शिवसागर में ग्रीष्मकालीन मूकाभिनय कार्यशाला का भव्य समापन, प्रशिक्षार्थियों ने ‘खामोश अभिनय’ से दिखाई प्रतिभा : असम सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग के तत्वावधान में थर्ड थिएटर का आयोजन, शिवसागर जिला प्रशासन का रहा सहयोग : 16 से 30 जुलाई तक चला विशेष प्रशिक्षण—शारीरिक अभिव्यक्ति, अंग-संचालन, मेकअप, मंच अनुशासन और रचनात्मकता की सिखाई गईं बारीकियां
प्रसिद्ध मूकाभिनय कलाकार बिजित कुमार दास रहे मुख्य प्रशिक्षक; समापन समारोह में मूकाभिनय और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन

शिवसागर, 14 सितंबर : बिना एक भी शब्द बोले केवल हाव-भाव, शारीरिक गतिविधियों और भावनात्मक अभिव्यक्ति के जरिए अपनी बात दर्शकों तक पहुंचाने की कला ‘मूकाभिनय’ को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में शिवसागर में आयोजित ग्रीष्मकालीन मूकाभिनय कार्यशाला का शनिवार को भव्य एवं सफल समापन हुआ। असम सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग के तत्वावधान में, शिवसागर जिला प्रशासन के सहयोग तथा थर्ड थिएटर के आयोजन में बीनापाणि संगीत महाविद्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यशाला ने युवा कलाकारों को मूकाभिनय और रंगमंच की बारीकियां सीखने के साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

16 से 30 जुलाई तक युवा कलाकारों ने लिया विशेष प्रशिक्षण
ग्रीष्मकालीन मूकाभिनय कार्यशाला का आयोजन 16 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक किया गया था। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिभागियों को मूकाभिनय की विभिन्न तकनीकों से व्यावहारिक रूप से परिचित कराया गया। कार्यशाला के औपचारिक समापन के उपलक्ष्य में 12 सितंबर को शाम 4 बजे से शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के सभागार में विशेष समापन समारोह आयोजित किया गया।
समारोह में कला, संस्कृति, प्रशासन, पत्रकारिता और रंगमंच से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। आयोजन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण पूरा होने का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि प्रशिक्षार्थियों को मंच प्रदान कर कार्यशाला के दौरान हासिल कौशल को दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर देना भी था।
अतिरिक्त आयुक्त गौरी प्रिया देउरी रहीं मुख्य अतिथि
समापन समारोह में अतिरिक्त आयुक्त गौरी प्रिया देउरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ सांस्कृतिक कार्य निदेशालय के मुख्य सांस्कृतिक अधिकारी नीलोत्पल राजकोंवर, प्रसिद्ध नाटक निर्देशक प्रशांत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार रातु कुमार दास, शिवसागर प्रेस क्लब के सचिव हिमांशु नियोग, बीनापाणि संगीत महाविद्यालय के अध्यक्ष क्षीरोद नाथ दास तथा थर्ड थिएटर के सहायक सचिव नृपति रंजन हजारिका की विशेष उपस्थिति रही।
अतिथियों ने प्रशिक्षार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए मूकाभिनय एवं रंगमंच जैसी कलाओं के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं नई पीढ़ी को पारंपरिक एवं आधुनिक रंगमंचीय विधाओं से परिचित कराने के साथ उनमें आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

बिना संवाद भाव व्यक्त करने की कला से हुए रूबरू
कार्यशाला में प्रशिक्षार्थियों को मूकाभिनय के अलग-अलग पहलुओं एवं तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेष रूप से शारीरिक अभिव्यक्ति, अंग-संचालन, चेहरे और शरीर के माध्यम से भावों को बिना संवाद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने, मेकअप कला, मंच अनुशासन और रचनात्मक क्षमता के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को केवल मूकाभिनय की तकनीकी जानकारी देना नहीं था, बल्कि उनके आत्मविश्वास, कल्पनाशीलता और मंचीय अभिव्यक्ति को भी विकसित करना था। प्रशिक्षार्थियों को यह समझाया गया कि मूकाभिनय में कलाकार का शरीर ही उसकी भाषा बन जाता है और छोटे से छोटा हाव-भाव भी दर्शकों तक प्रभावशाली संदेश पहुंचा सकता है।
प्रशिक्षार्थियों की प्रस्तुतियां बनीं समारोह का प्रमुख आकर्षण
समापन समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा प्रशिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत मूकाभिनय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। कार्यशाला में मिले प्रशिक्षण और अनुभव को मंच पर उतारते हुए प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
बिना शब्दों के केवल हाव-भाव, शारीरिक गतिविधियों और भावनात्मक अभिव्यक्ति के जरिए प्रस्तुत कार्यक्रमों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रस्तुतियों ने यह भी दिखाया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने मूकाभिनय की तकनीकों को किस हद तक आत्मसात किया है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समापन समारोह को और अधिक जीवंत एवं मनोरंजक बनाया।

बिजित कुमार दास ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में दिया मार्गदर्शन
कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक की जिम्मेदारी प्रसिद्ध मूकाभिनय कलाकार बिजित कुमार दास ने निभाई। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षार्थियों को मूकाभिनय की विभिन्न तकनीकों के साथ मंचीय प्रस्तुति की बारीकियों से परिचित कराया गया।
संजीव दास और बिरिंची बोरा ने सहायक प्रशिक्षकों के रूप में प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। वहीं बुद्धि बीरेन्द्र कुमार दास और इंद्रजीत दास ने कार्यशाला के समन्वयक के रूप में आयोजन, प्रशिक्षण और संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।
मूकाभिनय और नाट्यकला के प्रचार में लगातार सक्रिय है थर्ड थिएटर
उल्लेखनीय है कि थर्ड थिएटर पिछले कई वर्षों से मूकाभिनय और नाट्यकला के प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। संस्था की ओर से नियमित रूप से थर्ड थिएटर महोत्सव, मूकाभिनय कार्यशालाओं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है।
इन गतिविधियों के माध्यम से संस्था मूकाभिनय और नाट्यकला को नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने के साथ असम के समृद्ध सांस्कृतिक परिवेश को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। आयोजकों के अनुसार ग्रीष्मकालीन मूकाभिनय कार्यशाला भी इसी सांस्कृतिक अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी रही।
युवाओं की छिपी कलात्मक प्रतिभा को मिला मंच
आयोजकों का कहना है कि कार्यशाला ने युवाओं में मूकाभिनय के प्रति रुचि विकसित करने के साथ उनकी छिपी हुई कलात्मक एवं रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने का अवसर दिया। अनुभवी कलाकारों से सीधे प्रशिक्षण मिलने से प्रतिभागियों को रंगमंच और मूकाभिनय की व्यावहारिक समझ विकसित करने में भी सहायता मिली।
मूकाभिनय जैसी कला में संवाद के स्थान पर कलाकार के हाव-भाव और शारीरिक अभिव्यक्ति ही संदेश संप्रेषण का माध्यम बनते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण ने प्रतिभागियों को अपने शरीर, भाव और कल्पना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान किया।
सहयोगियों और शुभचिंतकों के प्रति थर्ड थिएटर ने जताया आभार
कार्यशाला और समापन समारोह के सफल आयोजन के बाद थर्ड थिएटर ने असम सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग, शिवसागर जिला प्रशासन, बीनापाणि संगीत महाविद्यालय, विशिष्ट अतिथियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों एवं शुभचिंतकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
संस्था ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को रंगमंच और मूकाभिनय से जोड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। साथ ही ऐसे प्रयास युवा प्रतिभाओं को मंच देने और असम की समृद्ध कला-संस्कृति को संरक्षित करते हुए अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।




