डेढ़ घंटे की मूसलाधार बारिश में पानी-पानी हुआ शिवसागर—कई वार्डों में कृत्रिम बाढ़, ड्रेनेज व्यवस्था पर फिर उठे सवाल : दौलमुख चाराली, जमुना पार, बाबूपट्टी, दासपट्टी, मुक्तिनाथ चाराली और आमोलापट्टी समेत कई इलाके जलमग्न : ONGC कॉलोनी के आसपास सड़कों पर भरा पानी—जिला आयुक्त कार्यालय का पार्किंग एरिया भी जलभराव की चपेट में
नालों की सफाई और जल निकासी को लेकर लोगों में नाराजगी—नगरपालिका से स्थायी समाधान की मांग

शिवसागर, 16 सितंबर : ऐतिहासिक शिवसागर शहर बुधवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश के बाद एक बार फिर पानी-पानी हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई वार्डों, प्रमुख सड़कों और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। देखते ही देखते कई हिस्सों में कृत्रिम बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिससे आम लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस जलभराव ने शहर की मौजूदा जल निकासी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डेढ़ घंटे की बारिश और कई इलाके जलमग्न
बुधवार सुबह हुई जोरदार बारिश का सबसे अधिक असर शहर के निचले इलाकों और उन स्थानों पर देखने को मिला, जहां पूर्व में भी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती रही है। कई सड़कों पर काफी मात्रा में पानी जमा हो जाने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई, जबकि राहगीरों और स्थानीय निवासियों को भी परेशानी उठानी पड़ी।
बारिश के बाद दौलमुख चाराली, जमुना पार, बाबूपट्टी, दासपट्टी, मुक्तिनाथ चाराली, आमोलापट्टी, ONGC कॉलोनी और उसके आसपास के इलाकों समेत शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया। विभिन्न वार्डों की सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव के कारण कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ।
ONGC कॉलोनी के आसपास सड़कों पर जमा हुआ पानी
शहर के ONGC कॉलोनी क्षेत्र और आसपास की सड़कों पर भी बारिश का पानी जमा हो गया। अचानक हुए जलभराव के कारण स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिवसागर में तेज बारिश के बाद जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। कुछ समय तक लगातार तेज बारिश होते ही शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होने लगता है। बुधवार सुबह करीब डेढ़ घंटे की मूसलाधार बारिश के बाद पैदा हुई स्थिति ने इस पुरानी समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया।

जिला आयुक्त कार्यालय का पार्किंग एरिया भी नहीं बचा
कृत्रिम बाढ़ का असर केवल रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों तक ही सीमित नहीं रहा। शिवसागर जिला आयुक्त कार्यालय परिसर का पार्किंग एरिया भी जलभराव की चपेट में आ गया। बारिश के बाद पार्किंग क्षेत्र में पानी भरने से जिले के प्रमुख प्रशासनिक कार्यालय परिसर में भी जल निकासी की स्थिति चर्चा का विषय बन गई।
शहर के विभिन्न हिस्सों के साथ जिला आयुक्त कार्यालय परिसर में भी पानी भरने के बाद शिवसागर की ड्रेनेज व्यवस्था और बारिश के पानी की निकासी को लेकर स्थानीय स्तर पर फिर बहस तेज हो गई है।
नालों की सफाई पर लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय नागरिकों ने शहर में बार-बार उत्पन्न हो रही कृत्रिम बाढ़ जैसी स्थिति के लिए नालों और जल निकासी व्यवस्था की कथित बदहाली को जिम्मेदार ठहराया है। लोगों का आरोप है कि नालों और नालियों की पर्याप्त खुदाई, नियमित सफाई और रखरखाव नहीं होने के कारण भारी बारिश के दौरान पानी तेजी से बाहर नहीं निकल पाता।
नागरिकों का कहना है कि जब बारिश का पानी निर्धारित जल निकासी मार्गों से समय पर नहीं निकलता तो सड़कों, गलियों और निचले इलाकों में पानी जमा होने लगता है। यही कारण है कि थोड़ी देर की मूसलाधार बारिश भी शहर के कई हिस्सों में कृत्रिम बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर देती है।

नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी
बार-बार सामने आ रही जलभराव की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने शिवसागर नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि शहर के नालों की सफाई और रखरखाव को लेकर पर्याप्त एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से समस्या लगातार बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश के मौसम से पहले ही प्रमुख नालों और छोटी नालियों की वैज्ञानिक तरीके से सफाई, गाद निकालने और पानी के निर्बाध प्रवाह की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका मानना है कि केवल तात्कालिक सफाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
बारिश थमी, लेकिन कई जगह बनी रही परेशानी
बारिश थमने के बाद भी शहर के कई स्थानों पर जमा पानी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना रहा। दौलमुख चाराली, जमुना पार और बाबूपट्टी से लेकर दासपट्टी, मुक्तिनाथ चाराली, आमोलापट्टी तथा ONGC कॉलोनी के आसपास तक हुए जलभराव ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की कमजोरियों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर बार भारी बारिश के बाद यही स्थिति पैदा होती है, तो शहर की मौजूदा जल निकासी प्रणाली की व्यापक समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
स्थायी और वैज्ञानिक ड्रेनेज व्यवस्था की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों ने नगरपालिका और संबंधित विभागों से मांग की है कि शहर के नालों और नालियों की नियमित सफाई के साथ उनकी क्षमता और पानी के बहाव का वैज्ञानिक आकलन कराया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां नालों का विस्तार और पुनर्निर्माण कर पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए।
लोगों का कहना है कि शिवसागर जैसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण शहर में हर बार मूसलाधार बारिश के बाद सड़कों और रिहायशी इलाकों का जलमग्न होना गंभीर नागरिक समस्या है। बुधवार की बारिश ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि शिवसागर को बार-बार होने वाले कृत्रिम जलभराव से स्थायी राहत आखिर कब मिलेगी?




