शिवसागर सिविल अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा—परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का लगाया आरोप : 48 वर्षीय दीपक दास की मौत के बाद फूटा परिवार का गुस्सा—पत्नी ने शव के सामने मांगा न्याय : “समय पर इलाज नहीं मिला”—परिजनों ने डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका पर उठाए सवाल
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर जातीय संग्रामी सेना असम भी मुखर—अस्पताल के सामने प्रदर्शन का ऐलान

शिवसागर, 16 सितंबर : शिवसागर सिविल अस्पताल में 48 वर्षीय एक मरीज की मौत के बाद मंगलवार को तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। मृतक की पहचान शिवसागर के थानामुख निवासी दीपक दास (48) के रूप में हुई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने के बावजूद उन्हें समुचित और समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिली तथा कथित चिकित्सकीय लापरवाही के कारण उनकी मौत हो गई। हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर अस्पताल प्रशासन और संबंधित चिकित्सकों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

पति का शव सामने देख फूटा पत्नी का गुस्सा
दीपक दास की मौत के बाद अस्पताल परिसर में उनकी पत्नी का दुख और आक्रोश फूट पड़ा। पति का शव सामने रखकर उन्होंने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और न्याय की मांग की। महिला ने कहा कि वह शिवसागर सिविल अस्पताल की कथित खराब व्यवस्था के बारे में पहले सुनती रही थीं, लेकिन अब स्वयं इसका अनुभव किया है। उनका आरोप है कि उनके पति को उचित उपचार नहीं मिला और इसी कारण उनकी जान चली गई।
पति की मौत से गहरे सदमे में आई महिला ने भावुक अवस्था में यहां तक कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगी। इस बयान ने मौके पर मौजूद लोगों को भी चिंतित कर दिया। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर इलाज के दौरान हुई कथित चूक की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी के बाद कराया गया था भर्ती
परिवार के अनुसार, दीपक दास को करीब 24 घंटे पहले बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के बाद शिवसागर सिविल अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों का दावा है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी तबीयत धीरे-धीरे और बिगड़ती चली गई।
परिवार का आरोप है कि मरीज की स्थिति बिगड़ने के बावजूद उन्हें बीमारी, आवश्यक जांच और चल रहे उपचार के संबंध में चिकित्सकों की ओर से पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उनका यह भी आरोप है कि हालत गंभीर होने के बावजूद ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ की ओर से अपेक्षित चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई।
बेटे का आरोप—“करीब 50 फीट दूर मौजूद डॉक्टर भी देखने नहीं आए”
मृतक दीपक दास के पुत्र ने भी अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उनके पिता की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, लेकिन मौत से पहले तक करीब 50 फीट की दूरी पर मौजूद चिकित्सक भी उन्हें देखने नहीं पहुंचे।
बेटे ने अपने पिता की मौत के लिए चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मरीज को भर्ती किए जाने से लेकर उनकी मौत तक कौन-कौन सी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं और गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर क्या कदम उठाए गए।

मरीज की मौत के बाद फिर सवालों में अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था
दीपक दास की मौत और उसके बाद परिजनों के रोष के बीच शिवसागर सिविल अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
इसी बीच जातीय संग्रामी सेना असम भी दीपक दास की मौत के मामले को लेकर सामने आई है। संगठन ने मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग करते हुए शिवसागर सिविल अस्पताल के सामने विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन ने अस्पताल में चिकित्सकों की कथित कमी को लेकर भी नाराजगी जताई है।
मेडिसिन, शिशु रोग और स्त्री रोग विभाग में डॉक्टरों की कमी का आरोप
जातीय संग्रामी सेना असम का आरोप है कि शिवसागर सिविल अस्पताल में लंबे समय से पर्याप्त संख्या में चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं और इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
संगठन के अनुसार, विशेष रूप से मेडिसिन, शिशु रोग और स्त्री रोग सहित विभिन्न विभागों में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में शीघ्र पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति करने की मांग की है।

अधीक्षक डॉ. साधन बोरा को सौंपा ज्ञापन
अस्पताल की विभिन्न समस्याओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को लेकर जातीय संग्रामी सेना असम की शिवसागर जिला समिति ने शिवसागर सिविल अस्पताल के अधीक्षक को एक ज्ञापन भी सौंपा है।
जिला समिति के सचिव रिदीप डेका के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल के अधीक्षक डॉ. साधन बोरा को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल की मौजूदा समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की। संगठन ने विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका पर भी उठाए सवाल
जातीय संग्रामी सेना असम ने शिवसागर में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल की भूमिका की भी आलोचना की। संगठन का कहना है कि जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं, विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी, पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग को तत्काल ध्यान देना चाहिए।
संगठन ने मांग की कि शिवसागर सिविल अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रिक्त अथवा आवश्यक पदों पर पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय विधायक अखिल गोगोई की भूमिका पर भी संगठन ने उठाया सवाल
जातीय संग्रामी सेना असम की शिवसागर जिला समिति के सचिव रिदीप डेका ने शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई की भूमिका पर भी सवाल उठाए। डेका ने कहा कि राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाने वाले विधायक के अपने विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख सरकारी अस्पताल में यदि चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, तो इस समस्या के समाधान को लेकर स्थानीय विधायक की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
संगठन ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार से अस्पताल की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
समाधान नहीं हुआ तो लगातार आंदोलन की चेतावनी
जातीय संग्रामी सेना असम ने चेतावनी दी है कि यदि शिवसागर सिविल अस्पताल में चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सहित अन्य समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन आने वाले दिनों में लगातार लोकतांत्रिक आंदोलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित करेगा।
संगठन ने दीपक दास की मौत से जुड़े आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं और यदि हुई तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।
अस्पताल प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार
फिलहाल दीपक दास की मौत को लेकर परिजनों की ओर से लगाए गए चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप गंभीर हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। अस्पताल प्रशासन, संबंधित चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मरीज की मौत की परिस्थितियों और उपचार में कथित लापरवाही से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसे में पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि मरीज को दिए गए उपचार, उसकी स्वास्थ्य स्थिति और मौत से पहले उठाए गए चिकित्सकीय कदमों की तथ्यात्मक तस्वीर सामने आ सके।




