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असम के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण : डॉ. अनंत बोरगोहांई बने BARC के ‘आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट’ ; शिवसागर के डिमौ से देश के शीर्ष परमाणु अनुसंधान संस्थान तक का प्रेरक सफर : उन्नत परमाणु रिएक्टर प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान

शिवसागर, 18 जुलाई : असम के लिए गर्व और सम्मान का एक ऐतिहासिक अवसर सामने आया है। शिवसागर जिले के डिमौ के कुशल पथ निवासी एवं प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अनंत बोरगोहांई को भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy – DAE) के अंतर्गत देश के अग्रणी परमाणु अनुसंधान संस्थान भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई में प्रतिष्ठित ‘आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट’ (Outstanding Scientist) पद पर पदोन्नत किया गया है। यह सम्मान परमाणु विज्ञान, उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक नेतृत्व तथा भारत के रणनीतिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में उनके लगभग तीन दशकों के असाधारण योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।

डिमौ से शुरू हुआ देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थान तक का सफर

डॉ. अनंत बोरगोहांई का जन्म असम के शिवसागर जिले के डिमौ में हुआ। वे स्वर्गीय गुणेंद्रनाथ बोरगोहांई एवं रेणु बोरगोहांई के सुपुत्र हैं। प्रारंभिक शिक्षा असम में प्राप्त करने के बाद उन्होंने असम इंजीनियरिंग कॉलेज (Assam Engineering College – AEC), गुवाहाटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके पश्चात उन्होंने महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MS University), बड़ौदा से एम.टेक. की उपाधि प्राप्त की।

वर्ष 1998 में उन्होंने वैज्ञानिक अधिकारी (Scientific Officer) के रूप में BARC में अपने वैज्ञानिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद से वे भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं तकनीकी विकास कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं।

योग्यता आधारित पदोन्नति से मिली सर्वोच्च वैज्ञानिक पहचान

BARC में वैज्ञानिकों की पदोन्नति Merit Based Promotion Scheme के तहत केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान, नवाचार और नेतृत्व क्षमता के आधार पर की जाती है। ‘आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट’ का पद संस्थान में वैज्ञानिक उत्कृष्टता की सर्वोच्च मान्यताओं में गिना जाता है। डॉ. बोरगोहांई की यह पदोन्नति उनके दीर्घकालिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में उत्कृष्ट योगदान का प्रमाण है।

अगली पीढ़ी की परमाणु रिएक्टर तकनीकों के विकास में निभाई अग्रणी भूमिका

डॉ. बोरगोहांई ने कॉम्पैक्ट हाई-टेम्परेचर रिएक्टर (Compact High Temperature Reactor – CHTR) तथा इंडियन मोल्टेन सॉल्ट ब्रीडर रिएक्टर (Indian Molten Salt Breeder Reactor – IMSBR) के लिए रिएक्टर कूलेंट प्रौद्योगिकी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने उच्च तापमान पर कार्य करने वाली कई अत्याधुनिक परीक्षण प्रणालियों का डिजाइन और विकास किया, जिनमें किलो टेम्परेचर लूप (Kilo Temperature Loop), लिक्विड मेटल लूप (Liquid Metal Loop) और मोल्टेन एक्टिव फ्लोराइड सॉल्ट लूप (Molten Active Fluoride Salt Loop) शामिल है।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि उन्होंने नेचुरल सर्कुलेशन टेस्ट फैसिलिटी (Natural Circulation Test Facility) का निर्माण किया तथा किलो टेम्परेचर लूप को सफलतापूर्वक 1,100 डिग्री सेल्सियस तक संचालित कर दिखाया। यह उपलब्धि भारत की उच्च तापमान परमाणु रिएक्टर प्रौद्योगिकी के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जाती है।

स्वदेशी कंप्यूटर कोड विकसित कर बढ़ाई भारत की तकनीकी क्षमता

डॉ. बोरगोहांई ने LeBENC (Lead Bismuth Natural Circulation) नामक एक स्वदेशी कंप्यूटर कोड भी विकसित किया है, जिसका उपयोग नेचुरल सर्कुलेशन (Natural Circulation) के अध्ययन एवं विश्लेषण के लिए किया जाता है।

इस कोड का सफल सत्यापन लीड-बिस्मथ यूटेक्टिक (LBE), पानी (Water) तथा मोल्टेन सॉल्ट (Molten Salt) जैसे विभिन्न कार्यशील माध्यमों पर आधारित परीक्षण प्रणालियों में किया जा चुका है। यह तकनीक भविष्य के सुरक्षित एवं अधिक दक्ष परमाणु रिएक्टरों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

उन्नत थर्मल-हाइड्रोलिक्स पर किया महत्वपूर्ण शोध

डॉ. बोरगोहांई ने होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट (HBNI) से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध एडवांस्ड थर्मल-हाइड्रोलिक्स (Advanced Thermal Hydraulics) तथा हाई टेम्परेचर हीट ट्रांसफर (High Temperature Heat Transfer) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा है, जो आधुनिक परमाणु रिएक्टरों की डिजाइन, सुरक्षा और कार्यक्षमता के लिए आधारभूत माने जाते हैं।

उनके शोध-पत्र अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं तथा विभिन्न वैज्ञानिक सम्मेलनों में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उनके अनुसंधान ने भारत के स्वदेशी उन्नत परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वैज्ञानिक उत्कृष्टता पुरस्कार से भी हो चुके हैं सम्मानित

डॉ. बोरगोहांई को उनके उत्कृष्ट अनुसंधान एवं नवाचार के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा Scientific & Technical Excellence Award से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके नेतृत्व में विकसित तकनीकों ने भारत की अगली पीढ़ी की परमाणु ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा प्रदान की है।

BARC : भारत के परमाणु कार्यक्रम की वैज्ञानिक रीढ़

मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग का प्रमुख बहु-विषयक अनुसंधान संस्थान है। यहां परमाणु ऊर्जा, उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकी, परमाणु ईंधन, रेडियोआइसोटोप, स्वास्थ्य, कृषि, सामग्री विज्ञान, रोबोटिक्स, सुपरकंप्यूटिंग तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनेक रणनीतिक अनुसंधान किए जाते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान में ‘आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट’ के पद पर पदोन्नति वैज्ञानिक उत्कृष्टता की सर्वोच्च उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।

असम के युवाओं के लिए प्रेरणा बने डॉ. बोरगोहांई

डॉ. अनंत बोरगोहांई की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का असम के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों ने हर्षपूर्वक स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि विज्ञान, इंजीनियरिंग और अनुसंधान के क्षेत्र में असम की बढ़ती वैज्ञानिक भागीदारी का सशक्त प्रमाण है।

डिमौ की धरती से निकलकर देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक संस्थानों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले डॉ. अनंत बोरगोहांई आज असम के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा, अनुशासन, कठोर परिश्रम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर वैश्विक स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। उनकी यह पदोन्नति आने वाली पीढ़ी के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का नया अध्याय सिद्ध होगी।

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