शिवसागर में टीबी मरीजों के बेहतर उपचार और देखभाल की पहल—187 स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण : तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न—गर्भवती टीबी मरीजों के उपचार से लेकर TB Preventive Therapy तक पर विशेष फोकस : CHO, MPW, फार्मासिस्ट और चाय बागान स्वास्थ्यकर्मी हुए शामिल—जमीनी स्तर पर टीबी उपचार प्रबंधन को मजबूत करने की कवायद
NTEP असम और Jhpiego की संयुक्त पहल—डॉ. द्विजेन कोच ने आयोजन में निभाई विशेष भूमिका

शिवसागर, 16 सितंबर : शिवसागर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर समय-समय पर उठते रहे सवालों के बीच टीबी (क्षय रोग) मरीजों के उपचार, निगरानी और देखभाल को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। जिले में जमीनी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े कुल 187 स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया।

स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों के बीच सकारात्मक पहल
शिवसागर सिविल अस्पताल जिले के आम लोगों के लिए प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है। इसके बावजूद अस्पताल में लंबे समय से विभिन्न समस्याओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। करीब चार दशक पुराने इस अस्पताल में चिकित्सकों, चिकित्सा कर्मचारियों और नर्सिंग स्टाफ की कमी को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
आरोप लगते रहे हैं कि इन कमियों के कारण मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं हासिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के उन्नयन और जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग भी लगातार उठती रही है। इसी पृष्ठभूमि में टीबी मरीजों के उपचार प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
14 से 16 सितंबर तक चला तीन दिवसीय प्रशिक्षण
यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 14 से 16 सितंबर तक शिवसागर नगर चिकित्सा केंद्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम NTEP, असम और Jhpiego की संयुक्त पहल तथा NTEP, शिवसागर के सहयोग से आयोजित हुआ।
तीन दिनों तक चले प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य टीबी मरीजों के संपर्क में सीधे तौर पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को उपचार, निगरानी, जोखिम की पहचान और मरीज केंद्रित देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देना था।

Differentiated TB Care से Death Audit तक मिला प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को टीबी मरीजों के बेहतर प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें Differentiated TB Care, मृत्यु ऑडिट (Death Audit), गर्भवती टीबी मरीजों का उपचार और TB Preventive Therapy (TPT) प्रमुख रूप से शामिल रहे।
Differentiated TB Care के माध्यम से मरीज की स्थिति और उसकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार उपचार एवं देखभाल की रणनीति अपनाने पर जोर दिया गया। वहीं गंभीर मामलों में जोखिम की समय रहते पहचान और मरीजों की नियमित निगरानी से जुड़े पहलुओं पर भी स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया।
गर्भवती टीबी मरीजों की देखभाल पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण में गर्भवती टीबी मरीजों के उपचार और देखभाल से संबंधित विषय को भी विशेष महत्व दिया गया। स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसे मरीजों के उपचार प्रबंधन के दौरान आवश्यक सावधानियों और निगरानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही TB Preventive Therapy (TPT) के माध्यम से टीबी संक्रमण के जोखिम वाले लोगों में बीमारी की रोकथाम से संबंधित उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य टीबी मरीजों के उपचार तक सीमित रहने के बजाय संक्रमण की रोकथाम और समय पर हस्तक्षेप की व्यवस्था को मजबूत करना रहा।

187 स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
तीन दिवसीय कार्यक्रम में शिवसागर जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े कुल 187 स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया। इनमें कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO), मल्टी-पर्पज वर्कर (MPW), फार्मासिस्ट और चाय बागानों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे।
इन स्वास्थ्यकर्मियों का मरीजों और समुदाय के साथ सीधा संपर्क रहने के कारण उन्हें प्रशिक्षण में शामिल करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया। इससे टीबी की रोकथाम, मरीजों की पहचान, समय पर उपचार और नियमित देखभाल को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डॉ. सुब्रत दास और ज्योतिका तालुकदार रहे रिसोर्स पर्सन
14 सितंबर से शुरू हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में NTEP, असम के सलाहकार डॉ. सुब्रत दास और Jhpiego की वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ज्योतिका तालुकदार ने रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया।
दोनों विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों को टीबी उपचार और प्रबंधन से जुड़े तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान मरीजों की स्थिति का आकलन, जोखिम वाले मामलों की पहचान, उपचार की निगरानी तथा रोकथाम संबंधी उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
डॉ. द्विजेन कोच ने आयोजन में निभाई विशेष भूमिका
तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के आयोजन और इसके प्रभावी संचालन की दिशा में डॉ. द्विजेन कोच ने विशेष पहल और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया कि विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे कर्मचारियों को टीबी प्रबंधन की आवश्यक जानकारी व्यावहारिक रूप से उपलब्ध हो सके।
प्रशिक्षण के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल और क्षमता को मजबूत करते हुए जिले में टीबी मरीजों के लिए अधिक व्यवस्थित, संवेदनशील और प्रभावी उपचार एवं देखभाल व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
जमीनी स्तर पर टीबी प्रबंधन मजबूत करने की कोशिश
तीन दिवसीय कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य केवल स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीकी प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि टीबी मरीजों की पहचान से लेकर उपचार, नियमित निगरानी, गंभीर मामलों में जोखिम प्रबंधन और संक्रमण की रोकथाम तक पूरी व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करना रहा।
CHO, MPW, फार्मासिस्ट और चाय बागान क्षेत्रों के स्वास्थ्यकर्मियों की भागीदारी के जरिए टीबी मरीजों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया गया। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी और कौशल का इस्तेमाल स्वास्थ्यकर्मी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में करते हुए टीबी मरीजों की बेहतर देखभाल और उपचार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।




