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गुवाहाटी में श्रीमद् भागवत कथा को भव्य स्वरूप देने की तैयारी तेज—विप्र फाउंडेशन असम जोन-8 की महत्वपूर्ण बैठक में बनी विस्तृत कार्ययोजना : 17 से 23 दिसंबर 2026 तक गुवाहाटी गौशाला के वृंदावन गार्डन में होगा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव—प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक कथा : भगवती भद्रकाली शक्तिपीठ, राजलदेसर के पीठाधीश्वर श्रीमद् दण्डी स्वामी शिवेंद्राश्रम जी महाराज करेंगे श्रीमद् भागवत कथा का अमृतमय प्रवचन

राजकुमार शर्मा और हरेन महंतो सपत्नीक होंगे मुख्य यजमान—देशभर से विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों को आमंत्रित करने का निर्णय : श्रद्धालुओं की बैठने से लेकर प्रसाद-भोजन, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और चिकित्सा तक हर व्यवस्था पर मंथन—अलग-अलग टीमों को सौंपी जाएंगी जिम्मेदारियां

कथा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता, संस्कार, सामाजिक एकता और सेवा भावना को मजबूत करने का माध्यम बनाने का संकल्प

गुवाहाटी, 23 सितंबर : श्रद्धा, भक्ति, अध्यात्म और सामाजिक एकता के संदेश के साथ विप्र फाउंडेशन असम, जोन-8, गुवाहाटी चैप्टर की ओर से प्रस्तावित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा को भव्य, सुव्यवस्थित और व्यापक सामाजिक सहभागिता वाला आयोजन बनाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आगामी 17 से 23 दिसंबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक महोत्सव की तैयारियों को लेकर विप्र फाउंडेशन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समाजबंधुओं ने आयोजन के प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलू पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक में कथा के धार्मिक स्वरूप के साथ आयोजन स्थल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के बैठने की सुविधा, संत-महात्माओं एवं अतिथियों के स्वागत, प्रसाद एवं भोजन, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, स्वयंसेवक प्रबंधन और व्यापक प्रचार-प्रसार तक विभिन्न विषयों को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी। पदाधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समय रहते सभी जिम्मेदारियां निर्धारित कर तैयारियां पूरी की जाएं, जिससे सात दिवसीय कथा महोत्सव को अनुशासित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके।

17 से 23 दिसंबर तक सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 17 दिसंबर से 23 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। सात दिवसीय कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया है।

कथा का आयोजन वृंदावन गार्डन, गुवाहाटी गौशाला में प्रस्तावित है। विप्र फाउंडेशन असम, जोन-8, गुवाहाटी चैप्टर इस आयोजन को व्यापक धार्मिक एवं सामाजिक स्वरूप देने की दिशा में काम कर रहा है।

आयोजकों का प्रयास है कि सात दिनों तक चलने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत के आध्यात्मिक संदेश से जोड़ने के साथ परिवार, समाज और नई पीढ़ी के बीच संस्कार एवं भारतीय धार्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बने।

दण्डी स्वामी शिवेंद्राश्रम जी महाराज करेंगे कथा का अमृतमय प्रवचन

श्रीमद् भागवत कथा के व्यास के रूप में भगवती भद्रकाली शक्तिपीठ, राजलदेसर के पीठाधीश्वर श्रीमद् दण्डी स्वामी श्री शिवेंद्राश्रम जी महाराज अपनी अमृतमयी वाणी से श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराएंगे।

सात दिनों तक श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत के विभिन्न प्रसंगों, भक्ति, धर्म, अध्यात्म और जीवन मूल्यों से जुड़े संदेशों को सुनने का अवसर मिलेगा। आयोजन को इस प्रकार व्यवस्थित करने की योजना बनाई जा रही है कि अधिक से अधिक श्रद्धालु कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक वातावरण का लाभ प्राप्त कर सकें।

राजकुमार शर्मा और हरेन महंतो सपत्नीक होंगे मुख्य यजमान

बैठक में जानकारी दी गई कि आगामी श्रीमद् भागवत कथा में राजकुमार शर्मा और हरेन महंतो सपत्नीक मुख्य यजमान के रूप में सहभागिता करेंगे।

कथा से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य परंपरागत कार्यक्रमों को धार्मिक मर्यादा, श्रद्धा एवं गरिमा के अनुरूप संपन्न कराने पर भी विचार-विमर्श किया गया। आयोजकों का प्रयास रहेगा कि कथा महोत्सव की प्रत्येक धार्मिक गतिविधि परंपराओं के अनुरूप संपन्न हो और श्रद्धालुओं को भक्तिमय एवं सुव्यवस्थित वातावरण प्राप्त हो।

विस्तृत कार्ययोजना पर हुआ विचार-विमर्श

महत्वपूर्ण बैठक में कथा के आयोजन से जुड़े छोटे-बड़े सभी पहलुओं पर चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने आयोजन की सफलता के लिए तैयारियों को अलग-अलग चरणों में पूरा करने और प्रत्येक महत्वपूर्ण व्यवस्था के लिए जिम्मेदार पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक निर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि इतने बड़े आयोजन की सफलता केवल किसी एक व्यक्ति या समिति की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और समाजबंधुओं के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक होगा।

इसी उद्देश्य से अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग टीमों के गठन और उनके बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी।

संत-महात्माओं और विशिष्ट अतिथियों के भव्य स्वागत की तैयारी

श्रीमद् भागवत कथा में संत-महात्माओं, विशिष्ट अतिथियों और देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए उनके भव्य स्वागत एवं आतिथ्य की व्यवस्था को भी बैठक में प्रमुखता दी गई।

अतिथियों के आगमन, स्वागत, आयोजन स्थल तक पहुंचने और कार्यक्रम के दौरान आवश्यक समन्वय के लिए अलग जिम्मेदारियां निर्धारित करने पर विचार किया गया। आयोजकों का प्रयास रहेगा कि बाहर से आने वाले संत-महात्माओं, पदाधिकारियों, अतिथियों और समाजबंधुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

देशभर से विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों को बुलाने का निर्णय

बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक देशभर से विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों को गुवाहाटी में आयोजित होने वाली श्रीमद् भागवत कथा में आमंत्रित करना भी रहा।

आयोजकों का मानना है कि विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से संगठन के पदाधिकारियों एवं समाजबंधुओं की सहभागिता से कथा आयोजन को व्यापक स्वरूप मिलेगा। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय समाजबंधुओं को एक-दूसरे से मिलने और संगठनात्मक एवं सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी प्राप्त होगा।

बाहर से आने वाले पदाधिकारियों एवं अतिथियों की संभावित संख्या को ध्यान में रखते हुए उनके स्वागत तथा आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारी समय रहते करने पर भी बैठक में जोर दिया गया।

श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित बैठक व्यवस्था होगी प्राथमिकता

कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी की संभावना को देखते हुए आयोजन स्थल पर बैठने और कथा श्रवण की समुचित व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि कथा स्थल को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाए कि श्रद्धालुओं को प्रवेश, बैठने और बाहर निकलने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। वरिष्ठ नागरिकों तथा अन्य श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

भीड़ के दौरान आवागमन प्रभावित न हो, इसके लिए प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा स्वयंसेवकों की तैनाती जैसे विषयों को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया।

प्रसाद और भोजन व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी

सात दिवसीय धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और भोजन व्यवस्था भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल रहेगी। बैठक में प्रसाद एवं भोजन की तैयारी और वितरण को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया कि भोजन और प्रसाद वितरण के दौरान स्वच्छता, अनुशासन तथा श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके लिए पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी सौंपने पर विचार किया गया।

पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर रहेगा विशेष ध्यान

कथा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पेयजल एवं अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को भी आयोजन की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।

लगातार कई घंटे तक कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर चर्चा की गई, जिससे लोगों को कार्यक्रम के दौरान आवश्यक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें।

पार्किंग और यातायात प्रबंधन की अलग कार्ययोजना

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और अतिथियों के वाहनों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी विशेष मंथन किया गया।

बैठक में वाहनों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा कराने और आयोजन स्थल के आसपास अनावश्यक यातायात अवरोध से बचने के लिए स्वयंसेवकों की अलग टीम तैनात करने जैसे सुझाव सामने आए। पार्किंग से कथा स्थल तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीरता

आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की संभावित उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। कथा स्थल पर अनुशासन बनाए रखने, प्रवेश और निकास को व्यवस्थित रखने तथा आवश्यकता के अनुसार संबंधित व्यवस्थाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।

स्वयंसेवकों को अलग-अलग स्थानों पर जिम्मेदारी देकर भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया गया।

चिकित्सा सहायता की उपलब्धता पर भी चर्चा

कथा में वरिष्ठ नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आकस्मिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध रखने की आवश्यकता पर भी बैठक में चर्चा हुई।

आयोजकों ने कहा कि सात दिवसीय आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक स्वास्थ्य एवं सेवा व्यवस्थाओं की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

सेवा व्यवस्था के लिए तैयार होगी स्वयंसेवकों की टीम

श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने, व्यवस्थाओं को बनाए रखने और विभिन्न सेवा कार्यों में सहयोग के लिए समर्पित स्वयंसेवकों की टीम तैयार करने पर भी सहमति बनी।

स्वयंसेवकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर कथा स्थल पर सेवा व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। पंजीकरण अथवा सूचना सहायता, श्रद्धालुओं को बैठने में सहयोग, पेयजल, प्रसाद, पार्किंग और अन्य व्यवस्थाओं में स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की योजना है।

कथा के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर

बैठक में कथा आयोजन के व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने कहा कि कथा की जानकारी अधिक से अधिक समाजबंधुओं, परिवारों और श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए उपलब्ध प्रचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।

आयोजन की तिथि, समय, स्थान और कथा व्यास सहित आवश्यक जानकारी को समय रहते समाज तक पहुंचाने पर जोर दिया गया, जिससे इच्छुक श्रद्धालु पहले से अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकें।

अधिकतम सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित करने का लक्ष्य

विप्र फाउंडेशन का प्रयास रहेगा कि कथा में समाज के अधिक से अधिक परिवारों की भागीदारी हो। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि कार्यक्रम को किसी सीमित दायरे का आयोजन न बनाकर व्यापक सामाजिक सहभागिता के साथ संपन्न किया जाए।

आयोजकों ने समाजबंधुओं से परिवार सहित कथा में शामिल होने और आयोजन को सफल बनाने में अपनी क्षमता के अनुसार सेवा एवं सहयोग देने का आह्वान किया।

केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं—संस्कार और आध्यात्मिक जागरूकता का मंच

बैठक में उपस्थित समाजबंधुओं ने श्रीमद् भागवत कथा को केवल धार्मिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता, संस्कार, सामाजिक एकता और सेवा भावना को मजबूत करने के अवसर के रूप में लेने का संकल्प व्यक्त किया।

चर्चा के दौरान कहा गया कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और संस्कारों से जोड़ना महत्वपूर्ण है। श्रीमद् भागवत कथा जैसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन परिवारों और नई पीढ़ी को इन मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।

सामाजिक एकता को मजबूत करने का भी प्रयास

आयोजन के माध्यम से अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों के समाजबंधुओं को एक मंच पर लाने तथा उनके बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित सदस्यों ने सामूहिक सहभागिता को किसी भी सामाजिक आयोजन की सफलता का आधार बताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से कथा को ऐसा स्वरूप दिया जाए, जो धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी संदेश दे।

श्रद्धा, भक्ति और सेवा होगी आयोजन की मूल भावना

विप्र फाउंडेशन ने कथा आयोजन की मूल भावना के रूप में श्रद्धा, भक्ति और सेवा को केंद्र में रखने पर जोर दिया। बैठक में कहा गया कि कथा के दौरान प्रत्येक व्यवस्था में सेवा भावना दिखाई दे और आने वाले श्रद्धालुओं को आत्मीय वातावरण मिले।

कार्यकर्ताओं से अपनी जिम्मेदारियों को केवल आयोजन संबंधी कार्य न मानकर सेवा के रूप में निभाने का आह्वान किया गया। अनुशासन, समन्वय और सामूहिक सहयोग को कार्यक्रम की सफलता का आधार बनाने पर सहमति बनी।

अलग-अलग टीमों को सौंपी जाएंगी जिम्मेदारियां

कथा जैसे व्यापक आयोजन के सफल संचालन के लिए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपने का निर्णय लिया गया। स्वागत एवं आतिथ्य, कथा स्थल व्यवस्था, श्रद्धालु प्रबंधन, प्रसाद-भोजन, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा, चिकित्सा, सेवा तथा प्रचार-प्रसार जैसे कार्यों के लिए अलग-अलग व्यवस्था तैयार करने पर सहमति बनी।

प्रत्येक टीम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि किसी एक व्यवस्था में होने वाली आवश्यकता की जानकारी तत्काल संबंधित पदाधिकारियों तक पहुंच सके और उसका समाधान किया जा सके।

बैठक में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और समाजबंधु रहे उपस्थित

तैयारियों को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में राजकुमार शर्मा, शिवकुमार पारीक, अरविंद पारीक, अमित पारीक, राकेश भातरा, अनिल शर्मा, दयाराम गुर्जरगौड़, रवि सोती, रामनिरंजन झिकनाड़िया, पुखराज राजपुरोहित, प्रदीप पारीक, प्रभात शर्मा, रमेश पारीक, प्रतीक सोती, जय शर्मा, संजय पारीक, नरेश पांडिया, प्रभात पांडिया, अंकित दाधीच, आशीष पांडिया, अनिल शर्मा, महावीर पुरोहित, भैरव शर्मा तथा कौशल पुरोहित सहित अनेक समाजबंधु उपस्थित रहे।

बैठक में उपस्थित सदस्यों ने आयोजन से संबंधित अपने सुझाव साझा किए और कथा को सफल बनाने के लिए आपसी सहयोग एवं समन्वय से कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।

समाजबंधुओं से सहयोग और सहभागिता की अपील

बैठक के समापन पर विप्र फाउंडेशन की ओर से सभी समाजबंधुओं और श्रद्धालुओं से 17 से 23 दिसंबर तक आयोजित होने वाली श्रीमद् भागवत कथा में सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग की अपील की गई।

आयोजकों का प्रयास है कि सामूहिक सहयोग से कथा आयोजन को भव्य, अनुशासित, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायी स्वरूप दिया जाए। इसके माध्यम से जहां श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा के अमृतमय प्रवचन सुनने का अवसर मिलेगा, वहीं समाज में संस्कार, आध्यात्मिक चेतना, एकता, परस्पर सहयोग और सेवा भावना को मजबूत करने का संदेश भी प्रसारित होगा।

विप्र फाउंडेशन असम, जोन-8, गुवाहाटी चैप्टर ने समाजबंधुओं से आह्वान किया है कि वे परिवार सहित इस सात दिवसीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होकर कथा श्रवण करें तथा अपनी सहभागिता और सेवा के माध्यम से आयोजन को सफल बनाने में योगदान दें।

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