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गुवाहाटी के आर्य नगर विवाद पर असम में उबाल : “असमिया गो बैक” नारे और कथित हमले के आरोप से भड़का आक्रोश : आटासू, आसू, कृषक मुक्ति संग्राम समिति और वीर लाचित सेना ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

शिवसागर, 8 जून : गुवाहाटी के आर्य नगर क्षेत्र में एक असमिया व्यक्ति के साथ कथित मारपीट तथा “असमिया गो बैक” जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के आरोपों को लेकर राज्यभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विभिन्न छात्र, सामाजिक और क्षेत्रीय संगठनों ने इस घटना को असमिया समाज की अस्मिता, सम्मान और अस्तित्व पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

घटना को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों तक व्यापक चर्चा जारी है। कई संगठनों का कहना है कि यदि असम की राजधानी में ही असमिया लोगों को इस प्रकार अपमानित किया जाता है तो यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।

“असम में असमिया अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है” – बसंत गोगोई

ऑल ताई आहोम स्टूडेंट्स यूनियन (आटासू) के केंद्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष बसंत गोगोई ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि असम में असमिया समाज का अस्तित्व धीरे-धीरे संकट में पड़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले कार्बी आंगलोंग में “चाइनीज गो बैक” जैसे विवादित नारों को लेकर चर्चा हुई थी और अब गुवाहाटी के आर्य नगर में एक असमिया व्यक्ति के साथ कथित रूप से मारपीट तथा अपमानजनक व्यवहार किए जाने की खबर सामने आई है।

बसंत गोगोई ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में असमिया समाज के खिलाफ दादागिरी का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि राजधानी गुवाहाटी में ही असमिया लोगों को अपमानित किया जाएगा तो स्वयं को खीलंजिया हितैषी बताने वाली सरकार इस पर क्या कदम उठाएगी?

उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए।

आसू की चिंता : असमिया अस्मिता से समझौता नहीं

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) लंबे समय से असम समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन, खीलंजिया अधिकारों की सुरक्षा तथा असमिया भाषा-संस्कृति के संरक्षण की मांग उठाती रही है।

आसू के केंद्रीय महासचिव समीरन फुकन ने संगठन की विचारधारा के अनुरूप कहा कि असम की धरती पर असमिया समाज, भाषा, संस्कृति और खीलंजिया अधिकारों के खिलाफ किसी भी प्रकार का अपमान या हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि यदि घटना में लगाए गए आरोप सत्य हैं तो यह केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे असमिया समाज के सम्मान पर आघात है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

समीरन फुकन ने कहा कि असम में सभी समुदायों को शांतिपूर्वक रहने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी असमिया समाज का अपमान करने या जातीय सौहार्द बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

वीर लाचित सेना ने भी जताया आक्रोश

असमिया राष्ट्रवादी संगठन वीर लाचित सेना के केंद्रीय प्रशासनिक सचिव श्रृंखल चालिहा ने भी घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि असमिया समाज की अस्मिता, भाषा और अधिकारों पर किसी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या समूह ने वास्तव में असमिया समाज को अपमानित किया है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को दंडित करने की मांग की है।

कृषक मुक्ति संग्राम समिति का तीखा हमला

कृषक मुक्ति संग्राम समिति के केंद्रीय संगठन सचिव रितुमणि हजारिका ने भी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि आखिर किसके संरक्षण में बाहरी समुदाय के कुछ लोग असम की धरती पर इस प्रकार की दादागिरी करने का साहस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना से जुड़े कुछ नाम राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के रूप में चर्चा में हैं और यही कारण है कि अब तक कठोर कार्रवाई नहीं हुई है।

रितुमणि हजारिका ने कहा कि यदि किसी असमिया युवक के साथ वास्तव में मारपीट की गई है और “असमिया गो बैक” जैसे नारे लगाए गए हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे असमिया समाज का अपमान है।

उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।

सोशल मीडिया पर उबाल

घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने कथित “असमिया गो बैक” नारेबाजी की निंदा करते हुए इसे असमिया समाज के आत्मसम्मान पर हमला बताया है।

कई बुद्धिजीवियों, छात्र नेताओं, सांस्कृतिक कर्मियों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।

सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और राज्य सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है।

विभिन्न संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि असम की धरती पर किसी भी असमिया नागरिक का अपमान, उत्पीड़न अथवा “असमिया गो बैक” जैसे नारों के माध्यम से अस्मिता पर चोट पहुंचाने की कोशिश को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संगठनों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ शीघ्र और कठोर कानूनी कार्रवाई ही जनता का विश्वास बनाए रखने का एकमात्र रास्ता है।

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