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मूसलाधार बारिश ने डुबा ऐतिहासिक शिवसागर शहर : कुछ घंटों की वर्षा में जलमग्न हुई सड़कें : घरों और दुकानों में घुसा पानी : ट्रैफिक पुलिसकर्मी फावड़ा लेकर नाले साफ करते आए नजर : जल निकासी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

नगर पालिका की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न : कृत्रिम बाढ़ से अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन : नागरिकों ने मांगा स्थायी और वैज्ञानिक समाधान

शिवसागर, 13 जून : असम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शिवसागर शहर में शनिवार सुबह हुई लगातार मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर नगर की जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया। कुछ ही घंटों की तेज बारिश के बाद शहर के अधिकांश हिस्से पानी में डूब गए और पूरा नगर कृत्रिम बाढ़ जैसी स्थिति से जूझता दिखाई दिया। सड़कों पर जलभराव, घरों और दुकानों में घुसे पानी तथा यातायात व्यवस्था के प्रभावित होने से आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

बारिश थमने के काफी समय बाद तक शहर के विभिन्न इलाकों में पानी जमा रहा, जिससे लोगों को आवागमन, व्यापारिक गतिविधियों और दैनिक कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान सामने आने वाली यह समस्या अब स्थायी स्वरूप लेती जा रही है, लेकिन इसके समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी और दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है।

शहर के प्रमुख इलाके बने जलभराव के केंद्र

मूसलाधार वर्षा के बाद सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में दौलमुख चाराली, आमोलापट्टी, एचसीबी रोड, सेंट्रल मार्केट क्षेत्र, बाबूपट्टी रोड, यमुना रोड, ओएनजीसी कॉलोनी तथा शहर के कई अन्य रिहायशी और व्यावसायिक इलाके शामिल रहे। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं और सड़क तथा नाले में अंतर कर पाना मुश्किल हो गया।

जलभराव के कारण दौलमुख चाराली जैसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र सहित सेंट्रल मार्केट बाजार क्षेत्र में दुकानों के सामने पानी जमा हो जाने से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। कई दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठानों में घुस रहे पानी को रोकने के लिए तत्काल अस्थायी इंतजाम करने पड़े।

निचले इलाकों में स्थिति और अधिक गंभीर रही, जहां पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया। कई परिवारों को घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। कुछ स्थानों पर लोगों को अपने घरों से पानी निकालने के लिए स्वयं प्रयास करना पड़ा।

कृत्रिम बाढ़ ने बढ़ाई नागरिकों की परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में जो स्थिति बनी, वह केवल प्राकृतिक वर्षा का परिणाम नहीं बल्कि खराब जल निकासी व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुई कृत्रिम बाढ़ है। नागरिकों का आरोप है कि कुछ घंटों की बारिश के बाद ही यदि शहर जलमग्न हो जाता है, तो यह नगर प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

लोगों का कहना है कि जलभराव के कारण बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी दिखाई देने लगीं, जिससे पैदल चलना तक मुश्किल हो गया। जलभराव वाले क्षेत्रों में दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने दिखाई जिम्मेदारी, खुद फावड़ा लेकर उतरे मैदान में

इस पूरी स्थिति के बीच एक ऐसा दृश्य भी सामने आया जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। जहां विभिन्न स्थानों पर जल निकासी की समस्या बनी हुई थी, वहीं एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी स्वयं फावड़ा लेकर सड़क किनारे नालों की सफाई करते दिखाई दिए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिसकर्मी ने पानी निकासी का रास्ता खोलने के लिए नाले में जमा कचरा और मिट्टी हटाने का प्रयास किया, ताकि सड़क पर जमा पानी तेजी से निकल सके। यह दृश्य देखते ही स्थानीय लोग उनकी सराहना करने लगे।

नागरिकों का कहना है कि जिस कार्य की जिम्मेदारी संबंधित निकाय और सफाई व्यवस्था की है, उस कार्य को एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी द्वारा किया जाना व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर भी पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा होने लगी।

नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बारिश के बाद उत्पन्न स्थिति को लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मानसून पूर्व नालों और जल निकासी मार्गों की समुचित सफाई नहीं की गई, जिसके कारण बारिश का पानी तेजी से बाहर नहीं निकल पाया।

निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई, जल निकासी चैनलों का रखरखाव और अवरोधों को हटाने का कार्य किया गया होता, तो शहर को इस प्रकार की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान होने के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं किए गए हैं। नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के बाद वही इलाके डूबते हैं और वही समस्याएं दोहराई जाती हैं।

दरिका नदी और जल निकासी तंत्र बना चिंता का विषय

स्थानीय लोगों के अनुसार शहर की जल निकासी व्यवस्था काफी हद तक दरिका नदी पर निर्भर है। शहर का अतिरिक्त पानी विभिन्न नालों के माध्यम से दरिका नदी में छोड़ा जाता है। लेकिन भारी वर्षा के दौरान जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, तब शहर का पानी तेजी से बाहर नहीं निकल पाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में केवल पारंपरिक जल निकासी प्रणाली पर्याप्त नहीं है। बढ़ते शहरीकरण, आबादी और निर्माण गतिविधियों को देखते हुए आधुनिक पंपिंग सिस्टम, अतिरिक्त जल निकासी चैनल तथा वैज्ञानिक ड्रेनेज प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

यमुना नाला परियोजना पर फिर उठे सवाल

शहर में जलभराव की ताजा स्थिति के बाद यमुना नाले की खुदाई और सफाई परियोजनाओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जल निकासी सुधार के नाम पर पिछले वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए और अब भी हो रहे हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।

लोगों का सवाल है कि यदि यमुना नाले के सुधार और सफाई कार्यों पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है, तो फिर शहर को बार-बार कृत्रिम बाढ़ जैसी स्थिति का सामना क्यों करना पड़ रहा है।

कई नागरिकों ने इस संबंध में तकनीकी समीक्षा और स्वतंत्र मूल्यांकन की मांग भी उठाई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि समस्या वास्तव में कहां है और किन कारणों से जल निकासी व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है।

2025 की बाढ़ की यादें फिर हुईं ताजा

ताजा जलभराव ने लोगों को वर्ष 2025 की रिकॉर्ड वर्षा की याद दिला दी। उस समय भी शिवसागर शहर के लगभग सभी वार्ड जलमग्न हो गए थे और अमोलापट्टी, बाबूपट्टी, ओएनजीसी कॉलोनी, दोलमुख चारिआली सहित अनेक क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे।

उस दौरान भी नागरिकों ने स्थायी समाधान की मांग की थी और प्रशासन ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था। लेकिन एक वर्ष बाद फिर से सामने आई समान स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों ने सुझाए दीर्घकालिक उपाय

शहरी विकास और जल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि शिवसागर की समस्या का समाधान केवल नालों की सफाई तक सीमित नहीं है। इसके लिए एक व्यापक और वैज्ञानिक जल निकासी मास्टर प्लान की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार शहर में वर्षाजल प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना, नालों का पुनर्विकास, अवैध अतिक्रमण हटाना, जल निकासी मार्गों का नियमित रखरखाव, पंपिंग स्टेशन स्थापित करना तथा जल निकासी नेटवर्क का आधुनिकीकरण समय की मांग है।

उनका कहना है कि यदि अभी भी दीर्घकालिक योजना पर गंभीरता से कार्य नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में बढ़ती वर्षा और शहरी विस्तार के कारण समस्या और गंभीर हो सकती है।

स्थायी समाधान की मांग तेज

ताजा घटनाक्रम के बाद नागरिकों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने प्रशासन तथा नगर पालिका से स्थायी समाधान की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के बाद राहत और सफाई कार्य शुरू करने के बजाय पहले से तैयारी और दीर्घकालिक योजना पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

नागरिकों का मानना है कि शिवसागर केवल एक नगर नहीं बल्कि असम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। ऐसे महत्वपूर्ण शहर को बार-बार कृत्रिम बाढ़ की समस्या से जूझते देखना चिंताजनक है।

जल निकासी व्यवस्था में व्यापक सुधार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता

शनिवार की मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि शिवसागर शहर की जल निकासी व्यवस्था को व्यापक सुधार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। कुछ घंटों की वर्षा के बाद शहर के प्रमुख बाजार, रिहायशी इलाके और सड़कें जलमग्न हो जाना इस बात का संकेत है कि वर्तमान व्यवस्था बढ़ते शहरी दबाव और अत्यधिक वर्षा की परिस्थितियों से निपटने में सक्षम नहीं है।

जहां एक ओर ट्रैफिक पुलिसकर्मी का फावड़ा लेकर नाले साफ करना कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा का उदाहरण बनकर सामने आया, वहीं दूसरी ओर यह दृश्य नगर की जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल भी खड़े कर गया। अब नागरिकों की निगाहें प्रशासन और नगर पालिका पर टिकी हैं कि क्या इस बार केवल आश्वासन मिलेगा या वास्तव में शिवसागर को कृत्रिम बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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