शिवसागर में जापानी इंसेफेलाइटिस और एईएस को लेकर स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट : अब तक 33 मरीजों की पुष्टि, व्यापक फॉगिंग और मच्छर नियंत्रण अभियान तेज : 47 हजार से अधिक बुखार के मामले दर्ज, जेई से अब तक किसी की मौत नहीं : स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी और जनजागरूकता
संयुक्त निदेशक डॉ. माखन कलिता ने नागरिकों से सतर्क रहने, मच्छरों से बचाव करने और लक्षण दिखते ही तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की

शिवसागर, 14 जुलाई : मानसून के आगमन के साथ मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए शिवसागर जिला स्वास्थ्य विभाग ने जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis- JE) तथा एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome- AES) को लेकर पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में अब तक जेई और एईएस के कुल 33 मरीजों की पुष्टि हुई है। राहत की बात यह है कि अब तक इन बीमारियों से किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है। संक्रमण को नियंत्रित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन के सहयोग से व्यापक फॉगिंग, मच्छर नियंत्रण और जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया है।

33 मरीजों की पुष्टि, खेलेुआ ब्लॉक में सबसे अधिक मामले
जिला स्वास्थ्य सेवा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. माखन कलिता ने बताया कि जिले के छह स्वास्थ्य खंडों में कुल 33 मरीज चिन्हित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 11 मरीज खेलेुआ ब्लॉक से सामने आए हैं। इसके अलावा डिमौ में 6, गेलेकी में 5, गौरीसागर में 5, कालुगांव में 5 तथा मोराबाजार में 1 मरीज की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि सभी मरीजों की चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है तथा आवश्यक उपचार और नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है।
47 हजार से अधिक बुखार के मामले, प्रतिदिन जारी निगरानी
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP), असम के अंतर्गत जारी 10 जुलाई 2026 की ब्लॉकवार दैनिक महामारी विज्ञान रिपोर्ट के अनुसार जिले में इस वर्ष अब तक 47,145 बुखार के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक डिमौ में 10,948 तथा गेलेकी में 10,879 मरीज दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा खेलेुआ में 7,224, गौरीसागर में 6,321, कालुगांव में 5,950 तथा मोराबाजार में 5,823 बुखार के मरीज दर्ज हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 10 जुलाई को ही जिले में 157 नए बुखार के मरीज सामने आए। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने 66 रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) तथा 308 ब्लड स्लाइड जांच कर संभावित मच्छरजनित बीमारियों की स्क्रीनिंग की।
मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिले में मलेरिया की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बनी हुई है। वर्ष 2026 में अब तक व्यापक जांच अभियान के बावजूद केवल दो मलेरिया मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई तथा स्थानीय संक्रमण भी दर्ज नहीं किया गया है।
इसी प्रकार डेंगू और चिकनगुनिया का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। इन दोनों बीमारियों से भी जिले में किसी प्रकार की मृत्यु दर्ज नहीं की गई है। विभाग का कहना है कि लगातार निगरानी और रोकथाम अभियान के कारण इन बीमारियों की स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है।
जापानी इंसेफेलाइटिस के छह पुष्ट मामले, मौत शून्य
महामारी विज्ञान रिपोर्ट के अनुसार 10 जुलाई को जापानी इंसेफेलाइटिस का कोई नया मामला सामने नहीं आया, लेकिन वर्ष 2026 के प्रगतिशील आंकड़ों में अब तक कुल छह पुष्ट जेई मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें खेलेुआ ब्लॉक में दो, जबकि गेलेकी, डिमौ, गौरीसागर और कालुगांव में एक-एक मामला दर्ज किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि इन सभी मामलों में अब तक किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है।
फॉगिंग और मच्छर नियंत्रण अभियान को मिली रफ्तार
संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फॉगिंग, एंटी-लार्वा गतिविधियां, मच्छर नियंत्रण अभियान और कीटनाशक छिड़काव को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार 10 जुलाई को जिले के सात स्थानों पर फॉगिंग की गई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 2,411 स्थानों पर फॉगिंग अभियान चलाया जा चुका है। विभाग ने बताया कि संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों में यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
घर-घर पहुंचकर लोगों को किया जा रहा जागरूक
स्वास्थ्य विभाग केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चला रहा है। आशा कार्यकर्ता, एएनएम, स्वास्थ्य कर्मी तथा स्थानीय प्रशासन गांवों और शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई बनाए रखने, जलभराव रोकने और समय पर स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों को जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि यह वर्ग मच्छरजनित बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है।

डॉ. माखन कलिता की अपील—लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल जाएं
जिला स्वास्थ्य सेवा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. माखन कलिता ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि मानसून के दौरान मच्छरों से बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, नियमित साफ-सफाई बनाए रखने, मच्छरदानी का उपयोग करने, पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, मानसिक भ्रम, दौरे पड़ना अथवा एन्सेफेलाइटिस से जुड़े अन्य लक्षण दिखाई दें तो किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लें। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा जिला अस्पताल को आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था के साथ अलर्ट मोड पर रखा गया है। विभाग लगातार ब्लॉकवार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त स्वास्थ्य टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।




