158 वर्षों बाद फिर खिला हिमालय का दुर्लभ ‘बैंगनी चमत्कार’ : अरुणाचल प्रदेश में मिला Cyananthus hookeri : भारतीय वनस्पति विज्ञान के इतिहास में दर्ज हुई ऐतिहासिक उपलब्धि : 1867 के बाद भारत में तवांग की चुना घाटी में 3,600 मीटर की ऊंचाई पर पहली बार मिला दुर्लभ हिमालयी पुष्प
वैज्ञानिकों ने की पुष्टि; संरक्षण और जैव विविधता के लिए मील का पत्थर साबित होगी खोज

न्यूज डेस्क, 13 जुलाई : भारत की हिमालयी जैव विविधता और वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। लगभग 158 वर्षों बाद दुर्लभ हिमालयी पुष्प Cyananthus hookeri (साइनैंथस हूकेरी) की भारत में पुनः खोज की गई है। यह दुर्लभ प्रजाति अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के मागो (Mago) गांव के निकट स्थित चुना घाटी (Chuna Valley) में लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर वैज्ञानिकों को मिली। वर्ष 1867 के बाद भारत में इस प्रजाति का यह पहला वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रिकॉर्ड है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश में भी इस दुर्लभ पौधे की यह पहली आधिकारिक पुष्टि मानी जा रही है।
वनस्पति वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज केवल एक दुर्लभ पौधे की पुनः प्राप्ति नहीं, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, जैव विविधता संरक्षण तथा भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने किया ऐतिहासिक पुनःअन्वेषण
इस दुर्लभ प्रजाति की खोज भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India – BSI) के वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 2025 में किए गए उच्च हिमालयी वनस्पति सर्वेक्षण के दौरान की गई। अनुसंधान दल में वैज्ञानिक सुभजीत लाहिड़ी और मोनालिसा दास शामिल थे, जिन्होंने डॉ. सुधांशु शेखर दाश के मार्गदर्शन में यह महत्वपूर्ण अध्ययन पूरा किया।
फील्ड सर्वेक्षण के बाद पौधों की आकृति, संरचना, पुष्पीय विशेषताओं, उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों तथा हर्बेरियम नमूनों का विस्तृत अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों द्वारा सत्यापन के उपरांत इस खोज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संरक्षण शोध पत्रिका Oryx में प्रकाशित किया गया, जिससे इसकी वैज्ञानिक प्रमाणिकता को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिली।
सर जोसेफ डाल्टन हूकर ने 1867 में किया था अंतिम भारतीय रिकॉर्ड
भारत में इस प्रजाति का अंतिम रिकॉर्ड वर्ष 1867 में प्रसिद्ध ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक सर जोसेफ डाल्टन हूकर द्वारा उनके सिक्किम अभियान के दौरान दर्ज किया गया था। हूकर को आधुनिक हिमालयी वनस्पति विज्ञान का अग्रणी वैज्ञानिक माना जाता है और उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप की हजारों वनस्पति प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया था।
इसके बाद लगभग डेढ़ शताब्दी तक भारत में Cyananthus hookeri का कोई प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हुआ। इसी कारण कई विशेषज्ञ इसे भारत में अत्यंत दुर्लभ अथवा स्थानीय स्तर पर विलुप्तप्राय मानने लगे थे। अरुणाचल प्रदेश में इसकी पुनः खोज ने इस धारणा को बदलते हुए भारत में इसकी निरंतर उपस्थिति की पुष्टि कर दी है।

पूर्वी हिमालय तक बढ़ा प्रजाति का ज्ञात वितरण क्षेत्र
वैज्ञानिकों के अनुसार इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इससे Cyananthus hookeri का ज्ञात भौगोलिक वितरण (Distribution Range) अब पूर्वी हिमालय के अरुणाचल प्रदेश तक विस्तारित हो गया है। इससे पहले भारत में इसका रिकॉर्ड केवल सिक्किम तक सीमित था।
यह खोज संकेत देती है कि पूर्वोत्तर भारत के दूरस्थ और दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अभी भी अनेक दुर्लभ वनस्पतियां वैज्ञानिक खोज की प्रतीक्षा कर रही हैं।
बैंगनी-नीले फूलों वाला आकर्षक अल्पाइन पौधा
Cyananthus hookeri वनस्पति परिवार Campanulaceae (Bellflower Family) का सदस्य है। यह एक छोटा, बहुवर्षीय अल्पाइन शाकीय पौधा है जिसकी पहचान इसके आकर्षक बैंगनी-नीले घंटीनुमा फूलों से होती है। इसके छोटे रोयेंदार पत्ते, जमीन से सटा हुआ विकास तथा कठोर पर्वतीय परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता इसे अन्य हिमालयी प्रजातियों से अलग बनाती है।
यह पौधा सामान्यतः अल्पाइन घास के मैदानों, पथरीली ढलानों तथा अत्यधिक ठंडे वातावरण में प्राकृतिक रूप से विकसित होता है, जहां तापमान लंबे समय तक शून्य के आसपास बना रहता है और बढ़ने का मौसम अत्यंत छोटा होता है।

50 से भी कम परिपक्व पौधे मिले
सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति के 50 से भी कम परिपक्व पौधों का रिकॉर्ड दर्ज किया। इतनी सीमित संख्या इस पौधे की अत्यधिक दुर्लभता और संवेदनशील स्थिति को दर्शाती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इसके प्राकृतिक आवास पर जलवायु परिवर्तन, पर्यटन, चराई या अन्य मानवीय गतिविधियों का दबाव बढ़ता है तो भविष्य में इस प्रजाति के अस्तित्व पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
‘Endangered’ घोषित करने की सिफारिश
सीमित आबादी, अत्यंत संकीर्ण वितरण क्षेत्र तथा संवेदनशील प्राकृतिक आवास को देखते हुए शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के मानकों के अनुरूप भारत में Cyananthus hookeri को ‘Endangered (संकटग्रस्त)’ श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इसके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह प्रजाति फिर से विलुप्ति के कगार पर पहुंच सकती है।

नेपाल, भूटान, तिब्बत और चीन में भी मिलती है यह दुर्लभ प्रजाति
वैज्ञानिकों के अनुसार Cyananthus hookeri का प्राकृतिक विस्तार नेपाल, भूटान, तिब्बत तथा चीन के कुछ ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों तक सीमित है। भारत में इसकी पुनः खोज न केवल इस वैश्विक प्रजाति के वितरण को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी, बल्कि हिमालयी देशों के बीच साझा संरक्षण प्रयासों को भी नई दिशा प्रदान करेगी।
अरुणाचल प्रदेश की जैव विविधता का फिर बढ़ा वैश्विक महत्व
अरुणाचल प्रदेश पहले ही भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले राज्यों में शामिल है। यहां घने वन, उच्च हिमालयी घास के मैदान, दुर्लभ औषधीय पौधे, ऑर्किड, रोडोडेंड्रॉन और अनेक स्थानिक (Endemic) प्रजातियां पाई जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नई खोज इस बात का प्रमाण है कि राज्य के अनेक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में अभी भी वैज्ञानिक अनुसंधान की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। नियमित वनस्पति सर्वेक्षण और आधुनिक अनुसंधान तकनीकों के माध्यम से भविष्य में कई अन्य दुर्लभ या लंबे समय से लुप्त मानी जाने वाली प्रजातियों की भी खोज संभव है।
जलवायु परिवर्तन अध्ययन में भी मिलेगी नई दिशा
वनस्पति वैज्ञानिकों के अनुसार Cyananthus hookeri जैसी उच्च हिमालयी प्रजातियां जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं। इसलिए इनकी वर्तमान स्थिति, वितरण और संख्या का अध्ययन भविष्य में हिमालयी क्षेत्रों पर बढ़ते तापमान, बदलते हिमपात और पारिस्थितिक परिवर्तनों के प्रभावों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऐतिहासिक खोज भारत में हिमालयी जैव विविधता संरक्षण को नई गति देगी और वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में आने वाले वर्षों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगी।




