मूसलधार बारिश ने डुबोया ऐतिहासिक शिवसागर : कृत्रिम बाढ़ से शहर बेहाल, जलनिकासी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल : एक ही रात की बारिश ने खोली तैयारियों की पोल, अधिकांश वार्ड जलमग्न : नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की उठी मांग

शिवसागर, 19 जुलाई : रविवार तड़के हुई मूसलधार बारिश ने ऐतिहासिक शिवसागर शहर की जलनिकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी। कुछ ही घंटों की तेज वर्षा के बाद शहर का बड़ा हिस्सा कृत्रिम बाढ़ (अर्बन फ्लडिंग) की चपेट में आ गया। प्रमुख सड़कें, रिहायशी इलाके और बाजार जलमग्न हो गए, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। लोगों को आवागमन, व्यापार और दैनिक कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

अधिकांश वार्डों में जलभराव, प्रमुख सड़कें बनी तालाब
बारिश के बाद शिवसागर नगर पालिका के 14 वार्डों में से अधिकांश वार्ड जलभराव की समस्या से प्रभावित हो गए। शहर के व्यस्त दौलमुख चाराली, हेमचंद्र बरुआ रोड, बाबूपट्टी, बोर्डिंग रोड सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भर गया। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं, जिससे वाहनों की आवाजाही बाधित हुई और पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
सुबह के समय कार्यालय, विद्यालय और बाजार जाने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए, जबकि दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
जलनिकासी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर के सरकारी नालों और जलनिकासी मार्गों के अवरुद्ध होने के कारण वर्षा का पानी समय पर नहीं निकल सका। उनका कहना है कि यदि नालों की नियमित सफाई और रखरखाव किया गया होता तो कुछ घंटों की बारिश से शहर को कृत्रिम बाढ़ का सामना नहीं करना पड़ता।
लोगों का आरोप है कि वर्षों से जलनिकासी व्यवस्था को लेकर शिकायतें की जाती रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं किए गए। परिणामस्वरूप हर मानसून में शहरवासियों को इसी प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

नगर पालिका की तैयारियों पर उठे सवाल
शहरवासियों ने शिवसागर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में नालों और नालियों की समुचित सफाई नहीं की गई तथा मानसून शुरू होने से पहले जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सफाई अभियान और रखरखाव कार्य पूरे कर लिए जाते, तो पहली ही तेज बारिश में शहर के अधिकांश हिस्सों के जलमग्न होने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
अतिक्रमण ने बढ़ाई समस्या
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि शहर की विभिन्न नहरों, प्राकृतिक जलनिकासी मार्गों और पारंपरिक जल प्रवाह चैनलों पर हुए अतिक्रमण ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। उनका कहना है कि इन मार्गों के संकुचित और अवरुद्ध होने के कारण वर्षा का पानी तेजी से निकासी नहीं पा सका, जिससे जलभराव लंबे समय तक बना रहा।
लोगों ने प्रशासन से इन अतिक्रमणों को हटाने और प्राकृतिक जलनिकासी प्रणाली को पुनर्जीवित करने की मांग की है।

स्थायी समाधान की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और शिवसागर नगर पालिका से मांग की है कि शहर की संपूर्ण जलनिकासी व्यवस्था का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए तथा दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार कर उसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। साथ ही नालों की नियमित सफाई, जलनिकासी चैनलों का विस्तार, अतिक्रमण हटाने और वर्षा पूर्व तैयारियों को प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई है।
शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो हर मानसून में शिवसागर को इसी तरह कृत्रिम बाढ़ और जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा, जिससे जनजीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होती रहेंगी।




