मोरान समाज की शतायु मातृशक्ति राधा देवी मोर का निधन, शोक में डूबा समाज : 100 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस; सरलता, धर्मपरायणता और पारिवारिक संस्कारों से बनाई थी विशिष्ट पहचान : स्वर्गीय भगवानदासजी मोर की धर्मपत्नी थीं राधा देवी मोर; तीन पुत्रों सहित छोड़ गईं भरा-पूरा परिवार
शुक्रवार, 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे मोरानहाट स्थित निवास से निकलेगी अंतिम यात्रा; विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि

मोरानहाट, 17 सितंबर : मोरान समाज के लिए गुरुवार का दिन अत्यंत दुःखद रहा। समाज की धर्मपरायण, वरिष्ठ एवं सभी की आदरणीय मातृशक्ति श्रीमती राधा देवी मोर का गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही मोरानहाट सहित समाज के विभिन्न वर्गों में शोक की लहर व्याप्त हो गई। परिजनों, रिश्तेदारों, समाजबंधुओं तथा विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

राधा देवी मोर का लंबा जीवन पारिवारिक संस्कारों, धार्मिक आस्था, सादगी और आत्मीयता से जुड़ा रहा। समाज में उन्हें एक वरिष्ठ मातृशक्ति के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त था। उनके निधन को परिवार के साथ-साथ पूरे मोरान समाज के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
सरलता और धर्मपरायणता थी व्यक्तित्व की पहचान
श्रीमती राधा देवी मोर अपने सरल, सौम्य एवं धार्मिक व्यक्तित्व के कारण समाज के सभी वर्गों में अत्यंत सम्मानित थीं। जीवन के 100 वर्षों के लंबे सफर में उन्होंने परिवार को संस्कारों और आत्मीयता के सूत्र में बांधे रखा। परिवार और समाज के प्रति उनका स्नेह तथा आशीर्वाद उनसे जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता था।
उनकी जीवनशैली में सादगी और धार्मिक आस्था की स्पष्ट छाप दिखाई देती थी। परिवार के सदस्यों से लेकर समाज के लोगों तक, उन्हें आदर और सम्मान के साथ देखा जाता था। एक शतायु वरिष्ठ सदस्य के रूप में उनकी मौजूदगी स्वयं परिवार और समाज की कई पीढ़ियों को जोड़ने वाली कड़ी थी।
उनके निधन के बाद समाजबंधुओं ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका स्नेह, संस्कार और आशीर्वाद हमेशा स्मृतियों में जीवित रहेगा। उनका जाना केवल एक परिवार के वरिष्ठ सदस्य का निधन नहीं, बल्कि समाज की एक अनुभवी और सम्मानित मातृशक्ति का बिछोह है।
मोरान समाज में शोक की लहर, श्रद्धांजलि देने पहुंचे समाजबंधु
राधा देवी मोर के निधन की सूचना मिलते ही मोरान समाज में शोक का वातावरण बन गया। समाज के लोगों ने शोक-संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
समाजबंधुओं ने ईश्वर से प्रार्थना की कि परमात्मा दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा परिवार के सदस्यों को इस गहरे दुःख को सहन करने की शक्ति दें। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने भी उनके निधन पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
स्वर्गीय भगवानदासजी मोर की धर्मपत्नी थीं राधा देवी मोर
दिवंगत श्रीमती राधा देवी मोर, स्वर्गीय भगवानदासजी मोर की धर्मपत्नी थीं। अपने लंबे जीवनकाल में उन्होंने परिवार को स्नेह और संस्कारों के साथ आगे बढ़ाया। वे अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
उनके तीन पुत्र बनवारीलाल मोर, सांवरमल मोर और विजय कुमार मोर हैं। परिवार की कई पीढ़ियों के बीच उनका विशेष स्थान था। उनके निधन से परिवार के सदस्यों में गहरा शोक व्याप्त है। परिवार के लिए उनका जाना उस बुजुर्ग छांव के उठ जाने जैसा है, जिसके स्नेह और आशीर्वाद में कई पीढ़ियां आगे बढ़ीं।

शुक्रवार दोपहर 3 बजे निवास स्थान से निकलेगी अंतिम यात्रा
परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दिवंगत राधा देवी मोर की अंतिम यात्रा शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे मोरानहाट स्थित उनके निवास स्थान से प्रारंभ होगी।
अंतिम यात्रा में परिवारजनों और रिश्तेदारों के साथ बड़ी संख्या में समाजबंधुओं तथा सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों के शामिल होकर उन्हें अंतिम विदाई देने की संभावना है।
सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने जताया गहरा शोक
राधा देवी मोर के निधन पर मोरानहाट की अनेक प्रमुख सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मारवाड़ी सम्मेलन मोरानहाट शाखा, मारवाड़ी युवा मंच मोरानहाट शाखा, मोरान संगीतमय सुंदरकांड परिवार, अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन मोरानहाट शाखा, श्री राधाकृष्ण विवाह भवन समिति और मोरान मारवाड़ी फाउंडेशन न्यास सहित अनेक संस्थाओं ने दिवंगत मातृशक्ति को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इन संस्थाओं से जुड़े सदस्यों ने शोक-संतप्त मोर परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए कहा कि राधा देवी मोर जैसे वरिष्ठजनों का आशीर्वाद समाज की अमूल्य धरोहर होता है। उनके निधन से उत्पन्न रिक्तता को परिवार और समाज लंबे समय तक महसूस करेगा।
कई पीढ़ियों की स्मृतियों में जीवित रहेंगी राधा देवी मोर
100 वर्षों का जीवन अपने आप में कई पीढ़ियों, पारिवारिक परिवर्तनों और सामाजिक बदलावों का साक्षी होता है। राधा देवी मोर ने भी अपने लंबे जीवन में परिवार की अनेक पीढ़ियों को आगे बढ़ते देखा और उन्हें अपना स्नेह एवं आशीर्वाद दिया। यही कारण है कि उनके निधन का दुःख परिवार की सीमाओं से आगे बढ़कर पूरे समाज में महसूस किया जा रहा है।
समाज के लोगों के अनुसार, उनका शांत और सौम्य स्वभाव, धार्मिक आस्था तथा परिवार के प्रति समर्पण उन्हें हमेशा स्मरणीय बनाए रखेगा। वरिष्ठ मातृशक्ति के रूप में उन्होंने जिस स्नेह और संस्कार की विरासत छोड़ी है, वह परिवार की आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा और मार्गदर्शन का माध्यम बनी रहेगी।

‘आपका स्नेह, आशीर्वाद और संस्कार हमेशा हमारे साथ रहेगा’
राधा देवी मोर को श्रद्धांजलि देते हुए परिवार और समाज की भावनाओं को इन शब्दों में व्यक्त किया गया—“आपका स्नेह, आशीर्वाद और संस्कार हमेशा हमारे साथ रहेगा।” यह संदेश उनके लंबे जीवन और परिवार व समाज के साथ उनके आत्मीय संबंधों को अभिव्यक्त करता है।
मोरान समाज ने अपनी इस आदरणीय मातृशक्ति को नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हुए परमपिता परमेश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है। साथ ही ईश्वर से कामना की गई है कि वे पुण्यात्मा राधा देवी मोर को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक-संतप्त परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने का संबल और शक्ति प्रदान करें।




