आसू की राज्य कार्यकारिणी बैठक में बड़े फैसले : सितंबर से नवंबर तक आंदोलन, शिक्षा, संस्कृति और असम के राष्ट्रीय मुद्दों पर राज्यव्यापी कार्यक्रम : गरीब विद्यार्थियों की पूरी तरह निःशुल्क नामांकन व्यवस्था की मांग : महंगाई के खिलाफ ‘आपूर्ति विभाग की शवयात्रा’, जर्जर सड़कों पर मानव श्रृंखला और ड्रग्स के खिलाफ निकलेगी जागरूकता रैली
भूपेन हजारिका की जयंती पर सामूहिक ‘मानुहे मानुहोर बाबे’, जुबिन गर्ग की पुण्यतिथि पर गूंजेगा ‘मायाबिनी’ : नवंबर के अंत में दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी

गुवाहाटी, 1 सितंबर : ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) की राज्य कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को गुवाहाटी के उजानबाजार स्थित विवेकानंद केंद्र के सभाकक्ष में आयोजित हुई। आसू के केंद्रीय अध्यक्ष उत्पल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में आसू के मुख्य सलाहकार डॉ. समुज्ज्वल भट्टाचार्य सहित केंद्रीय समिति के सभी पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
आसू महासचिव समीरन फुकन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बैठक में राज्य के छात्र समुदाय से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ असम के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जीवन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही संगठन ने आगामी महीनों के लिए आंदोलनात्मक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तय की।
बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार सितंबर से नवंबर तक आसू राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कई कार्यक्रम आयोजित करेगा। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए पूर्णतः निःशुल्क नामांकन, आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, जर्जर राष्ट्रीय राजमार्ग एवं सड़कें, नशे की समस्या, असमिया भाषा-संस्कृति, असम समझौते का क्रियान्वयन, मूल निवासियों के संवैधानिक सुरक्षा कवच तथा बाढ़ और कटाव की समस्या जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता दी गई है।

गरीब विद्यार्थियों के लिए सभी स्तरों पर पूर्णतः निःशुल्क नामांकन की मांग
बैठक के निर्णय के अनुसार 1 सितंबर को आसू की ओर से असम के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर मांग की जाएगी कि राज्य सरकार की निःशुल्क नामांकन सुविधा के दायरे में आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को कॉलेजों में सभी स्तरों पर पूरी तरह नि:शुल्क प्रवेश दिया जाए।
यह मांग ऐसे समय उठाई गई है जब असम सरकार ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र में ‘प्रज्ञान भारती’ के तहत उच्च शिक्षा की Fee Waiver Scheme जारी रखी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक माता-पिता की सभी स्रोतों से वार्षिक आय 4 लाख रुपये से कम होने पर पात्र विद्यार्थियों के लिए सरकारी और प्रांतीयकृत उच्च शिक्षण संस्थानों में एचएस, स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश शुल्क, ट्यूशन फीस एवं अन्य नियमित संस्थागत शुल्क में छूट का प्रावधान है।
2 सितंबर को कॉलेज-विश्वविद्यालयों में हस्ताक्षर अभियान
आसू ने फैसला किया है कि 2 सितंबर को संगठन की कॉलेज और विश्वविद्यालय इकाइयां आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को सरकारी सुविधा के अनुरूप कॉलेजों के सभी स्तरों पर पूर्णतः निःशुल्क नामांकन देने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाएंगी।
विद्यार्थियों से एकत्र किए गए हस्ताक्षरों को मांगपत्र के साथ संबंधित शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों के माध्यम से राज्य सरकार को भेजा जाएगा। आसू इस अभियान के जरिए विद्यार्थियों की मांग को संस्थागत स्तर से सरकार तक पहुंचाने की तैयारी में है।

3 सितंबर को महंगाई के खिलाफ ‘आपूर्ति विभाग की शवयात्रा’
आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर आसू ने आंदोलन और तेज करने का निर्णय लिया है। 3 सितंबर को राज्य की सभी आंचलिक छात्र इकाइयां मूल्यवृद्धि नियंत्रित करने में आपूर्ति विभाग की कथित विफलता के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से ‘आपूर्ति विभाग की शवयात्रा’ निकालेंगी।
यह कार्यक्रम आसू के हालिया महंगाई विरोधी आंदोलन की अगली कड़ी होगा। 27 अगस्त को संगठन ने राज्यव्यापी आह्वान पर विभिन्न जिला मुख्यालयों में आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया था। गुवाहाटी में भी उजानबाजार स्थित आसू मुख्यालय से विरोध मार्च निकाला गया था, जबकि डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया सहित दूसरे जिलों में भी प्रदर्शन हुए।
8 सितंबर को सुधाकंठ भूपेन हजारिका को विशेष श्रद्धांजलि
सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका की जयंती के अवसर पर 8 सितंबर को आसू सभी जिला मुख्यालयों में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करेगा। सुबह श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रत्येक जिला मुख्यालय में 100 प्रतिभागी एक साथ प्रसिद्ध गीत ‘मानुहे मानुहोर बाबे’ का सामूहिक गायन करेंगे।
शाम को दीप प्रज्वलित कर सुधाकंठ को श्रद्धांजलि दी जाएगी। गुवाहाटी में केंद्रीय स्तर पर पूर्व वर्षों की तरह ‘उद्दीपना’ शीर्षक से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

11 सितंबर को जर्जर सड़कों के खिलाफ ‘मानव श्रृंखला’
असम के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्गों समेत अन्य सड़कों की खराब स्थिति को भी आसू ने प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ने जर्जर राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य सड़कों की तत्काल मरम्मत की मांग को लेकर 11 सितंबर को सभी जिला छात्र इकाइयों के माध्यम से ‘मानव श्रृंखला’ बनाने का फैसला किया है।
15 सितंबर को ड्रग्स विरोधी जागरूकता रैली
युवा पीढ़ी में नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे के खिलाफ 15 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों में आसू की ओर से ड्रग्स विरोधी जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इसके जरिए विद्यार्थियों, युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

19 सितंबर को जुबिन गर्ग की पुण्यतिथि पर सामूहिक रूप से गूंजेगा ‘मायाबिनी’
असम के दिवंगत लोकप्रिय गायक एवं सांस्कृतिक प्रतीक जुबिन गर्ग की पुण्यतिथि 19 सितंबर को आसू पूरे राज्य में विशेष रूप से मनाएगा। प्रत्येक जिला मुख्यालय में आम जनता को एकत्र कर सामूहिक रूप से ‘मायाबिनी’ गीत प्रस्तुत किया जाएगा और जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
जुबिन गर्ग का 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में निधन हुआ था। उनके निधन के बाद पूरे असम में अभूतपूर्व शोक देखा गया था और आसू ने भी लताशील मैदान सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए थे।
3 अक्टूबर को असमिया भाषा के ‘शास्त्रीय भाषा’ गौरव का उत्सव
आसू ने 3 अक्टूबर को गुवाहाटी में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा (Classical Language) का दर्जा दिए जाने की ऐतिहासिक उपलब्धि का दिवस मनाने का निर्णय लिया है।
उल्लेखनीय है कि 3 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असमिया के साथ मराठी, पाली, प्राकृत और बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार के अनुसार यह मान्यता इन भाषाओं की प्राचीन साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण एवं प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

5 से 10 अक्टूबर के बीच आसू के संविधान के 60 वर्ष पर विशेष आयोजन
5 से 10 अक्टूबर के बीच गुवाहाटी में ‘सदौ असम छात्र संस्था के संविधान अंगीकरण के 60 वर्ष’ शीर्षक से वर्षभर चलने वाले कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा।
आसू के संविधान को 8 अगस्त 1967 को तेजपुर सम्मेलन में अंगीकृत किया गया था। संगठन ने अगस्त 2026 में इसके 60वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर राज्यभर में 60 दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम आयोजित किया था। उस समय ऊपरी असम में गंभीर बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बड़े कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया था। संगठन ने तब परिस्थितियां सामान्य होने के बाद वर्षभर के कार्यक्रम घोषित करने की बात कही थी।
नवंबर के अंत में दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी
राज्य कार्यकारिणी ने असम के दीर्घकालिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को देश की राजधानी में उठाने का भी निर्णय लिया है। नवंबर के अंतिम हिस्से में नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने की योजना बनाई गई है।
इस संगोष्ठी में असम के मूल निवासियों को संवैधानिक सुरक्षा कवच प्रदान करने, असम समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा असम की बाढ़ और नदी कटाव की समस्या को राष्ट्रीय समस्या के रूप में स्वीकार कर स्थायी समाधान निकालने जैसे विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की जाएगी।
असम समझौते की धारा-6 में असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषायी पहचान तथा विरासत की रक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए उपयुक्त संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह मुद्दा लंबे समय से आसू की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है।
छात्र हित से राष्ट्रीय मुद्दों तक व्यापक रणनीति
राज्य कार्यकारिणी की इस बैठक से स्पष्ट है कि आसू ने आगामी महीनों के लिए केवल छात्र हितों तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा, महंगाई, सड़क एवं आधारभूत संरचना, नशामुक्ति, भाषा-संस्कृति और असम के दीर्घकालिक राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों को एक साथ अपनी कार्ययोजना में शामिल किया है।
आसू के महासचिव समीरन फुकन की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार सितंबर में संगठन का जोर राज्यव्यापी जन-जागरूकता और आंदोलनात्मक कार्यक्रमों पर रहेगा, अक्टूबर में भाषा और संगठन की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कार्यक्रम होंगे, जबकि नवंबर के अंत में असम के मूल निवासियों के संवैधानिक अधिकार, असम समझौते और बाढ़-कटाव जैसे मुद्दों को दिल्ली में राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास किया जाएगा।




