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शिवसागर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फूटा आक्रोश—संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय का घेराव : जातीय संग्रामी सेना असम का जोरदार प्रदर्शन—सिविल अस्पताल में दो मेडिसिन विशेषज्ञों की नियुक्ति समेत सरकार के सामने रखीं 16 सूत्री मांगें : डॉक्टर, नर्स और तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पद भरने की मांग—रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और जनरल सर्जन की नियुक्ति पर भी जोर : अल्ट्रासाउंड के लिए 10–12 दिन का इंतजार खत्म करने, ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन सुविधा शुरू करने और मॉडल अस्पताल को 24 घंटे खोलने की मांग

कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग—समाधान नहीं होने पर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी

शिवसागर, 15 सितंबर : शिवसागर जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कथित अव्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर नहीं मिलने के मुद्दे को लेकर मंगलवार को जातीय संग्रामी सेना असम की शिवसागर जिला समिति ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के सौ से अधिक कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने शिवसागर जिला संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय का घेराव करते हुए जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक और तत्काल सुधार की मांग उठाई।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद करो” और “अस्पतालों में आवश्यक डॉक्टरों की नियुक्ति करो” जैसे नारे लगाए। संगठन का आरोप है कि जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरत के अनुरूप डॉक्टर, नर्स एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होने के कारण आम मरीजों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री को भेजा 16 सूत्री मांगपत्र

विरोध प्रदर्शन के बीच संगठन ने जिला आयुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा को 16 सूत्री मांगपत्र प्रेषित किया। ज्ञापन पर शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष रितुराज बरुवा, कार्यकारी अध्यक्ष लखी बोरा और सचिव रिदिप डेका के हस्ताक्षर हैं।

ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल और शिवसागर जिला आयुक्त मृदुल यादव को भी भेजी गई है। संगठन ने सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग से मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

1984 में स्थापित सिविल अस्पताल में सुविधाओं की कमी का आरोप

संगठन ने अपने ज्ञापन में कहा कि जयसागर स्थित शिवसागर सिविल अस्पताल की स्थापना वर्ष 1984 में जिले के लाखों लोगों, विशेषकर गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। संगठन का आरोप है कि इतने वर्षों बाद भी अस्पताल में मरीजों को अपेक्षित स्तर की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

पुरानी आधारभूत संरचना के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को संगठन ने प्रमुख समस्या बताया है। उसका कहना है कि इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है।

कम से कम दो मेडिसिन विशेषज्ञ नियुक्त करने की मांग

16 सूत्री मांगपत्र में सबसे प्रमुख मांगों में शिवसागर सिविल अस्पताल में कम से कम दो मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल नियुक्ति शामिल है। संगठन ने कहा कि मरीज लंबे समय से पर्याप्त मेडिसिन विशेषज्ञ सेवा से वंचित हैं और इस कमी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही अस्पताल में डॉक्टर, नर्स एवं अन्य तकनीकी कर्मचारियों के सभी आवश्यक रिक्त पद जल्द भरने तथा कम से कम एक रेडियोलॉजिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट और एक जनरल सर्जन नियुक्त करने की मांग की गई है।

दोपहर दो बजे के बाद एक डॉक्टर पर कई विभागों का भार होने का आरोप

संगठन ने अस्पताल की दोपहर बाद की चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उसका दावा है कि दोपहर दो बजे के बाद अस्पताल के दोनों भवनों में स्त्री एवं प्रसूति रोग, शिशु रोग, मेडिसिन, सर्जरी, अस्थि रोग और कैजुअल्टी समेत विभिन्न विभागों के मरीजों की चिकित्सा का भार एक ही चिकित्सक पर आ जाता है।

जातीय संग्रामी सेना ने इस व्यवस्था को मरीजों और चिकित्सकों दोनों के हित में उचित नहीं बताते हुए इसे तत्काल बदलने तथा प्रत्येक आवश्यक विभाग में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।

10–12 दिन का अल्ट्रासाउंड इंतजार खत्म करने पर जोर

अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था में सुधार भी संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल है। संगठन के अनुसार, वर्तमान में मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 10 से 12 दिन तक इंतजार करना पड़ता है। मांग की गई कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे जरूरतमंद मरीजों को प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा मिल सके और गंभीर मरीजों को लंबी प्रतीक्षा न करनी पड़े।

इसके अलावा अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं को मरीजों की संख्या एवं आवश्यकता के अनुरूप विकसित करने की मांग की गई है।

1.45 करोड़ की ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन सुविधा मरीजों के लिए शुरू करने की मांग

संगठन ने शिवसागर सिविल अस्पताल में करीब 1.45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार और अप्रैल में उद्घाटित ‘कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन’ व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। संगठन की मांग है कि इस सुविधा का वास्तविक लाभ तत्काल मरीजों को मिलना शुरू होना चाहिए।

संगठन का कहना है कि बड़ी राशि खर्च कर स्थापित की गई महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा यदि जरूरतमंद मरीजों के उपयोग में नहीं आती है तो उसके उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती। इसलिए इसके नियमित संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई।

रोग निगरानी टीम को अधिक सक्रिय करने की मांग

जटिल स्वास्थ्य समस्याओं एवं संक्रामक रोगों की निगरानी से जुड़ी Integrated Disease Surveillance Team को और प्रभावी एवं सक्रिय बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। संगठन ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों की समय पर पहचान और आवश्यक कार्रवाई के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया।

इसके साथ ही अस्पताल के कुछ कर्मचारियों के मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ व्यवहार को लेकर सामने आने वाली शिकायतों का उल्लेख करते हुए संबंधित कर्मचारियों को संवेदनशील एवं शिष्ट व्यवहार के लिए उचित प्रशिक्षण देने की मांग की गई है।

मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर जवाबदेही बढ़ाने की मांग

संगठन ने कहा कि समय-समय पर सोशल मीडिया पर भी कुछ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के मरीजों अथवा उनके परिजनों के साथ कथित व्यवहार को लेकर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। संगठन ने अस्पताल प्रशासन से ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्यकर्मियों में संवेदनशीलता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग की।

साथ ही सरकारी अस्पताल में आवश्यक रोग निदान जांच और दवाओं को नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था में कथित कमियों को दूर करने पर भी जोर दिया गया। संगठन का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों सहित प्रत्येक जरूरतमंद मरीज को सुलभ उपचार उपलब्ध कराना है।

मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग

जातीय संग्रामी सेना ने मरीजों, चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग भी उठाई। अस्पताल परिसर में नशीले पदार्थों और मादक सामग्रियों के कथित प्रचलन पर चिंता जताते हुए संगठन ने कहा कि ऐसी गतिविधियां मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा एवं अस्पताल के वातावरण के लिए चिंता का विषय हैं।

इसी क्रम में शिवसागर सिविल अस्पताल परिसर, अस्पताल के सामने और पूरे जयसागर क्षेत्र में कथित रूप से संचालित अवैध शराब की दुकानों एवं शराब के अड्डों को हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

पार्किंग व्यवस्था सुधारने और लेखा कर्मचारियों के स्थानांतरण की मांग

अस्पताल परिसर में वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग को भी संगठन ने एक बड़ी समस्या बताया। मरीजों, एंबुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही को सुचारु रखने के लिए पर्याप्त एवं सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है।

प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर संगठन ने जिले के प्रत्येक स्वास्थ्य खंड में कार्यरत लेखा कर्मचारियों का जिले के भीतर कम से कम प्रत्येक तीन वर्ष में स्थानांतरण किए जाने की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की।

मॉडल अस्पताल को 24 घंटे खोलने की मांग

जातीय संग्रामी सेना असम ने शिवसागर शहर के मध्य में लाखों रुपये की लागत से निर्मित मॉडल अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। संगठन का दावा है कि यहां फिलहाल सीमित सुविधाएं उपलब्ध हैं और दोपहर दो बजे के बाद सेवाएं बंद हो जाने के कारण शहरवासियों एवं जरूरतमंद मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती।

संगठन ने मांग की कि शिवसागर मॉडल अस्पताल को चौबीसों घंटे आम जनता के लिए खुला रखा जाए और वहां पर्याप्त डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, दवाएं तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे सामान्य बीमारी से लेकर आपात स्थिति तक शहर के लोगों को समय पर उपचार मिल सकेगा।

कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग

16वीं महत्वपूर्ण मांग के रूप में संगठन ने शिवसागर संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय और शिवसागर सिविल अस्पताल में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। संगठन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामने आने वाली शिकायतों की जांच आवश्यक है।

इसके साथ ही अस्पताल के कामकाज में कथित अनियमितताओं को समाप्त कर प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।

16 मांगों के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार पर जोर

संगठन की प्रमुख मांगों में दो मेडिसिन विशेषज्ञों की नियुक्ति, डॉक्टर-नर्स एवं तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पद भरना, रेडियोलॉजिस्ट-पैथोलॉजिस्ट-जनरल सर्जन की नियुक्ति, दोपहर बाद पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती, स्वच्छ पेयजल, ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन सुविधा का संचालन, प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड सुविधा, रोग निगरानी टीम को सक्रिय करना, स्वास्थ्यकर्मियों के व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना, कथित अनियमितताओं पर रोक, पार्किंग व्यवस्था, स्वास्थ्य खंडों के लेखा कर्मचारियों का नियमित स्थानांतरण, अवैध शराब के ठिकानों पर कार्रवाई, मॉडल अस्पताल को 24 घंटे खोलना तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच शामिल हैं।

समाधान नहीं हुआ तो व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी

जातीय संग्रामी सेना असम ने कहा कि संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय का घेराव इन्हीं समस्याओं के तत्काल समाधान और शिवसागर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर किया गया। संगठन ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग 16 सूत्री मांगपत्र पर गंभीरता से विचार कर प्रभावी कदम उठाएंगे।

साथ ही संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो जनहित में जनता के सहयोग से आने वाले दिनों में और व्यापक एवं कड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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