Welcome to NE NEWS 24X7   Click to listen highlighted text! Welcome to NE NEWS 24X7
ASSAMEducationLocal NewsNGOSocial ServiceSTATETeokराज्यलोकल न्यूज़

शिक्षक दिवस पर टियोक में गुरुजनों का घर-घर जाकर सम्मान, गमछा पहनाकर लिया आशीर्वाद : टियोक शाखा साहित्य सभा और मारवाड़ी सम्मेलन की सराहनीय पहल, शिक्षकों के प्रति जताई श्रद्धा और कृतज्ञता

विद्यालयों में भी उत्साह से मना शिक्षक दिवस, विद्यार्थियों ने पेन-कॉपी, फूल और हस्तनिर्मित कलाकृतियां भेंट कर गुरुजनों का किया अभिनंदन

टियोक, 6 सितंबर : शिक्षक दिवस के अवसर पर टियोक क्षेत्र में गुरुजनों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता की प्रेरणादायी तस्वीर देखने को मिली। टियोक शाखा साहित्य सभा और मारवाड़ी सम्मेलन, टियोक शाखा ने अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र के शिक्षकों के घर पहुंचकर उन्हें पारंपरिक गमछा पहनाकर सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। वहीं विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों ने भी अपने-अपने अंदाज में शिक्षकों के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त किया।

शिक्षक दिवस के इन आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि आधुनिकता और तकनीक के तेजी से बदलते दौर में भी गुरु का महत्व कम नहीं हुआ है। शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, संस्कार और जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

साहित्य सभा के पदाधिकारी पहुंचे शिक्षकों के घर

टियोक शाखा साहित्य सभा की ओर से आयोजित विशेष सम्मान कार्यक्रम में शाखा अध्यक्ष रत्नेश्वर गोगोई के साथ ब्रजेन दत्त, लिपिका बरुआ, बिनिता सैकिया और जितेन दास ने सहभागिता की।

प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र के विभिन्न शिक्षकों के घर पहुंचकर उन्हें गमछा पहनाया और शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान गुरुजनों से आशीर्वाद लेते हुए उनके स्वस्थ, दीर्घायु और शांतिपूर्ण जीवन की कामना भी की गई।

शिक्षकों ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शिक्षा के साथ संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।

स्कूलों में विद्यार्थियों ने अपने अंदाज में जताया सम्मान

टियोक क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में भी शिक्षक दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षक-शिक्षिकाओं को पेन, कॉपी, फूलों के गुलदस्ते और स्वयं तैयार की गई कलाकृतियां भेंट कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

कई विद्यालयों में सांस्कृतिक, रचनात्मक और अन्य गतिविधियों का आयोजन हुआ, जिनमें विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन कार्यक्रमों ने शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय संबंध को और मजबूत किया।

टियोक स्थित होली फ्लावर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी शिक्षक दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। यहां कक्षा सातवीं के छात्र आदित्य तुनवाल ने विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को अपनी ओर से मिठाई के पैकेट भेंट किए और उनका आशीर्वाद लिया।

मारवाड़ी सम्मेलन ने भी घर पहुंचकर किया गुरुजनों का अभिनंदन

इसी क्रम में मारवाड़ी सम्मेलन, टियोक शाखा ने भी शिक्षक दिवस को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए क्षेत्र के कई शिक्षकों के घर जाकर उनका अभिनंदन किया। संस्था के सदस्यों ने शिक्षकों को गमछा पहनाकर सम्मानित किया और उनसे आशीर्वाद लिया।

संस्था की इस पहल का उद्देश्य समाज में गुरुजनों के प्रति सम्मान की परंपरा को और मजबूत करना तथा नई पीढ़ी को अपने शिक्षकों के योगदान के प्रति कृतज्ञ रहने का संदेश देना रहा।

‘शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देते, जीवन की सही राह भी दिखाते हैं’

मारवाड़ी सम्मेलन, टियोक शाखा के सचिव बीजू कुमार तुनवाल ने कहा कि समाज निर्माण और नई पीढ़ी को सही दिशा देने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और जीवन की सही राह भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल, इंटरनेट और आधुनिक तकनीक ज्ञान के साधन जरूर हैं, लेकिन तकनीक कभी शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती। शिक्षक का सम्मान वास्तव में ज्ञान और संस्कार का सम्मान है।

टियोक के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में हुए कार्यक्रम

शिक्षक दिवस के अवसर पर टियोक ज्योति विद्यापीठ, टियोक हाई स्कूल और गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल सहित क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में भी विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों और शिक्षकों की सहभागिता ने पूरे क्षेत्र में शिक्षक दिवस को उत्सव का स्वरूप दिया।

आधुनिक दौर में भी गुरु-शिष्य परंपरा का मजबूत संदेश

टियोक में आयोजित इन कार्यक्रमों की खासियत यह रही कि शिक्षक दिवस का उत्सव विद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं रहा। साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं ने गुरुजनों के घर पहुंचकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया और समाज में उनके योगदान को रेखांकित किया।

गुरुजनों का घर-घर जाकर सम्मान करने की इस पहल ने संदेश दिया कि बदलते समय, डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक के बावजूद शिक्षक का स्थान समाज में विशिष्ट और सदैव सम्माननीय रहेगा। शिक्षक का सम्मान केवल एक व्यक्ति का अभिनंदन नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!