सुप्रीम कोर्ट में लंबित पुराने मामलों के जल्द निपटारे की बड़ी पहल : CJI न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने गठित कीं चार विशेष पीठें : दो विशेष पीठें सुनेंगी दीवानी और दो आपराधिक मामले; वर्षों से लंबित करीब 800 पुराने मामलों के त्वरित निस्तारण पर रहेगा फोकस
मुख्य न्यायाधीश बोले— नई रोस्टर व्यवस्था के तहत न्याय वितरण प्रणाली में जनता का विश्वास और मजबूत करना लक्ष्य

न्यूज डेस्क, 14 जुलाई : देश की सर्वोच्च अदालत में वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने चार विशेष डिवीजन बेंचों (Special Benches) का गठन किया है। इन विशेष पीठों का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से लंबित सबसे पुराने दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) मामलों की सुनवाई कर उनका तेजी से निपटारा करना है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने नई रोस्टर व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा कि मैंने जो नया रोस्टर तैयार किया है, उसमें तीन नहीं बल्कि चार विशेष पीठें नियुक्त की गई हैं। इनमें दो पीठें दीवानी मामलों की सुनवाई करेंगी और दो पीठें आपराधिक मामलों की। इन चारों पीठों का गठन विशेष रूप से पुराने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए किया गया है।

वर्षों पुराने मामलों पर रहेगा विशेष फोकस
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन के अनुसार, इन विशेष पीठों के समक्ष प्रारंभिक चरण में लगभग 800 सबसे पुराने लंबित मामलों को सूचीबद्ध किया जाएगा। इन मामलों की नियमित और निरंतर सुनवाई कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर समाप्त करने की योजना बनाई गई है, ताकि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पक्षकारों को शीघ्र राहत मिल सके।
न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ाना उद्देश्य
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस पहल का मूल उद्देश्य केवल लंबित मामलों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली (Justice Delivery System) में आम नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत करना भी है। उनका मानना है कि लंबे समय तक न्याय में देरी, न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है, इसलिए पुराने मामलों को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।
लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में अहम कदम
देश की न्यायपालिका लंबे समय से लंबित मामलों के भारी बोझ की चुनौती का सामना कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में सर्वोच्च न्यायालय ने पुराने मामलों के लिए अलग विशेष पीठों का गठन करने का निर्णय लिया है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे न केवल पुराने मामलों के निस्तारण की गति बढ़ेगी, बल्कि नियमित पीठों पर भी कार्यभार कम होगा और नए मामलों की सुनवाई भी अधिक सुचारु रूप से हो सकेगी।
न्यायिक सुधारों की श्रृंखला में एक और कदम
गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत अपने कार्यकाल में न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठा चुके हैं। चार विशेष पीठों का गठन भी उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करना और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना है।




