असम विधानसभा में बाढ़ पर महासंग्राम : डेस्क पर चढ़कर विरोध करने पर अखिल गोगोई पूरे दिन के लिए निलंबित : शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट की विनाशकारी बाढ़ पर सभास्थगन प्रस्ताव खारिज : मार्शलों ने विधायक को उठाकर सदन से बाहर निकाला
अखिल ने केंद्र से ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित कराने की मांग उठाई, सरकार पर वास्तविक स्थिति छिपाने और पीड़ितों को पर्याप्त राहत नहीं देने का आरोप

न्यूज डेस्क, 23 जुलाई : असम विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन गुरुवार को ऊपरी असम की विनाशकारी बाढ़ को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। शिवसागर के विधायक और रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई को सदन की कार्यवाही बाधित करने और अपनी डेस्क पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में पूरे दिन के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबन के आदेश के बाद विधानसभा के मार्शलों ने उन्हें सदन से उठाकर बाहर निकाल दिया।

बाढ़ पर तत्काल चर्चा चाहते थे अखिल गोगोई
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद अखिल गोगोई ने शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों में आई भीषण बाढ़ पर तत्काल चर्चा कराने के लिए सभास्थगन प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि इन तीनों जिलों में बाढ़ ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है और बड़ी संख्या में लोगों के घर, खेत, पशुधन तथा आजीविका प्रभावित हुई है।
उन्होंने हाथ जोड़कर विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास से बाढ़ की गंभीर स्थिति पर अपनी बात रखने की अनुमति देने का बार-बार आग्रह किया। हालांकि अध्यक्ष ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और कहा कि बजट संबंधी कार्यवाही तथा कटौती प्रस्तावों को रोककर सभास्थगन प्रस्ताव पर चर्चा नहीं कराई जा सकती। अध्यक्ष ने उन्हें यह मुद्दा किसी अन्य संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से उठाने की सलाह दी।
डेस्क पर चढ़कर किया विरोध, सदन में लगे नारे
सभास्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद अखिल गोगोई ने अपना विरोध जारी रखा। पहले वह अपनी सीट पर खड़े होकर नारे लगाने लगे और बाद में डेस्क पर चढ़ गए। सदन में लगातार हंगामा और कार्यवाही बाधित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें शेष दिन के लिए निलंबित करने का आदेश दिया।
अखिल गोगोई ने निलंबन के बावजूद सदन से बाहर जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद विधानसभा के मार्शलों को बुलाया गया और उन्होंने विधायक को उठाकर सदन से बाहर निकाला। इस घटनाक्रम के कारण कुछ समय तक सदन का माहौल अत्यंत तनावपूर्ण बना रहा।
दो मिनट से अधिक बोलने पर अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
सदन में हुए विवाद के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अखिल गोगोई को दो मिनट तक अपनी बात रखने की अनुमति दी गई थी, लेकिन उन्होंने तय समय से अधिक बोलकर अध्यक्ष की ओर से दिए गए अवसर का दुरुपयोग किया।
रिपोर्टों के अनुसार, अध्यक्ष ने इस दौरान अखिल गोगोई के आचरण को लेकर ‘विश्वासघात’ से जुड़ी टिप्पणी भी की। इस पर विधायक शेरमान अली ने आपत्ति जताई और विवादित शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। हालांकि अध्यक्ष ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की।
एक दिन पहले कांग्रेस का प्रस्ताव भी हुआ था खारिज
ऊपरी असम की बाढ़ का मुद्दा बुधवार को भी विधानसभा में छाया रहा था। कांग्रेस विधायकों ने प्रश्नकाल के बाद बाढ़ की स्थिति पर विस्तृत चर्चा कराने के लिए सभास्थगन प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन उसे भी अध्यक्ष ने अस्वीकार कर दिया था।
सरकार की ओर से सदन में कहा गया कि ऊपरी असम में आई बाढ़ का स्वरूप असाधारण है और कई प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कई दशकों—लगभग 60 वर्षों—के दौरान ऐसी स्थिति नहीं देखी गई। प्रशासन भी बाढ़ के अचानक बढ़े पैमाने और व्यापक विनाश से अचंभित है।
‘राष्ट्रीय आपदा घोषित कराने के लिए केंद्र को भेजा जाए प्रस्ताव’
अखिल गोगोई ने मांग की कि असम विधानसभा को ऊपरी असम की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कराने के लिए केंद्र सरकार के पास औपचारिक प्रस्ताव भेजना चाहिए। उनका कहना था कि शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में सामान्य राहत व्यवस्था से हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से हजारों परिवारों के घर और घरेलू सामान नष्ट हो गए हैं। धान एवं अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, पशुधन बह गया है और स्थानीय बाजारों तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पानी घुसने से कारोबार लगभग ठप हो गया है।
नाज़िरा में 28 शव मिलने का किया दावा
अपने संबोधन में अखिल गोगोई ने दावा किया कि नाज़िरा क्षेत्र से अब तक 28 शव बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि इस संख्या की अलग से कोई स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसे विधायक द्वारा सदन और मीडिया के समक्ष किया गया दावा माना जाना चाहिए।
विभिन्न सरकारी और मीडिया अपडेटों के अनुसार, 23 जुलाई तक पूरे असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 41 बताई गई थी। ऐसे में अकेले नाज़िरा से 28 शव मिलने के दावे की प्रशासनिक स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मीडिया से बोले—‘सरकार बाढ़ की सच्चाई छिपाना चाहती है’
सदन से निकाले जाने के बाद अखिल गोगोई ने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें विधानसभा में बाढ़ की वास्तविक स्थिति रखने का अवसर नहीं दिया गया।
अखिल गोगोई ने कहा कि मैं बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठाने के लिए विधानसभा आया था। प्रभावित लोगों को अब तक पर्याप्त राहत और सहायता नहीं मिली है, लेकिन सरकार वास्तविक स्थिति को सामने नहीं आने देना चाहती। जब मैंने पीड़ितों का मुद्दा उठाया तो मुझे निलंबित कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहत सामग्री का वितरण सभी प्रभावित इलाकों में समान रूप से नहीं हो रहा और कई दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां तथा पशुओं के लिए चारा पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाया है।
9 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 1,800 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा द्वारा 23 जुलाई को साझा की गई जानकारी के अनुसार, असम के 25 जिलों के 1,800 से अधिक गांवों में नौ लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए। राज्य में 41 लोगों की मौत होने और करीब 70 से 80 लोगों के लापता होने की जानकारी भी दी गई। हजारों मवेशियों के बहने या मारे जाने की आशंका जताई गई है।
राज्य में 148 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए गए, जिनमें करीब 30 हजार लोगों ने शरण ली। सरकार के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित जिलों में तीन लाख किलोग्राम से अधिक चावल और अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जा चुकी है। भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और राज्य प्रशासन की टीमें नाव तथा हेलीकॉप्टरों से राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
असामान्य बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों के पानी ने बढ़ाई तबाही
सरकार ने बाढ़ के पीछे ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बादल फटने जैसी घटनाओं और सामान्य से अत्यधिक बारिश को प्रमुख कारण बताया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में स्थानीय वर्षा सामान्य से करीब 436 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई, जिससे ऐसे गांव भी जलमग्न हो गए जहां हाल के दशकों में इस स्तर की बाढ़ नहीं देखी गई थी।
नागालैंड और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश से नदियों में अचानक पानी बढ़ा और इसका सबसे गंभीर प्रभाव शिवसागर, चराइदेव तथा जोरहाट के निचले इलाकों पर पड़ा।
दिसांग नदी ने तोड़ा 1998 का रिकॉर्ड
बाढ़ की अभूतपूर्व गंभीरता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि शिवसागर जिले के नांगलामोराघाट में दिसांग नदी का जलस्तर 96.52 मीटर तक पहुंच गया। इसने सितंबर 1998 में दर्ज 96.49 मीटर के पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को भी पार कर दिया।
केंद्रीय जल आयोग के बुलेटिन के अनुसार, दिखौ नदी भी शिवसागर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। राज्य के कई अन्य निगरानी केंद्रों पर ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां चेतावनी अथवा खतरे के स्तर के ऊपर दर्ज की गईं।
सेना और वायुसेना से मांगी गई सहायता
बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के बाद राज्य सरकार ने भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना को राहत तथा निकासी अभियानों के लिए तैयार रहने का अनुरोध किया था। वरिष्ठ मंत्रियों को प्रभावित जिलों में भेजकर राहत कार्यों की निगरानी और प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार तक सहायता पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई।
बाद में वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से कई दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट किया गया और भोजन, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सामग्री एयरड्रॉप के माध्यम से पहुंचाई गई।
केंद्रीय टीम करेगी नुकसान का आकलन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से फोन पर असम की बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। केंद्र सरकार ने नुकसान के आकलन के लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल असम भेजने की बात कही है। यह दल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पुनर्वास, आजीविका की बहाली और केंद्रीय सहायता की आवश्यकता का आकलन करेगा।
बाढ़ के बीच विधानसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव
ऊपरी असम की बाढ़ पर तत्काल चर्चा की विपक्ष की मांग और अध्यक्ष द्वारा लगातार दो दिनों तक सभास्थगन प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने से विधानसभा में राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आपदा की गंभीरता, मृतकों की वास्तविक संख्या और राहत वितरण की कमियों पर विस्तृत चर्चा से बच रही है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि प्रशासन अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा का पूरी क्षमता से सामना कर रहा है तथा सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया गया है। इन दावों और प्रतिदावों के बीच अखिल गोगोई का निलंबन अब बाढ़ प्रबंधन के साथ-साथ विधानसभा में विपक्ष की आवाज और संसदीय मर्यादा को लेकर भी नई राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।




