आमगुड़ी में प्रधानमंत्री का पुतला फूंककर केएमएसएस-सीएमएसएस का विरोध—बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत और मुआवजे की मांग : कृषक मुक्ति संग्राम समिति का आरोप—असम दौरे के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों और पीड़ित परिवारों की स्थिति देखने नहीं पहुंचे प्रधानमंत्री : प्रदर्शनकारियों ने उठाया राहत, पुनर्वास और नुकसान के अनुरूप मुआवजे का मुद्दा—केंद्र से प्रभावी कदम उठाने की मांग
‘आशीर्वादर बंती’ के आह्वान का भी किया विरोध—प्रधानमंत्री के बजाय जुबिन गर्ग के नाम पर दीप जलाने की अपील

आमगुड़ी, 17 सितंबर : असम में हाल की विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत, पुनर्वास और नुकसान के अनुरूप मुआवजा देने की मांग को लेकर कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) और छात्र मुक्ति संग्राम समिति (सीएमएसएस) ने आमगुड़ी में विरोध प्रदर्शन किया। आमगुड़ी नगर के चाराली में एकत्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर केंद्र सरकार के प्रति विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बाढ़ ने असम के विभिन्न हिस्सों में व्यापक नुकसान पहुंचाया और बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए, लेकिन प्रधानमंत्री ने प्रभावित इलाकों में जाकर पीड़ित परिवारों की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा नहीं लिया। संगठन ने इसे लेकर नाराजगी जताते हुए बाढ़ पीड़ितों के लिए तत्काल और पर्याप्त सहायता की मांग की।

बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति को लेकर उठाए सवाल
केएमएसएस और सीएमएसएस कार्यकर्ताओं ने कहा कि बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों को घर, संपत्ति और आजीविका से जुड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है। संगठनों का आरोप है कि अनेक परिवार अब भी विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं और ऐसे समय में केंद्र सरकार को उनके लिए राहत तथा पुनर्वास की व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग बाढ़ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत, वास्तविक नुकसान के अनुरूप मुआवजा और प्रभावी पुनर्वास उपलब्ध कराने की रही।
प्रधानमंत्री के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान केएमएसएस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के असम दौरे के बावजूद उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ित परिवारों की स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा नहीं लिया। संगठन ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।
हालांकि, इस राजनीतिक आरोप के संदर्भ में यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने 28 जुलाई 2026 को असम के सांसदों के साथ बैठक कर राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने उस समय कहा था कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की सहायता के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

राहत, मुआवजा और पुनर्वास की मांग
केएमएसएस और सीएमएसएस ने केंद्र सरकार से बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत व्यवस्था में तेजी लाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सहायता केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नुकसान झेलने वाले परिवारों के पुनर्वास और आजीविका बहाली के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
आमगुड़ी चाराली में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग उठाई।
‘आशीर्वादर बंती’ के आह्वान पर भी जताया विरोध
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर दीप जलाने के आह्वान का मुद्दा भी उठा। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर उनके मंगल की कामना के लिए दीप प्रज्वलित करने की अपील पर असहमति जताई।
बताया गया कि 17 सितंबर की शाम प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े अवसर को लेकर भाजपा नेतृत्व की ओर से कार्यकर्ताओं से ‘आशीर्वादर बंती’ के रूप में दीप जलाने का आह्वान किया गया था।
इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने लोगों से प्रधानमंत्री के नाम पर दीप जलाने के बजाय असम के लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग के नाम पर दीप प्रज्वलित करने की अपील की। यह आह्वान प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से उनके राजनीतिक विरोध के हिस्से के रूप में किया गया।
इन नेताओं के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन
आमगुड़ी में आयोजित विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कृषक मुक्ति संग्राम समिति के केंद्रीय मुख्य संगठन सचिव रितुमोनी हजारिका, छात्र मुक्ति संग्राम समिति के केंद्रीय उपाध्यक्ष रोबिन हजारिका, जिला अध्यक्ष अभिजीत चेतिया एवं पल्लव सैकिया तथा सचिव भास्कर बैरागी ने किया।
इनके नेतृत्व में कार्यकर्ता आमगुड़ी चाराली में एकत्र हुए और प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग
केएमएसएस और सीएमएसएस ने कहा कि उनके प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित परिवारों की समस्याओं को सरकार के सामने प्रमुखता से रखना है। संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से प्रभावित लोगों के लिए राहत, पुनर्वास और उचित मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बाढ़ से नुकसान झेलने वाले परिवारों की स्थिति को देखते हुए सहायता और पुनर्वास संबंधी कदमों में तेजी लाई जानी चाहिए तथा प्रभावित लोगों को वास्तविक नुकसान के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।




