‘छह समुदायों का जनजातिकरण हर हाल में होना चाहिए’ – आटासू अध्यक्ष बसंत गोगोई का बड़ा बयान : संसद में चर्चा हो या न हो, सरकार को वादा निभाना ही होगा : जनजातिकरण में देरी पर आंदोलन की चेतावनी
शिवसागर में आटासू की प्रेस वार्ता: संवैधानिक बाधाएं दूर कर शीघ्र निर्णय लेने की मांग, मुख्यमंत्री से सकारात्मक पहल की उम्मीद

शिवसागर, 1 जुलाई : असम में छह समुदायों के लंबे समय से लंबित जनजातिकरण (एसटी दर्जा) के मुद्दे पर ऑल ताई आहोम स्टूडेंट्स यूनियन (आटासू) ने राज्य सरकार से शीघ्र और निर्णायक कदम उठाने की मांग की है। बुधवार को शिवसागर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आटासू के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत गोगोई ने कहा कि छह समुदायों का जनजातिकरण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि असम और असमिया समाज की पहचान, अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेती, तो आने वाले समय में असम की सड़कों पर फिर व्यापक जनआंदोलन देखने को मिलेगा।

जनजातिकरण पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके केंद्रीय मंत्री: आटासू
प्रेस वार्ता में बसंत गोगोई ने हाल ही में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम द्वारा दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातिकरण के मुद्दे पर उनकी ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक स्थिति सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि इससे छह समुदायों के लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और केंद्र सरकार को इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
चुनावी घोषणा-पत्र का वादा याद दिलाया
आटासू अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में छह समुदायों को जनजाति का दर्जा दिलाने का स्पष्ट वादा किया था। चुनाव के दौरान राज्य सरकार और भाजपा नेतृत्व ने भी इस मुद्दे पर सकारात्मक आश्वासन दिया था। इसलिए अब समय आ गया है कि सरकार अपने वादे को धरातल पर उतारे।
“असम और असमिया अस्मिता की रक्षा के लिए जरूरी है जनजातिकरण”
बसंत गोगोई ने कहा कि छह समुदायों का जनजातिकरण केवल किसी एक समाज की मांग नहीं है, बल्कि यह असम और असमिया अस्मिता की रक्षा से जुड़ा विषय है। उनका कहना था कि इन समुदायों की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक संरक्षण मिलना आवश्यक है और इसके लिए जनजातिकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री से सकारात्मक पहल की उम्मीद
प्रेस वार्ता में आटासू ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से अपेक्षा जताई कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक और व्यावहारिक कदम उठाएगी। संगठन ने कहा कि मुख्यमंत्री यदि इच्छाशक्ति दिखाएं तो लंबे समय से लंबित यह मामला आगे बढ़ सकता है।

एसटी (वी) नई व्यवस्था, सरकार को करना होगा व्यापक कार्य
बसंत गोगोई ने कहा कि एसटी (वी) का विषय अपेक्षाकृत नया है और इससे संबंधित कई प्रशासनिक तथा कानूनी पहलुओं पर सरकार को गंभीरता से कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जनजातिकरण की पूरी संवैधानिक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करना आवश्यक है।
मंत्री समूह की रिपोर्ट दिल्ली भेजे जाने का दावा
आटासू अध्यक्ष ने कहा कि छह समुदायों के जनजातिकरण से संबंधित मंत्री समूह (Group of Ministers) की रिपोर्ट पहले ही नई दिल्ली भेजी जा चुकी है। उनके अनुसार अब इस विषय पर तीन चरणों में विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इसे शीघ्र परिणाम तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है।
संसद में चर्चा से अधिक महत्वपूर्ण अंतिम निर्णय
बसंत गोगोई ने कहा कि आगामी संसद के मानसून सत्र में यह विषय उठता है या नहीं, यह सबसे बड़ा मुद्दा नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर छह समुदायों को जनजाति का दर्जा देने की प्रक्रिया को पूरा करें। उन्होंने कहा कि समाज केवल बहस नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहता है।
संवैधानिक बाधाएं जल्द दूर करने की मांग
आटासू ने सरकार से आग्रह किया कि जनजातिकरण की राह में यदि कोई संवैधानिक या कानूनी अड़चनें हैं, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। संगठन का कहना है कि वर्षों से लंबित इस मुद्दे को अब और टालना उचित नहीं होगा।
आंदोलन की चेतावनी
प्रेस वार्ता के अंत में बसंत गोगोई ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छह समुदायों के जनजातिकरण के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो असम की सड़कों पर फिर से व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छह समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए तैयार है।




