बाढ़-कटाव को ‘राष्ट्रीय समस्या’ घोषित करने की मांग—शिवसागर में किसान और श्रमिक संगठनों का धरना : जिला आयुक्त कार्यालय के सामने अखिल भारतीय किसान सभा और AITUC का संयुक्त प्रदर्शन—असम की बाढ़ एवं नदी कटाव के स्थायी समाधान की मांग : नगालैंड में कथित अवैध कोयला खनन और असम के बिहुबर में कथित अवैध पत्थर खनन बंद कराने की मांग भी प्रमुखता से उठी
केंद्र और राज्य सरकार से दीर्घकालिक नीति एवं ठोस कार्ययोजना बनाने का आह्वान—किसानों, श्रमिकों और नदी किनारे बसे परिवारों की समस्याओं पर जोर

शिवसागर, 15 सितंबर : असम में हर वर्ष गंभीर रूप धारण करने वाली बाढ़ और नदी कटाव की समस्या को ‘राष्ट्रीय समस्या’ के रूप में मान्यता देने तथा इसके दीर्घकालिक एवं स्थायी समाधान की मांग को लेकर सोमवार को शिवसागर में किसान और श्रमिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय किसान सभा और अखिल भारतीय श्रमिक सभा (AITUC) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से शिवसागर जिला आयुक्त कार्यालय के सामने धरना देकर केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान बाढ़, कटाव और कथित अवैध खनन से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित किया।
अखिल भारतीय श्रमिक महासभा की शिवसागर जिला परिषद के सचिव मदन बरुवा के नेतृत्व में आयोजित धरने में दोनों संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बाढ़ और नदी कटाव को केवल हर वर्ष आने वाली प्राकृतिक आपदा मानकर तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक, दीर्घकालिक और समन्वित कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत है।

‘हर साल की आपदा नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत’
प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना था कि असम में बाढ़ और नदी कटाव दशकों से लाखों लोगों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करते आ रहे हैं। प्रत्येक वर्ष बाढ़ से घरों, कृषि भूमि, फसलों, सड़कों और अन्य आधारभूत संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है, जबकि नदी कटाव के कारण अनेक परिवारों की जमीन एवं संपत्ति प्रभावित होती है।
संगठनों ने कहा कि इस समस्या का सबसे गंभीर प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, श्रमिकों और नदी किनारे बसे परिवारों पर पड़ता है। इसलिए बाढ़ आने के बाद राहत एवं पुनर्वास के उपायों के साथ समस्या के मूल कारणों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक समाधान पर काम करना आवश्यक है।
बाढ़ और कटाव को ‘राष्ट्रीय समस्या’ का दर्जा देने की मांग
अखिल भारतीय किसान सभा और AITUC की प्रमुख मांगों में असम की बाढ़ एवं नदी कटाव की समस्या को ‘राष्ट्रीय समस्या’ के रूप में मान्यता देने की मांग शामिल रही। संगठनों ने केंद्र सरकार से इस दिशा में विशेष पहल करने का आग्रह किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि समस्या की व्यापकता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार को समन्वित रूप से काम करते हुए प्रभावी नीति एवं ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। उनके अनुसार केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है और दीर्घकालिक स्तर पर नदी प्रबंधन, कटाव नियंत्रण तथा प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
किसानों और श्रमिकों की आजीविका पर पड़ रहे प्रभाव का मुद्दा उठाया
धरने में किसान और श्रमिक संगठनों ने बाढ़ तथा कटाव से आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि कृषि भूमि और फसलों को नुकसान होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर श्रमिक वर्ग को भी इसका सीधा असर झेलना पड़ता है।
नदी किनारे रहने वाले परिवारों के लिए कटाव की समस्या और अधिक गंभीर होने की बात कहते हुए संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्थायी सुरक्षा उपाय विकसित करने की मांग की।
नगालैंड में कथित अवैध कोयला खनन का मुद्दा भी उठा
धरना कार्यक्रम के दौरान पड़ोसी राज्य नगालैंड में कथित रूप से चल रहे अवैध कोयला खनन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। दोनों संगठनों ने केंद्र तथा संबंधित राज्य सरकारों से समन्वित रूप से इस मामले में प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
संगठनों का कहना था कि कथित अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित सरकारों एवं प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि आरोपों की जांच कर जहां अवैध गतिविधियां पाई जाएं, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बिहुबर में कथित अवैध पत्थर खनन बंद कराने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने असम के बिहुबर क्षेत्र में कथित अवैध पत्थर खनन का मुद्दा भी उठाया। संगठनों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अवैध रूप से पत्थर खनन किया जा रहा है और इसे तत्काल रोकने के लिए प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है।
दोनों संगठनों ने केंद्र एवं राज्य सरकार से इस विषय पर संयुक्त पहल करने तथा कथित अवैध खनन गतिविधियों की जांच कर कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
तीन प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार से ठोस पहल की मांग
शिवसागर जिला आयुक्त कार्यालय के सामने आयोजित धरने के माध्यम से संगठनों ने मुख्य रूप से असम की बाढ़ और नदी कटाव का स्थायी समाधान, नगालैंड में कथित अवैध कोयला खनन पर रोक तथा बिहुबर में कथित अवैध पत्थर खनन के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
किसान एवं श्रमिक संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र और प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि बाढ़-कटाव से प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी कथित अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए प्रशासनिक स्तर पर मजबूत समन्वय जरूरी है।
किसान-श्रमिक संगठनों के कई नेता रहे मौजूद
धरना कार्यक्रम में अखिल भारत किसान सभा के सचिव कुशल बोरगोहांई, AITUC के जिला अध्यक्ष प्रणव चेतिया, कंस्ट्रक्शन यूनियन के जिला अध्यक्ष रेबो कुंवर, ओएनजीसी कॉन्ट्रैक्चुअल यूनियन के अध्यक्ष इनामुल हक तथा कृषि श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष राजन बाउरी सहित किसान एवं श्रमिक संगठनों के कई नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
प्रदर्शन के माध्यम से संगठनों ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की कि असम में बार-बार आने वाली बाढ़ और नदी कटाव की समस्या के लिए तात्कालिक राहत से आगे बढ़कर दीर्घकालिक एवं स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाए तथा कथित अवैध कोयला और पत्थर खनन से संबंधित शिकायतों पर जांच एवं कानूनसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।




