श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली बटद्रवा थान में मारवाड़ी समाज की ऐतिहासिक सेवा : मारवाड़ी सम्मेलन नगांव महिला शाखा ने श्रद्धालुओं को समर्पित की ‘अमृत धारा’ शीतल पेयजल सेवा : दो अत्याधुनिक शीतल जल मशीनों का लोकार्पण, देशभर से आने वाले हजारों भक्तों और तीर्थयात्रियों को मिलेगी राहत
सेवा, श्रद्धा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनूठा संगम : भामाशाह दानदाताओं एवं समाजसेवियों का हुआ भव्य सम्मान

नगांव, 7 जून : असम की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैष्णव परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक बटद्रवा थान (बोरदुवा थान) में रविवार को एक प्रेरणादायी सामाजिक एवं धार्मिक सेवा कार्य का शुभारंभ हुआ। मारवाड़ी सम्मेलन, नगांव महिला शाखा द्वारा श्रद्धालुओं, वैष्णव भक्तों और तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए ‘अमृत धारा’ नामक शीतल पेयजल सेवा के अंतर्गत दो आधुनिक ठंडे पानी की मशीनें स्थापित कर जनता को समर्पित की गईं।

यह जनहितकारी पहल ऐसे समय में की गई है जब भीषण गर्मी के बीच प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु बटद्रवा थान पहुंच रहे हैं। अब उन्हें परिसर में सहज रूप से शीतल एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। समाज के लोगों ने इसे धर्म सेवा और मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।

आध्यात्मिक वातावरण में हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम का आयोजन बटद्रवा थान परिचालना समिति कार्यालय के सामने मुख्य मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, नाम-कीर्तन और दीप प्रज्वलन से हुई। बटद्रवा थान के मुख्य भक्तों और वैष्णव संतों ने धार्मिक विधि-विधान के साथ कार्यक्रम को शुभारंभ कराया। पूरे परिसर में हरिनाम संकीर्तन और हरिध्वनि की गूंज सुनाई दी, जिससे वातावरण भक्तिमय बन गया।

इसके बाद बटद्रवा थान परिचालना समिति के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद चंद्र दास ने शीतल पेयजल सेवा का विधिवत उद्घाटन किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भक्तों की सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है। धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान करना अत्यंत पुण्य का कार्य है। मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा ने जो सेवा कार्य किया है, वह समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।

नीतू पोद्दार ने बताया समाज सेवा का उद्देश्य
मारवाड़ी सम्मेलन नगांव महिला शाखा की अध्यक्षा नीतू पोद्दार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि मारवाड़ी समाज सदैव सेवा, सहयोग और मानव कल्याण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।
उन्होंने कहा कि बटद्रवा थान केवल असम का ही नहीं बल्कि पूरे देश के वैष्णव समाज की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शीतल जल सेवा आरंभ करना महिला शाखा के लिए सौभाग्य और गर्व का विषय है।
उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले जिला प्रशासन, थान परिचालना समिति, दानदाताओं और समाज के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

दो परिवारों ने दिवंगत परिजनों की स्मृति में दी सेवा
कार्यक्रम का भावनात्मक पक्ष यह रहा कि दोनों शीतल पेयजल मशीनें दो परिवारों द्वारा अपने दिवंगत परिजनों की पुण्य स्मृति में स्थापित करवाई गईं।
पहली मशीन स्वर्गीय हुलास चंद्र कनोई एवं स्वर्गीय कस्तूरी देवी कनोई की स्मृति में उनके पुत्र राजकुमार (राजू) कनोई, लीना कनोई तथा पौत्र अगस्त्य कनोई द्वारा प्रदान की गई।
वहीं दूसरी मशीन स्वर्गीय शंकरलाल पोद्दार एवं स्वर्गीय रेखा देवी पोद्दार की स्मृति में उनके पुत्र लक्की पोद्दार, रोशनी पोद्दार, पौत्र हेयांस पोद्दार तथा पौत्री हर्षिका पोद्दार द्वारा प्रायोजित की गई।
दोनों परिवारों को फूलम गमछा और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

अतिथियों का पारंपरिक सम्मान
समाजसेवी अरुण नागरका के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में बटद्रवा थान परिचालना समिति के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद दास, संयुक्त सचिव प्रांजल हजारिका, वित्त सचिव बदन कलिता, कार्यकारिणी सदस्य भागेंद्र महंत सहित समिति के पदाधिकारियों को महिला शाखा की ओर से पारंपरिक असमिया फूलम गमछा भेंट कर सम्मानित किया गया।
साथ ही पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के मंडलीय उपाध्यक्ष संजय गाड़ोदिया, सहायक मंत्री विकास अग्रवाल, नगांव शाखा के अध्यक्ष प्रमोद कोठारी, सलाहकार राधारमण खाटूवाला, संगठन मंत्री दिलीप अग्रवाल, चापरमुख शाखा के अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष मुकेश पोद्दार तथा अन्य गणमान्य लोगों का भी अभिनंदन किया गया।

थान प्रबंधन समिति ने जताया आभार
थान प्रबंधन समिति के संयुक्त सचिव प्रांजल हजारिका ने अपने संबोधन में कहा कि मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा और दानदाताओं द्वारा किया गया यह प्रयास समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी सभी सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग मिलकर बटद्रवा थान के विकास एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में योगदान दें।
वित्त सचिव बदन कलिता एवं कार्यकारिणी सदस्य भागेंद्र महंत ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे तीर्थस्थल के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

श्रद्धालुओं ने की सराहना
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों ने महिला शाखा के इस प्रयास की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु बटद्रवा थान आते हैं। गर्मी के मौसम में स्वच्छ और शीतल पेयजल की व्यवस्था यात्रियों के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध होगी।
श्रद्धालुओं ने इसे मारवाड़ी समाज और मारवाड़ी सम्मेलन नगांव महिला शाखा की “जनसेवा और धर्मसेवा का उत्कृष्ट संगम” बताया।

बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं महिला शाखा की सदस्याएं
कार्यक्रम में महिला शाखा की अध्यक्षा नीतू पोद्दार, उपाध्यक्ष शर्मिला माहेश्वरी एवं रिंकू गिंदड़ा, सचिव विनीता खाटूवाला, कोषाध्यक्ष संगीता दस्सानी, संयुक्त सचिव कुसुम सेठिया, सुमन बोथरा, सरला चांडक, अनीता आलमपुरिया, संतोष शर्मा, रितिका मोर, पूजा केजरीवाल, जूही मोर, दीपिका कनोई, मंजू शर्मा, रीता काबरा, लीना कनोई, पिंकी कनोई, जयश्री बोथरा, निशा गुप्ता सहित बड़ी संख्या में महिला सदस्याएं उपस्थित रहीं।

बटद्रवा थान : असम की वैष्णव संस्कृति का सबसे पवित्र तीर्थ
बटद्रवा थान का नाम असम के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। यह वही पावन भूमि है जहां महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव का जन्म वर्ष 1449 ईस्वी में हुआ था।

श्रीमंत शंकरदेव केवल एक संत ही नहीं बल्कि महान समाज सुधारक, कवि, नाटककार, दार्शनिक, संगीतज्ञ और एकशरण नामधर्म (एकसरण वैष्णव धर्म) के प्रवर्तक थे। उन्होंने असम में भक्ति आंदोलन को नई दिशा दी और सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरण तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सूत्रपात किया।
बटद्रवा में ही उन्होंने अपने जीवन के प्रारंभिक वर्षों में धर्म, साहित्य और समाज सुधार की नींव रखी। यहीं उन्होंने पहला नामघर और कीर्तनघर स्थापित किया, जो बाद में असम की वैष्णव संस्कृति की पहचान बन गया।

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
आज बटद्रवा थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
हर वर्ष यहां आयोजित होने वाले श्रीश्री शंकरदेव तिथि महोत्सव, जन्मोत्सव, रास उत्सव, दोल उत्सव तथा अन्य धार्मिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
असम के अलावा अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर का प्रमुख केंद्र
बटद्रवा थान असम सरकार के पर्यटन मानचित्र पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां आने वाले पर्यटक केवल धार्मिक दर्शन ही नहीं करते बल्कि असम की समृद्ध वैष्णव परंपरा, नामघर संस्कृति, सत्रीय परंपरा और शंकरदेव द्वारा स्थापित सांस्कृतिक मूल्यों को भी निकट से समझते हैं।
यह स्थान असम की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

सेवा और श्रद्धा का बना नया अध्याय
मारवाड़ी सम्मेलन, नगांव महिला शाखा द्वारा स्थापित ‘अमृत धारा’ शीतल पेयजल सेवा केवल दो मशीनों का उद्घाटन नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण है।
बटद्रवा थान जैसी ऐतिहासिक और पवित्र भूमि पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किया गया यह कार्य आने वाले वर्षों तक हजारों लोगों को लाभ पहुंचाएगा तथा समाज सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
इस पहल ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि जब समाज और धर्म एक साथ जनहित के लिए आगे बढ़ते हैं, तब सेवा का प्रत्येक कार्य वास्तव में एक पुण्य यज्ञ बन जाता है।




