शिवसागर में सड़क हादसे में घायल जुबेदा बेगम की मौत के बाद फूटा जनाक्रोश, शव लेकर एसएसपी कार्यालय का घेराव : बागलहाबी गांव से सैकड़ों लोग पहुंचे एसएसपी कार्यालय : कथित रूप से नाबालिग चला रहा था बिना नंबर प्लेट व आवश्यक दस्तावेज वाली बाइक : नाबालिग के अभिभावक की गिरफ्तारी और मृतका के आश्रित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग; पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर
परिजनों का गंभीर आरोप—बेहतर इलाज का भरोसा देकर आधार, पैन व राशन कार्ड समेत महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज लिए, अब तक नहीं लौटाए : नर्सिंग होम में हादसे की वास्तविक वजह छिपाने की हुई कोशिश; हालत बिगड़ने पर एएमसी ले जाई गईं जुबेदा, इलाज के दौरान मौत

शिवसागर, 10 सितंबर : शिवसागर शहर के निकट बागलहाबी गांव की रहने वाली जुबेदा बेगम की सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मौत हो जाने से इलाके में शोक के साथ भारी जनाक्रोश फैल गया। घटना से नाराज मृतका के परिजन और सैकड़ों स्थानीय लोग जुबेदा बेगम का शव लेकर शिवसागर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय के सामने पहुंचे और घेराव कर विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दुर्घटना से लेकर इलाज और उसके बाद सामने आए तमाम आरोपों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई तथा मृतका के आश्रित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा दिए जाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिस मोटरसाइकिल से दुर्घटना हुई, उसे कथित रूप से एक नाबालिग चला रहा था। उनका दावा है कि बाइक पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी और वाहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे। लोगों ने इन सभी तथ्यों की पुलिस से विस्तृत जांच कराने के साथ नाबालिग के अभिभावक के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग उठाई है।

8 सितंबर की रात घर के प्रवेश द्वार के पास हुआ हादसा
स्थानीय लोगों के अनुसार, दुर्घटना 8 सितंबर की रात हुई थी। जुबेदा बेगम कथित रूप से अपने घर के प्रवेश द्वार के पास थीं, तभी एक नाबालिग द्वारा चलाई जा रही बताई जा रही ग्लैमर मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर में जुबेदा गंभीर रूप से घायल हो गईं।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और परिवार के सदस्यों ने उन्हें उपचार के लिए शिवसागर शहर के एक नर्सिंग होम पहुंचाया। वहां उनका प्रारंभिक इलाज किया गया, लेकिन उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिवार उन्हें बेहतर उपचार के लिए असम मेडिकल कॉलेज (एएमसी) ले गया।
एएमसी में इलाज जारी रहा, बुधवार शाम तोड़ा दम
परिजनों के मुताबिक, एएमसी में जुबेदा बेगम का इलाज जारी था, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका। बुधवार शाम इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
जुबेदा की मौत की खबर बागलहाबी गांव पहुंचते ही परिवार और स्थानीय लोगों में शोक के साथ आक्रोश फैल गया। इसके बाद दुर्घटना और उसके बाद कथित रूप से हुई गतिविधियों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए।
नर्सिंग होम में वास्तविक कारण छिपाने की कोशिश का आरोप
स्थानीय लोगों ने नर्सिंग होम में जुबेदा बेगम को भर्ती कराए जाने के बाद तैयार किए गए चिकित्सकीय दस्तावेजों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि हादसे के बाद कुछ युवकों ने कथित रूप से चिकित्सक को प्रभावित करने का प्रयास किया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जुबेदा के सड़क दुर्घटना में घायल होने की वास्तविक परिस्थिति दर्ज कराने के बजाय संबंधित दस्तावेज में उनके चक्कर खाकर गिरने की बात लिखवाई गई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पुलिस नर्सिंग होम में तैयार किए गए सभी संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड की जांच करे और यह पता लगाए कि अस्पताल में भर्ती कराते समय घटना के संबंध में क्या जानकारी दी गई थी तथा चिकित्सकीय दस्तावेजों में वास्तव में क्या दर्ज किया गया।
हालांकि, नर्सिंग होम और चिकित्सकीय दस्तावेजों को लेकर सामने आए ये दावे स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बेहतर इलाज का भरोसा देकर मूल दस्तावेज लेने का आरोप
मृतका के परिवार ने मामले में एक और गंभीर आरोप लगाया है। परिवार के अनुसार, दुर्घटना के बाद आरोपी बताए जा रहे नाबालिग के पिता ने कथित रूप से जुबेदा बेगम को पर्याप्त और बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था।
परिजनों का आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर उनसे जुबेदा बेगम का आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मूल प्रतियां ली गई थीं। परिवार का दावा है कि ये महत्वपूर्ण दस्तावेज अब तक उन्हें वापस नहीं किए गए हैं।
परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस से सभी मूल दस्तावेज तत्काल वापस दिलाने की मांग की है। साथ ही यह भी जांचने को कहा है कि दस्तावेज किस उद्देश्य से लिए गए थे और उन्हें परिवार को अब तक वापस क्यों नहीं किया गया।
आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान सहयोग नहीं मिलने का दावा
परिवार का यह भी आरोप है कि जब जुबेदा बेगम अस्पताल के आईसीयू में उपचाराधीन थीं, तब दुर्घटना करने वाले नाबालिग के परिवार से जुड़े लोग कथित रूप से आईसीयू के बाहर से चले गए। इसके बाद दस्तावेज लौटाने और उपचार संबंधी जिम्मेदारी को लेकर उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
परिजनों का कहना है कि दुर्घटना के बाद शुरुआत में बेहतर इलाज कराने का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। जुबेदा की मौत के बाद इसी को लेकर परिवार और स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
शव लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे सैकड़ों लोग
जुबेदा बेगम की मौत के बाद आक्रोशित परिजन और सैकड़ों स्थानीय लोग उनका शव लेकर शिवसागर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने पहुंच गए। वहां लोगों ने घेराव एवं विरोध-प्रदर्शन कर पुलिस प्रशासन से मामले में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने हादसे में इस्तेमाल मोटरसाइकिल, कथित नाबालिग चालक, वाहन की नंबर प्लेट और दस्तावेजों की स्थिति के साथ हादसे के बाद हुई गतिविधियों की विस्तृत जांच कराने की मांग उठाई।
लोगों का कहना है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि नाबालिग बिना वैध दस्तावेज और नंबर प्लेट वाले वाहन का संचालन कर रहा था, तो उससे संबंधित जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से नाबालिग के अभिभावक के खिलाफ कानून के अनुरूप कार्रवाई की मांग की।
मृतका के आश्रित परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग
विरोध-प्रदर्शन के दौरान जुबेदा बेगम के आश्रित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। स्थानीय लोगों का कहना था कि हादसे में परिवार ने अपना एक सदस्य खो दिया है, इसलिए न्यायिक एवं कानूनी कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवार को आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया कि मामले को केवल सड़क दुर्घटना तक सीमित न रखा जाए, बल्कि हादसे से पहले और बाद की पूरी परिस्थितियों की जांच की जाए।
बाइक, दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड—हर पहलू की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने पुलिस के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें दुर्घटना में इस्तेमाल मोटरसाइकिल की वैधानिक स्थिति, वाहन को चला रहे कथित नाबालिग की भूमिका, बाइक की नंबर प्लेट एवं दस्तावेज, दुर्घटना के बाद नर्सिंग होम में तैयार मेडिकल रिकॉर्ड तथा परिवार से लिए गए आधार, पैन और राशन कार्ड समेत मूल दस्तावेजों से जुड़े आरोपों की जांच शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच से ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी और जिम्मेदारी तय हो पाएगी।
बागलहाबी में शोक और आक्रोश, पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
जुबेदा बेगम की मौत से बागलहाबी गांव में शोक का माहौल है, वहीं दुर्घटना के बाद सामने आए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों की निगाहें अब पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुरूप कार्रवाई हो, परिवार से लिए गए सभी मूल दस्तावेज वापस दिलाए जाएं और जुबेदा बेगम के आश्रित परिवार को न्याय के साथ उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल नाबालिग चालक, उसके अभिभावक, नर्सिंग होम और दस्तावेजों से संबंधित आरोप प्रदर्शनकारियों एवं मृतका के परिजनों के दावे हैं; इन आरोपों पर संबंधित पक्षों अथवा पुलिस की आधिकारिक जांच का निष्कर्ष सामने आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




