काले कपड़े हाथों में लेकर शिवसागर की सड़कों पर उतरा टाइपा—बाढ़ पीड़ितों के हक में जोरदार प्रदर्शन : 15 हजार की एकमुश्त सहायता से वंचित परिवारों का उठाया मुद्दा—पात्र पीड़ितों को तत्काल राहत देने की मांग : प्रभावित परिवारों के उचित मुआवजे और प्रभावी पुनर्वास पर जोर—शिवसागर व चराईदेव के लिए 5,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग
कथित अवैध कोयला-पत्थर खनन पर पूर्ण रोक लगाने की मांग—दौलमुख चाराली में नारों के साथ सरकार और प्रशासन के समक्ष दर्ज कराया विरोध

शिवसागर, 17 सितंबर : जुलाई महीने में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत, उचित मुआवजा और प्रभावी पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग को लेकर ताई आहोम युवा परिषद असम (टाइपा) की शिवसागर जिला समिति ने गुरुवार को शिवसागर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में काले कपड़े लेकर बड़ी संख्या में संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी सड़कों पर उतरे और बाढ़ प्रभावित परिवारों से जुड़े लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान की मांग की।

दौलमुख चाराली में टाइपा का विरोध प्रदर्शन
शिवसागर नगर के व्यस्त दौलमुख चाराली में आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व टाइपा की शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष दीपक चेतिया, कार्यकारी अध्यक्ष जयंत बोरगोहांई तथा संयुक्त सचिव सौरभ नेओग और सत्यजीत बोरगोहांई ने किया।
प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा जुलाई की बाढ़ से प्रभावित परिवारों को घोषित सरकारी सहायता उपलब्ध कराने के साथ नुकसान के अनुरूप मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित करना रहा। प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े हाथों में लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और सरकार तथा जिला प्रशासन से राहत प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।
15 हजार की सहायता से वंचित परिवारों का मुद्दा उठाया
टाइपा ने आरोप लगाया कि जुलाई की प्रलयंकारी बाढ़ में भारी नुकसान झेलने वाले अनेक परिवारों को अब तक सरकार की ओर से घोषित 15 हजार की एकमुश्त आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है। संगठन ने मांग की कि सहायता से वंचित सभी पात्र परिवारों की पहचान और आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया जल्द पूरी कर राहत राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
राज्य सरकार ने 17 अगस्त को चार बाढ़ प्रभावित जिलों में अंतरिम राहत वितरण की जानकारी देते हुए बताया था कि उस समय शिवसागर जिले के करीब 3,000 परिवारों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी था और सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र परिवारों को राहत देने की बात कही गई थी।
टाइपा का कहना है कि बाढ़ के करीब दो महीने बाद भी यदि पात्र परिवार सहायता का इंतजार कर रहे हैं तो प्रशासन को राहत वितरण की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।
केवल तात्कालिक राहत नहीं, प्रभावी पुनर्वास की भी मांग
संगठन ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए केवल तात्कालिक आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है। जिन परिवारों के मकान, संपत्ति और आजीविका के साधन बाढ़ के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, उनके लिए दीर्घकालिक और प्रभावी पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
टाइपा ने मांग की कि प्रभावित परिवारों के वास्तविक नुकसान का उचित आकलन कर उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, ताकि वे अपने घरों और आजीविका को दोबारा खड़ा कर सकें।
जुलाई की विनाशकारी बाढ़ ने शिवसागर सहित ऊपरी असम के कई इलाकों में व्यापक नुकसान पहुंचाया था। उस समय जिला प्रशासन के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में इसे क्षेत्र में करीब पांच दशकों की सबसे गंभीर बाढ़ में से एक बताया गया था।

नारों से गूंजा प्रदर्शन स्थल
विरोध प्रदर्शन के दौरान टाइपा कार्यकर्ताओं ने “बाढ़ पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दो”, “अकर्मण्य जिला प्रशासन हाय-हाय” और “टाइपा जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए।
संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सरकार तथा जिला प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की राहत और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
कथित अवैध कोयला और पत्थर खनन पर रोक की मांग
बाढ़ राहत और पुनर्वास के मुद्दे के साथ टाइपा ने क्षेत्र में कथित अवैध कोयला और पत्थर खनन को पूरी तरह बंद करने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि अवैध खनन की शिकायतों पर सरकार और संबंधित विभागों को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि जुलाई की बाढ़ के बाद क्षेत्र में खनन गतिविधियों तथा बाढ़ के कारणों की जांच की मांग विभिन्न नागरिक और सामाजिक मंचों पर भी उठती रही है। टाइपा ने भी इस मुद्दे को अपने प्रदर्शन के दौरान प्रमुखता से उठाया।
शिवसागर-चराईदेव के लिए 5,000 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग
टाइपा ने राज्य सरकार के सामने एक बड़ी आर्थिक मांग रखते हुए शिवसागर और चराईदेव जिलों के लिए 5,000 करोड़ का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करने की मांग की है।
संगठन के अनुसार, इस विशेष पैकेज का इस्तेमाल बाढ़ से तबाह क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और बहाली के लिए किया जाना चाहिए।
टाइपा का कहना है कि बाढ़ के व्यापक प्रभाव को देखते हुए केवल व्यक्तिगत राहत राशि से समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। प्रभावित इलाकों में सड़क, जल निकासी और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे की बहाली के साथ दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन पर भी काम किए जाने की जरूरत है।
लंबित राहत और पुनर्वास के मुद्दे फिर आए सामने
टाइपा के इस विरोध प्रदर्शन ने जुलाई की विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े लंबित मुद्दों को एक बार फिर सामने ला दिया है।
संगठन ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि 15 हजार की एकमुश्त सहायता से वंचित पात्र बाढ़ पीड़ित परिवारों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। साथ ही वास्तविक नुकसान के अनुरूप उचित मुआवजा, प्रभावी पुनर्वास और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
टाइपा ने कहा कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को उनका उचित हक दिलाने के लिए संगठन उनकी मांगों को लगातार उठाता रहेगा।




