया है।

पहले गिरफ्तार हो चुके हैं दो आरोपी
इस मामले में मोरान पुलिस इससे पहले दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें पार्थ प्रतिम बरुआ (31), पिता चंद्रेश्वर बरुआ, निवासी नखत नगांव, मोरान, डिब्रूगढ़ और अब्दुल सत्तार (35), पिता स्वर्गीय रफिउल हुसैन, निवासी धोलेबागान, मथुरापुर, चराइदेव शामिल हैं।
इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस कथित रंगदारी नेटवर्क से जुड़े अन्य संपर्कों, सहयोगियों और संभावित लिंकमैन की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इसी क्रम में तपोबन गोगोई और गौरव गोगोई के बारे में जानकारी मिलने का पुलिस ने दावा किया है।

रंगदारी की रकम पहुंचाने में मदद का संदेह
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, हिरासत में लिए गए दोनों व्यक्तियों पर अल्फा (आई) को कथित रूप से लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने का संदेह है। आरोप है कि रंगदारी के रूप में मांगी गई रकम को प्राप्त करने तथा उसे आगे पहुंचाने की प्रक्रिया में भी कथित तौर पर सहयोग दिया जाता था।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित व्यवस्था के जरिए अब तक कितनी रकम का लेन-देन हुआ, रकम किस-किस माध्यम से प्राप्त की गई और अंततः उसे कहां तथा किस व्यक्ति तक पहुंचाया गया।

कारोबारियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने का आरोप
जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आने का पुलिस ने दावा किया है। हिरासत में लिए गए दोनों व्यक्तियों पर मोरान, आसपास के क्षेत्रों और डिब्रूगढ़ के प्रभावशाली तथा आर्थिक रूप से संपन्न लोगों के मोबाइल नंबर और अन्य संपर्क विवरण कथित रूप से उपलब्ध कराने का आरोप है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस तरह जुटाए गए संपर्क विवरणों के आधार पर संबंधित लोगों, विशेष रूप से कारोबारियों और आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्तियों की पहचान की जाती थी और बाद में उनसे अल्फा (आई) के नाम पर कथित रूप से रंगदारी की मांग की जाती थी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क के जरिए किन-किन लोगों की व्यक्तिगत संपर्क जानकारी संगठन से जुड़े लोगों तक पहुंचाई गई तथा इनमें से कितने लोगों से रंगदारी की मांग की गई।
अल्फा (आई) कैडर अभिलेख सोनवाल से संपर्क की भी जांच
पुलिस जांच में खोवांग, डिब्रूगढ़ निवासी बताए गए अल्फा (आई) कैडर अभिलेख सोनवाल का नाम भी सामने आया है। पुलिस का दावा है कि अभिलेख सोनवाल कथित रूप से इन लिंकमैन अथवा ओवर ग्राउंड वर्कर्स के नियमित संपर्क में रहा है।
पुलिस के मुताबिक, चिह्नित कारोबारियों से इन कथित सहयोगियों के माध्यम से रंगदारी की मांग किए जाने के सिलसिले में भी अभिलेख सोनवाल की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस इस कथित संपर्क श्रृंखला से जुड़े संवाद, वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क की अन्य कड़ियों पर नजर
जांच एजेंसियों का ध्यान अब कथित नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन, संपर्कों और संभावित सहयोगियों की पहचान पर केंद्रित है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित रंगदारी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं तथा अलग-अलग व्यक्तियों की इसमें क्या भूमिका रही है।
इसके साथ ही पुलिस उन लोगों की भी पहचान करने की कोशिश कर रही है जिनसे अल्फा (आई) के नाम पर कथित रूप से रंगदारी मांगी गई हो या जिनकी संपर्क संबंधी जानकारी कथित नेटवर्क के माध्यम से साझा की गई हो।
जांच और फॉलो-अप कार्रवाई जारी
मामले में पुलिस की जांच और फॉलो-अप कार्रवाई जारी है। जांच का उद्देश्य अल्फा (आई) से जुड़े बताए जा रहे इस कथित रंगदारी नेटवर्क की शेष कड़ियों, संपर्क सूत्रों और संभावित सहयोगियों का पता लगाना है।
हालांकि, हिरासत में लिए गए तपोबन गोगोई और गौरव गोगोई के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल जांच के अधीन हैं। मामले में अंतिम तथ्य विस्तृत पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।




